रिपोर्टर: अनुज कुमार
लखनऊ (Lucknow): उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में “क्राइम सीन मैनेजमेंट” कोर्स की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य विवेचना को और अधिक सटीक, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाना है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 100 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। UPSIFS के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी और एडीजी तकनीकी सेवाएं नवीन अरोरा (IPS) ने संयुक्त रूप से कोर्स का उद्घाटन किया।

कोर्स की अवधि और विशेषताएं:
संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने बताया कि यह कोर्स 45 दिनों तक चलेगा और इसे नए कानूनों व वर्तमान पुलिस आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। कोर्स में संस्थान के विषय विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
बीएनएसएस के प्रावधानों पर विशेष जोर:
डॉ. गोस्वामी ने प्रशिक्षणार्थियों को नए कानून बीएनएसएस (BNSS) की धारा 176(3) के संदर्भ में बताया कि सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों की घटनास्थल जांच अब हर स्थिति में फोरेंसिक टीम के सदस्य द्वारा की जाएगी। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर पहुंचने वाले ये प्रशिक्षु विवेचना की पहली कड़ी होंगे और वही नींव तैयार करेंगे जिस पर पूरी जांच प्रक्रिया आधारित रहेगी। उन्होंने निठारी कांड में हुई कमियों का उदाहरण देते हुए घटनास्थल प्रबंधन की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।
गलत सैंपलिंग से बचना जरूरी:
कार्यक्रम में एडीजी तकनीकी सेवाएं नवीन अरोरा ने कहा कि यदि घटनास्थल से सैंपल सही तरीके से उठाए जाएं तो कोई भी निर्दोष व्यक्ति अपराध में नहीं फंसता और न ही उसे सजा होती है। उन्होंने इसे अत्यंत पवित्र कार्य बताते हुए कहा कि सही सैंपलिंग और चेन ऑफ कस्टडी में सतर्कता से अपराधी को लाभ नहीं मिलता। उन्होंने विभिन्न प्रकार के सैंपलों को उठाने की विधियां भी समझाईं और प्रशिक्षणार्थियों को “क्राइम सीन मैनेजमेंट” के पहले बैच के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन का संकल्प लेने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में हुई सम्मान व सहभागिता:
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान एडीजी नवीन अरोरा को UPSIFS के निदेशक, अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा, अपर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र श्रीवास्तव और अतुल यादव की ओर से सैपलिन और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुखों में उप निदेशक अतुल त्रिपाठी, वैज्ञानिक अधिकारी विवेक कुमार, उदय प्रताप सिंह, जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी, आरआई वृजेष सिंह, फेकल्टी डॉ. निताश, डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. स्वनिल, डॉ. पलक अनेजा, डॉ. मनीष राय, गिरिजेश राय और कार्तिकेय शामिल रहे।
अंत में अपर निदेशक/डीआईजी राजीव मल्होत्रा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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