लखनऊ, 1 नवंबर। आज आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा (BJP) सरकार के कार्यकाल में बिगड़ती कानून व्यवस्था, बढ़ते जातीय अत्याचार और अराजक तत्वों की बढ़ती संख्या को लेकर तीखे सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और सरकार इस पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
अपराधियों को संरक्षण दे रही है सरकार:
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक जज पर जूता फेंके जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि यदि इस घटना के आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो 3 नवंबर को प्रदेश के सभी जनपदों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन जिलाधिकारी (District Magistrate) कार्यालयों के बाहर आयोजित होंगे, जहां एससी-एसटी (SC-ST) समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी:
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ रेप और हत्या जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिसके चलते उनका मनोबल बढ़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने का काम कर रही है, जिससे कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
एनसीआरबी रिपोर्ट में चिंताजनक आंकड़े:
एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि अपराधिक गतिविधियों के मामले में प्रदेश देश में नंबर वन पर पहुंच गया है। रेप, हत्या और जातीय घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। यह स्थिति न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। वक्ताओं ने कहा कि यह आंकड़े सरकार की नाकामी को साफ तौर पर दर्शाते हैं।
भाजपा शासित राज्यों में भी बढ़ रही घटनाएं:
वक्ताओं ने कहा कि सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि गुजरात (Gujarat), मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) और राजस्थान (Rajasthan) जैसे भाजपा शासित राज्यों में भी इसी तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारों के नाक के नीचे अपराधियों का हौसला बुलंद है और प्रशासन मौन है।
दलित और पिछड़े वर्गों के प्रति उपेक्षा:
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया गया कि देश के दलित और पिछड़े वर्गों की आवाज को दबाया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि सत्ताधारी नेताओं को यह वर्ग कीड़े-मकोड़े की तरह नजर आता है, इसलिए इन समुदायों पर हो रहे अत्याचारों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यह रवैया जारी रहा तो समाज में असंतोष और अशांति बढ़ेगी।
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