राजधानी की हवा फिर जहरीली, आनंद विहार में AQI 371; जानें अन्य इलाकों का हाल

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर एक बार फिर खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार चला गया है, जिसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा गया है। इस स्थिति ने दिल्लीवासियों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं प्रशासन ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

वायु गुणवत्ता गिरने से बढ़ी चिंता:
दिल्ली में ठंड की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। CPCB के अनुसार आनंद विहार, अशोक विहार, वजीरपुर, रोहिणी, पटपड़गंज और पंजाबी बाग जैसे क्षेत्रों में एक्यूआई 300 से 350 के बीच दर्ज किया गया है। यह स्थिति ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आती है, जो सांस लेने और हृदय संबंधी बीमारियों के मरीजों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर का प्रदूषण लंबे समय तक रहने पर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

कर्तव्य पथ पर लगाए गए वॉटर स्प्रिंकलर:
वायु में धूल और धुएं के कणों को कम करने के लिए प्रशासन ने राजधानी के कई हिस्सों में ट्रक-माउंटेड वॉटर स्प्रिंकलर की व्यवस्था की है। कर्तव्य पथ (Kartavya Path), इंडिया गेट और उसके आसपास के क्षेत्रों में ये स्प्रिंकलर दिनभर सक्रिय रहेंगे। इनका उद्देश्य हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) को कम करना है ताकि नागरिकों को कुछ राहत मिल सके।

सरकार ने जारी की अपील:
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे गैर-जरूरी यात्रा से बचें और निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इसके साथ ही निर्माण कार्यों में धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव अनिवार्य किया गया है। पर्यावरण विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कूड़ा या पत्ते जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों ने दिए सुझाव:
पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल अल्पकालिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं। दिल्ली में प्रदूषण का प्रमुख कारण वाहनों का धुआं, निर्माण स्थलों की धूल और पराली जलाना है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण जरूरी है।

दिल्लीवासियों के लिए बढ़ी मुश्किलें:
लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता से दिल्ली में सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। अस्पतालों में अस्थमा, एलर्जी और खांसी से परेशान मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसे हालात में लोगों को सुबह की सैर और खुले में व्यायाम करने से बचना चाहिए।

निष्कर्ष:
दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या अब हर साल दोहराई जा रही है। प्रशासन ने तत्काल राहत के लिए वॉटर स्प्रिंकलर और निर्माण कार्यों पर निगरानी जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के बिना इस समस्या से निजात संभव नहीं है।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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