जिगाना पिस्टल: माफिया का घातक हथियार, 2 करोड़ की डील का खुलासा

जिगाना की गूँज है, अपराधों के हर छोर,

यूपी बना रूट, यहाँ तस्करों का जोर।

मूसेवाला से अतीक तक, खूनी खेल की कहानी,

हवाला से हुई फंडिंग, विदेशी असलहों की मनमानी।

Deadly Zigana Trail: Mafia to Gangster, ₹2 Cr Connection.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश भर में सनसनीखेज अपराधों में एक खास विदेशी पिस्तौल की मौजूदगी बार-बार सामने आ रही है—वह है जिगाना पिस्टल। गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या से लेकर उत्तर प्रदेश के माफिया भाई अतीक और अशरफ की मौत और फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर हुई गोलीबारी तक, इन सभी बड़ी वारदातों में जिगाना का इस्तेमाल पाया गया है। इन अपराधों को अंजाम देने वाले हथियार की सप्लाई में उत्तर प्रदेश एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट रूट के रूप में उभरा है।

हाई-प्रोफाइल अपराधों की पहली पसंद क्यों जिगाना?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जिगाना पिस्टल का इस्तेमाल सिर्फ अतीक-अशरफ की हत्या या दिशा पाटनी के घर की गोलीबारी तक ही सीमित नहीं रहा है। माफिया मुख्तार अंसारी के दो बेहद करीबी सहयोगियों की हत्या में भी इसी पिस्टल का उपयोग हुआ था। इनमें से एक सहयोगी मेराज को चित्रकूट जेल के अंदर मारा गया था। दूसरे करीबी अजीत सिंह को 6 जनवरी 2021 को लखनऊ के विभूतिखंड में जिगाना पिस्टल की गोलियों से भूना गया था।


तस्करी का ‘यूपी कनेक्शन’: तीन में से दो रूट राज्य से जुड़े

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में जिन तीन प्रमुख रास्तों से जिगाना पिस्तौल की तस्करी होती है, उनमें से दो रास्ते सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए हैं। पहला रास्ता नेपाल बॉर्डर का है, जो यूपी से सटा हुआ है। दूसरा तस्करी का रूट मध्य प्रदेश के खंडवा और इंदौर से होकर गुजरता है। इन दोनों रूटों के कारण उत्तर प्रदेश अवैध हथियारों की सप्लाई में एक बड़ा केंद्र बन गया है। तीसरा मुख्य रूट पंजाब और पाकिस्तान बॉर्डर का है, जहाँ ज्यादातर जिगाना पिस्टल और अन्य विदेशी हथियार ड्रोन के जरिए भेजे जाते हैं।

मूसेवाला हत्याकांड में कैलिफ़ोर्निया से इंदौर तक ‘हवाला’ का भुगतान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले की जाँच में जिगाना पिस्टल की तस्करी का जटिल नेटवर्क सामने आया। लॉरेंस गैंग से जुड़े मनप्रीत सिंह उर्फ सन्नी ने पूछताछ में बताया था कि हत्या को अंजाम देने के लिए गैंग के वीरेंद्र के जरिए कैलिफ़ोर्निया में बैठे दर्शन सिंह से संपर्क साधा गया। दर्शन सिंह ने मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित एक असलहा तस्कर के माध्यम से पिस्तौल का इंतजाम किया। यह हथियार पाकिस्तान से शुरू होकर नेपाल बॉर्डर के रास्ते शूटर्स तक पहुँचा था। इस पिस्तौल की खरीद के लिए भुगतान हवाला के जरिए कैलिफ़ोर्निया से इंदौर किया गया था। मनप्रीत को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने मेरठ में एक अन्य हत्याकांड के बाद पकड़ा था, हालाँकि गिरफ्तारी के वक्त जिगाना पिस्टल बरामद नहीं हो पाई थी।

