सूर्या ने जीत भारतीय सेना को समर्पित: दुबई स्टेडियम में गूंजे ‘भारत माता की जय’



एशिया कप में पाकिस्तान को हराने के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपनी ऐतिहासिक जीत भारतीय सेना को समर्पित की। मैदान पर जैसे ही सूर्या ने विजयी छक्का लगाया, दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। यह जीत केवल क्रिकेट मैदान तक सीमित नहीं रही, बल्कि देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत संदेश बन गई। सूर्या और पूरी भारतीय टीम ने साफ कर दिया कि यह उपलब्धि हमारे जवानों के नाम है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान तक न्यौछावर कर दी।


पहलगाम हमले के बाद पहली भिड़ंत

यह मुकाबला ऐसे समय में हुआ, जब पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान आमने-सामने आए। हालात बेहद संवेदनशील थे और इसी वजह से इस मैच का महत्व सामान्य क्रिकेट मैच से कहीं ज्यादा बढ़ गया। भारतीय खिलाड़ियों ने जीत के बाद जिस तरह से इसे सेना को समर्पित किया, उसने करोड़ों भारतीयों के दिलों को छू लिया।


पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से किया इनकार

इस मैच की एक और बड़ी चर्चा रही भारतीय खिलाड़ियों का रवैया। परंपरा के मुताबिक टॉस के समय और मैच खत्म होने पर दोनों टीमों के खिलाड़ी हाथ मिलाते हैं, लेकिन इस बार भारतीय टीम ने ऐसा नहीं किया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस के दौरान पाक कप्तान सलमान अली आगा से हाथ नहीं मिलाया और मैच खत्म होने के बाद भी यही रुख अपनाया गया। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट की पारंपरिक कर्टसी से अलग था, लेकिन भारतीय टीम ने इस व्यवहार से अपना स्पष्ट संदेश दिया।


भारतीय टीम का सख्त संदेश

टीम इंडिया ने अपने रुख से यह जाहिर कर दिया कि एशिया कप में खेलना उनके लिए टूर्नामेंट का कमिटमेंट है, लेकिन पाकिस्तानी खिलाड़ियों से दोस्ताना व्यवहार निभाने का कोई इरादा नहीं है। खेल भावना के साथ मैदान पर उतरी भारतीय टीम ने यह भी दिखा दिया कि पाकिस्तान के खिलाफ उनके पास न तो कोई अतिरिक्त कर्टसी है और न ही कोई नरमी।


एकतरफा जीत से पाकिस्तान पस्त

मैदान पर भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना वर्चस्व साबित किया। भारत ने पाकिस्तान को पूरी तरह एकतरफा अंदाज में हराया। सूर्या के छक्के ने मैच का अंत शानदार अंदाज में किया और स्टेडियम में मौजूद भारतीय समर्थक देशभक्ति के नारों से झूम उठे। इस जीत ने न केवल क्रिकेट प्रेमियों को उत्साहित किया बल्कि यह एक राष्ट्रीय गर्व का क्षण बन गया।


निष्कर्ष

सूर्या की कप्तानी और भारतीय टीम के प्रदर्शन ने इस मैच को ऐतिहासिक बना दिया। जीत को सेना को समर्पित करने और पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ न मिलाने के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय टीम केवल खेल ही नहीं, बल्कि देश की भावनाओं का भी प्रतिनिधित्व कर रही है। यह मुकाबला क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसी मिसाल के तौर पर दर्ज हो गया है, जिसमें खेल और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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