रिपोर्ट: जफर इकबाल
बच्चों के दूध के दांत अक्सर माता-पिता को मामूली लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें नज़रअंदाज़ करना भविष्य में बच्चे के दांतों और जबड़े की बनावट पर गंभीर असर डाल सकता है। इस विषय पर डेंटिस्ट गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. माहेरा खान (MDS) ने बच्चों के दांतों की देखभाल को लेकर कई अहम बातें साझा कीं। देखिए वीडियो:
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🦷 दूध के दांत गिरने तक क्यों ज़रूरी हैं?
डॉ. माहेरा खान बताती हैं कि बच्चों के दूध के दांत सिर्फ अस्थायी नहीं होते, बल्कि स्थायी दांतों की सही पोजिशनिंग और विकास में इनका अहम रोल होता है। अगर दूध के दांत समय से पहले खराब या टूट जाएं, तो स्थायी दांतों की दिशा बिगड़ सकती है और बच्चे के जबड़े की संरचना पर असर पड़ सकता है।
“दूध के दांत बच्चे की चबाने की क्षमता, बोलने की स्पष्टता और चेहरे की बनावट में अहम भूमिका निभाते हैं,”
— डॉ. माहेरा खान
🪥 बच्चों के दांतों की सफाई कब से शुरू करें?
डॉ. माहेरा बताती हैं कि जैसे ही बच्चे के पहले दांत निकलें, उसी दिन से उसकी साफ-सफाई की आदत डालना चाहिए। छोटे बच्चों के लिए मुलायम ब्रश और बच्चों के अनुकूल टूथपेस्ट का प्रयोग करना चाहिए।
“सुबह और रात में दो बार ब्रश करना बचपन से ही सिखाएं, ताकि दांतों में सड़न या कैविटी की समस्या न हो,”
— डॉ. माहेरा खान का सुझाव
🍭 मीठे खाद्य पदार्थों से सावधानी रखें
बच्चों को चॉकलेट, कैंडी या मीठे जूस देने के बाद अगर मुंह साफ न किया जाए तो दांतों में सड़न जल्दी शुरू हो जाती है। डॉ. माहेरा खान कहती हैं कि माता-पिता को बच्चों की खानपान की आदतों पर ध्यान देना चाहिए, और रात को सोने से पहले हमेशा ब्रश करवाना चाहिए।
👩⚕️ नियमित डेंटल चेकअप जरूरी
डॉ. माहेरा खान सलाह देती हैं कि बच्चों को हर छह महीने में एक बार दंत चिकित्सक को ज़रूर दिखाना चाहिए। शुरुआती जांच से दांतों की सड़न, टेढ़ापन या मसूड़ों की समस्या का इलाज समय रहते हो सकता है।
“बच्चों में दांतों की देखभाल एक आदत बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में उन्हें दर्द और खर्च दोनों से बचाया जा सके,”
— डॉ. माहेरा खान (गोल्ड मेडलिस्ट डेंटिस्ट, MDS)
बच्चों के दूध के दांत अस्थायी ज़रूर हैं, लेकिन उनकी अहमियत स्थायी दांतों से कम नहीं। नियमित ब्रशिंग, संतुलित खानपान और समय पर डेंटल चेकअप से बच्चों की मुस्कान सालों तक सुरक्षित रह सकती है।

