ब्यूरो डेस्क। कोरोना महामारी से रोकथाम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन करने का सख्त निर्णय लिया है। इस निर्णय से दिल्ली एनसीआर के क्षेत्र में अफरा तफरी मच गई। प्रवासी मजदुर व दिल्ली एनसीआर में नौकरी करने वाले घबरा गए और अपने घरों की निकल गए। हज़ारों लोग सड़कों पर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलते हुए नज़र आ रहे थे।
#मध्यप्रदेश के मुरैना में अपने घर पहुंचने के लिए दिल्ली से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय कर #आगरा पहुंचे एक 39 वर्षीय व्यक्ति की यहां मौत हो गई। pic.twitter.com/pYpdGc5rRj
— IANS (@ians_india) March 29, 2020
तो इसी दौरान कई स्थानीय अख़बारों में खबर आयी कि लॉकडाउन के बीच दिल्ली से पैदल घर जा रहे एक युवक की रास्ते में ही मौत हो गई है. रणवीर सखवार मध्य प्रदेश के मुरैना के रहने वाले थे. वह दिल्ली के एक होटल में डिलिवरी पहुंचाने का काम करते थे. दलित युवक रणवीर की मौत पैदल चलने के दौरान हार्टअटैक से हो गई.

ये खबर अपने आप में दर्दनाक है। सरकार ने कोरोना वायरस से रोकथाम के लिए लॉकडाउन का सही निर्णय लिया। लेकिन क्या इस निर्णय लेने से पहले क्या सरकार को देश की परिस्थिति नहीं पता थी या ये नहीं पता था कि हमारे देश असहाय लोगों की संख्या कितनी हैं? हमारे देश में कोरोना का पहला केस 30 जनवरी को आया था और 10 मार्च तक देश में लगभग 44 केस आ चुके थे। फिर बिना इंतज़ाम के ऐसा निर्णय क्यों लिया गया। खैर वर्तमान परिस्थिति देखते हुए, अब कोरोना महामारी से बचना ही पहली प्राथमिकता है और सभी देशवासी अपने घरों में सोशल डिस्टेंस बनाकर रखें, बार बार अपने हाथ को साबुन से धोते रहे।

