दिल्ली (Delhi) में रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) के पास मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई 6 जनवरी की देर रात करीब एक बजे की गई। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के आदेश के अनुपालन में नगर निगम दिल्ली (MCD) ने इस अभियान को अंजाम दिया। कार्रवाई के दौरान 17 बुलडोजर लगाए गए, जिनकी मदद से बारात घर, डायग्नोस्टिक सेंटर और कई दुकानों को ढहा दिया गया। देर रात हुई इस कार्रवाई के चलते पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
पथराव और पुलिस की सख्ती:
तुर्कमान गेट (Turkman Gate) स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद (Faiz-e-Ilahi Mosque) के पास जब अतिक्रमण हटाया जा रहा था, उसी दौरान वहां मौजूद भीड़ ने निगम कर्मचारियों और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। बताया गया कि भीड़ बैरिकेडिंग तोड़कर कार्रवाई को रोकने के इरादे से आगे बढ़ी, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद भीड़ को पीछे हटना पड़ा और हालात पर काबू पाया गया।
इलाके को नौ जोन में बांटा गया:
सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मधुर वर्मा ने बताया कि हालात नियंत्रण में हैं। पूरे क्षेत्र को सुरक्षा के लिहाज से नौ जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी एडीसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। पथराव करने वालों की पहचान वीडियो फुटेज के जरिए की जाएगी, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
कार्रवाई अभी जारी:
डीसीपी निधिन वलसन ने बताया कि नगर निगम दिल्ली ने यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर की है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। पथराव की घटना में 4 से 5 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मामूली चोटें आई हैं। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया है।
क्या है पूरा विवाद:
फैज-ए-इलाही मस्जिद की प्रबंधन समिति ने नगर निगम दिल्ली के 22 दिसंबर 2025 के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। निगम के आदेश में कहा गया था कि मस्जिद के बाहर स्थित करीब 0.195 एकड़ जमीन पर बने ढांचे अवैध हैं और इन्हें हटाया जाएगा। नगर निगम का कहना है कि इस अतिरिक्त जमीन पर मालिकाना हक या वैध कब्जे से जुड़े कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
हाईकोर्ट के पुराने निर्देश:
नगर निगम का यह आदेश 12 नवंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के निर्देशों के आधार पर जारी किया गया था। डिवीजन बेंच ने तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान से लगभग 38,940 वर्ग फुट अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसमें सड़क, फुटपाथ, बारात घर, पार्किंग और एक निजी क्लिनिक शामिल बताए गए थे।
मस्जिद समिति की आपत्ति:
मस्जिद प्रबंधन समिति का कहना है कि संबंधित जमीन वक्फ संपत्ति है और इसके लिए दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) को लीज किराया दिया जाता है। समिति ने यह भी कहा कि अतिक्रमण हटाने पर कोई आपत्ति नहीं है और बारात घर व क्लिनिक का संचालन पहले ही बंद किया जा चुका है। मुख्य आपत्ति कब्रिस्तान से जुड़ी जमीन को लेकर जताई गई है।
6 जनवरी को जारी हुआ नोटिस:
6 जनवरी को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन से अतिक्रमण हटाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने नगर निगम दिल्ली, शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली वक्फ बोर्ड समेत अन्य संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।
अगली सुनवाई की तारीख तय:
जस्टिस अमित बंसल ने कहा था कि यह मामला सुनवाई योग्य है। सभी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
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