दिल्ली के 300 घर – यूपी सरकार ने क्यों किया सील? 200 साल पुरानी बस्ती होने का दावा…

दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में स्थित आली गांव की मस्जिद कॉलोनी में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग (Uttar Pradesh Irrigation Department) की कार्रवाई के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यहां 300 मकानों को सील किए जाने के बाद लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनके पास आधार कार्ड, वोटर आईडी, बिजली-पानी के कनेक्शन और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, फिर भी बिना पूर्व सूचना के उनके घरों पर कार्रवाई की गई। इस पूरे मामले ने दिल्ली सरकार और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

आली गांव में पुस्ता रोड से सटी 8.48 एकड़ जमीन को लेकर यूपी सिंचाई विभाग दावा कर रहा है कि यह भूमि उसके अधिकार क्षेत्र में आती है। इसी जमीन पर बाजार, दुकानें और रिहायशी मकान बने हुए हैं। बंद पड़ी रेलवे लाइन पार करने के बाद मस्जिद कॉलोनी आती है, जहां बड़ी संख्या में परिवार वर्षों से रह रहे हैं।

बिना नोटिस सीलिंग का आरोप:
मस्जिद कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि 13 दिसंबर को अचानक उनके घर सील कर दिए गए, जबकि इससे पहले किसी तरह का नोटिस नहीं दिया गया। कॉलोनी के 300 में से कई घरों पर ताले लग गए और लोग अपना सामान तक नहीं निकाल पाए। निवासियों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान उनका घरेलू सामान बाहर फेंक दिया गया और बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए गए।

पीर कॉलोनी में भी डर का माहौल:
मस्जिद कॉलोनी से करीब 500 मीटर दूर स्थित पीर कॉलोनी में भी यूपी सिंचाई विभाग 8.48 एकड़ जमीन पर अपना दावा कर रहा है। फिलहाल यहां मकानों को सील नहीं किया गया है, लेकिन लोग आशंकित हैं कि किसी भी दिन इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। पीर कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि वे मानसिक तनाव में जी रहे हैं और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

मदरसे पर कार्रवाई, पानी की सप्लाई बाधित:
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मस्जिद के बगल में बने मदरसे को भी सील कर दिया गया। मस्जिद के इमाम मोहम्मद आबदीन का कहना है कि 15 तारीख को 500 से अधिक अधिकारी और पुलिसकर्मी बिना नोटिस के पहुंचे। मस्जिद को तो सील नहीं किया गया, लेकिन मदरसे पर ताला लगा दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने मस्जिद की पानी की सप्लाई के लिए लगे सबमर्सिबल पंप को भी तोड़ दिया, जिससे नमाजियों को वजू करने में परेशानी हो रही है।

पानी-बिजली कटने से बढ़ी परेशानी:
कॉलोनी में रहने वाले लोग बताते हैं कि उनके बिजली मीटर उखाड़ लिए गए और पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। हालात ऐसे हैं कि नहाने तक का इंतजाम नहीं है। लोग तिरपाल डालकर उसी जगह रहने को मजबूर हैं, क्योंकि आसपास के इलाकों में किराए के मकान नहीं मिल रहे। किराया 2 हजार से बढ़कर 5 हजार रुपये तक पहुंच गया है और कमरे भी लगभग खत्म हो चुके हैं।

धार्मिक पहचान से परे बस्ती का दावा:
निवासियों का कहना है कि भले ही कॉलोनी का नाम मस्जिद कॉलोनी है, लेकिन यहां सभी धर्मों के लोग रहते हैं। उनका दावा है कि यह बस्ती 200 साल पुरानी है और कई परिवार 6 से 7 पीढ़ियों से यहीं बसे हुए हैं। लोगों के पास राशन कार्ड, बिजली-पानी के कनेक्शन और अन्य सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं।

यूपी सिंचाई विभाग का पक्ष:
यूपी सिंचाई विभाग का कहना है कि यह जमीन उसकी है और दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के आदेश पर सीलिंग की गई है। विभाग के अनुसार इस मामले में दिल्ली के साकेत कोर्ट (Saket Court) में केस चल रहा है, जिसकी सुनवाई 13 जनवरी को होनी है। विभाग का दावा है कि 2002 में ओखला क्षेत्र की जमीनों को लेकर वह पहले ही केस जीत चुका है और 2004 तक खाली जमीनों पर कब्जा लिया गया था।

कानूनी लड़ाई और वकीलों की दलील:
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद कॉलोनी और पीर कॉलोनी के करीब 250 लोगों का केस सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) और दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील अनुज कुमार गर्ग लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि विवादित जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की नहीं है और यहां 50 से 60 साल से लोग रह रहे हैं। वे लिमिटेशन एक्ट 1963 का हवाला देते हुए कहते हैं कि लंबे समय से बसे लोगों का अधिकार एडवर्स पजेशन के तहत माना जा सकता है।

डिमार्केशन और बातचीत पर जोर:
अनुज गर्ग का कहना है कि जमीन का पूरा डिमार्केशन अब तक नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी पक्ष आपस में बैठकर समाधान निकालें। इसी क्रम में दिल्ली सरकार, लेफ्टिनेंट गवर्नर (Lieutenant Governor), डीडीए (DDA) और केंद्र सरकार को पक्षकार बनाकर नया केस दायर किया गया है। सभी को नोटिस जारी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया है।

यूपी विभाग का दिल्ली में दावा कैसे:
विशेषज्ञों के अनुसार आजादी से पहले और उसके बाद लंबे समय तक यमुना नदी और नहरों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संयुक्त प्रांत यानी आज के उत्तर प्रदेश के पास थी। इसी कारण दिल्ली में यमुना किनारे की कई जमीनें कानूनी रूप से यूपी सिंचाई विभाग के अधीन रहीं। दिल्ली के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी कई जमीनों का ट्रांसफर पूरी तरह नहीं हो सका, जिससे आज यह विवाद सामने आ रहा है।

आगे क्या:
निवासियों की मांग है कि यूपी और दिल्ली सरकार आपसी विवाद सुलझाएं, ताकि 1,500 से 1,600 घरों में रहने वाले परिवारों को राहत मिल सके। ठंड के मौसम में सैकड़ों परिवारों का सड़क पर आना मानवीय संकट को जन्म दे सकता है।

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Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवाददाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com

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