पाकिस्तान-नेपाल बॉर्डर से सप्लाई

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का असलहा तस्कर शहबाज अंसारी भी लॉरेंस गैंग को बड़े पैमाने पर हथियारों की सप्लाई में शामिल था, जिसमें मूसेवाला की हत्या में इस्तेमाल हुए असलहे भी थे। शहबाज से पूछताछ में पता चला था कि वह पाकिस्तान के रास्ते नेपाल बॉर्डर से विदेशी असलहे मंगवाता था। इसी तरह, पंजाब पुलिस ने वर्ष 2021 में विदेश से लाई गईं कुल 48 पिस्तौलें बरामद की थीं, जिनमें से 19 जिगाना पिस्टल थीं। ये पिस्तौलें पाकिस्तान के रास्ते तस्करी और ड्रोन के माध्यम से पंजाब और कश्मीर बॉर्डर तक पहुँची थीं।

लॉरेंस गैंग और यूपी के तस्कर: दो करोड़ से ज्यादा का ‘डील’

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खुर्जा, बुलंदशहर के हथियार तस्करों ने वर्ष 2018 से वर्ष 2022 के बीच लॉरेंस गैंग को दो करोड़ रुपये से अधिक के असलहे उत्तर प्रदेश से बेचे। यह दिखाता है कि यूपी के तस्करों ने किस बड़े पैमाने पर संगठित अपराध समूहों को हथियार सप्लाई किए।

कब-कब हुई बड़ी खरीद

  • 2019: गैंग ने 25 लाख रुपये में पाँच पिस्टल मंगवाईं। इनमें दो जिगाना, दो .30 बोर और एक .45 बोर की थी।
  • 2020: लॉरेंस जब भरतपुर जेल में था, तब कुर्बान के भांजे इमरान से 10 विदेशी पिस्तौलें मंगवाई गईं। इसके लिए लगभग 50 लाख रुपये का भुगतान हवाला के माध्यम से किया गया।
  • 2021: लॉरेंस ने इमरान से आठ लाख रुपये में एक एके-47 राइफल और 100 राउंड खरीदे। इसी एके-47 का उपयोग सिद्धू मूसेवाला की हत्या में हुआ था।
  • 2021: लॉरेंस ने अजमेर जेल में रहते हुए खुर्जा के तस्करों से करीब 40 लाख रुपये में चार .30 बोर और चार .32 बोर की पिस्तौलें और उनके 3000 राउंड खरीदे। इस सौदे की रकम का भुगतान कनाडा में बैठे गोल्डी बरार ने करवाया था।
  • 2022: तिहाड़ जेल में रहने के दौरान भी लॉरेंस ने खुर्जा से 35 लाख रुपये में सात और पिस्टल खरीदी थीं।

जिगाना पिस्तौल को अपराध जगत में इतना पसंद किए जाने के पीछे उसकी कुछ खास विशेषताएं हैं:

जिगाना पिस्टल की खासियत

तुर्की की टिसास कंपनी ने वर्ष 2001 में इस पिस्तौल को बनाना शुरू किया था।

  • यह 9 एमएम की पिस्तौल है, जिसके बाजार में 16 मॉडल उपलब्ध हैं।
  • यह पिस्तौल भारत में प्रतिबंधित है।
  • इससे एक बार में 15 राउंड फायरिंग की जा सकती है।
  • अवैध बाजार में इसकी कीमत चार लाख रुपये से आठ लाख रुपये के बीच होती है।
  • इसमें सुरक्षा के लिए ऑटोमैटिक फायरिंग पिन ब्लॉक जैसी सुविधा भी होती है।

इन तमाम विशेषताओं के चलते जिगाना पिस्टल अब संगठित अपराध और हाई-प्रोफाइल वारदातों को अंजाम देने वाले गिरोहों की एक प्रमुख पसंद बन गई है, और उत्तर प्रदेश लगातार इसकी तस्करी के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।

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