Ghazipur News: मुठभेड़ में कांस्टेबल की हत्या, दोषियों को आजीवन कारावास

गाजीपुर। यूं तो पुलिस को लेकर कई तरह के सवाल किए जाते हैं लेकिन पुलिस अपनी जिम्मेदारियां को निभाने के लिए, जनता की सेवा करने के लिए, समाज से अपराधियों को खत्म करने के लिए कितना जोखिम उठाती है इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। अपने परिवार से दूर रहकर एक पुलिसकर्मी समाज की सेवा के लिए समर्पित हो जाता है समाज में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संकल्पित हो जाता है। समाज से अपराध खत्म करने के लिए वह अपने जान की परवाह भी नहीं करता और खतरनाक अपराधियों से सीधे भीड़ भी जाता है। एक ऐसे ही पुलिसकर्मी थे रामशरण सिंह जिन्होंने अपराधियों से मुठभेड़ में अपनी जान की परवाह नहीं की, उनकी और उनके टीम की बहादुरी की वजह से मुठभेड़ में मुख्य अपराधी मर गया और कई गिरफ्तार हुए लेकिन इस मुठभेड़ में रामशरण सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए। यह घटना 9 अप्रैल 2008 की है लेकिन अब इस घटना में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

खबर के अनुसार अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने कांस्टेबल रामशरण सिंह की हत्या के मामले में मंगलवार को दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 35 हजार रुपये जुर्माना लगाया।

Ghazipur Court sentences convict to life imprisonment in case of murder of a police constable…

क्या था मामला?

खबर के अनुसार अभियोजन के अनुसार जौनपुर एसओजी प्रभारी उपनिरीक्षक सुशील कुमार ने जमानिया कोतवाली में तहरीर दी थी। बताया था कि 9 अप्रैल 2008 को वह कांस्टेबल शमीम अहमद, नुरुल हुदा, रामशरण सिंह, राजेश सिंह, धर्मेंद्र सिंह और सरायख्वाजा के एसओ श्यामसुंदर पांडेय और पुलिस टीम के साथ जनपद जौनपुर के इनामी बदमाश अखिलेश यादव की तलाशी में जुटे थे। आरोपी अखिलेश यादव 8 अप्रैल 2008 को थाना केराकत क्षेत्र के अहन गांव के पास अपने साथियों के साथ 1 लाख 37 हजार की लूट की घटना करके फरार था। गिरफ्तारी व पैसा बरामदगी के लिए टीम भ्रमण कर रही थी। मुखबिर ने सूचना दी कि अभियुक्त अखिलेश यादव अपने साथियों के साथ टाटा इंडिका में है और वाराणसी की ओर से आ रहा है। उसे मोढला या गोमती बैरियर के आस पास पकड़ा जा सकता है।

कैसे हुई थी मुठभेड़?

खबर के अनुसार सूचना पर टीम मोढैला के तरफ बढ़ी। साथ ही फोन करके मुफ्तीगंज चौकी प्रभारी एसआई अतुल्य कुमार पांडेय और बजरंग नगर चौकी प्रभारी एसआई गोविंद और अन्य कांस्टेबल को थाना चंदवक से बुलाकर साथ में ले लिया। इसके बाद मोढैला के पास घेराबंदी की। इसी दौरान वाराणसी की ओर से आ रही इंडिका को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन वाहन नहीं रूका और वाराणसी की ओर गाड़ी अपराधी मोड़ कर भागने लगे। पीछा करते हुए चंदौली जनपद के बलुआ, चहनिया, महूजी होते हुए जमानिया चक्का बांध नहर तिराहा नीचे उतारकर खड़ी कर दी। इसके बाद पुलिस कर्मियों को जान से मारने के लिए अपराधी वाहन में से ही गोलियां चलाने लगे। इस दौरान मुठभेड़ में पुलिस ने अपराधी अखिलेश यादव को मार गिराया। बदमाशों की गोली से कांस्टेबल रामशरण सिंह की मौत हो गई। पुलिस ने बृजेश, संजय और चालक सावले सरोज को गिरफ्तार कर लिया और हथियार और पैसा बरामद किया।

करीब 16 साल बाद आया फैसला

खबर के अनुसार आरोपी बृजेश कुमार सिंह और चालक सावले सरोज के विरूद्ध पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने आठ गवाह पेश किए। अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने सावले सरोज को हत्या एवं हत्या प्रयास के मामले में दोषी पाते हुए सजा सुनाई है। बृजेश कुमार सिंह को संदेह का लाभ दोष मुक्त कर दिया।

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