यूपी विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अवैध कफ सिरप तस्करी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जांच में जिन लोगों को पकड़ा गया है, उनके संबंध समाजवादी पार्टी से सामने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच जारी है और पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा, लेकिन अब तक के तथ्य गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत कफ सिरप का दायरा:
मुख्यमंत्री ने बताया कि कफ सिरप में प्रयुक्त औषधि एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत आती है। इसका उपयोग गंभीर खांसी के उपचार के लिए किया जाता है, लेकिन इसका निर्माण और आवंटन केवल निर्धारित औषधीय उपयोग के लिए ही किया जाता है। इस दवा का कोटा और वितरण केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो (Central Narcotics Bureau) द्वारा तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब कई स्थानों से इसके नशीले पदार्थ के रूप में दुरुपयोग और अवैध तस्करी की शिकायतें सामने आईं, तब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर सख्त कार्रवाई शुरू की।
एफएसडीए, एसआईटी और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई:
मुख्यमंत्री के अनुसार उत्तर प्रदेश के एफएसडीए विभाग के नेतृत्व में इस पूरे मामले को एनडीपीएस कानून के दायरे में लाया गया। इस संबंध में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के पूर्व निर्णयों को भी आधार बनाया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT), यूपी पुलिस और एसटीएफ (STF) के माध्यम से व्यापक स्तर पर कार्रवाई प्रारंभ की। अब तक अवैध तस्करी के कई बड़े प्रकरण सामने आए हैं और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं।
विधानसभा और विधान परिषद में मुद्दा उठने के संकेत:
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा के एक सदस्य के आकस्मिक निधन के कारण पहले दिन सदन में शोक प्रस्ताव रहेगा, जिससे संभव है कि इस विषय पर वहां विस्तृत चर्चा न हो। हालांकि विधान परिषद में नेता सदन द्वारा यह मुद्दा उठाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सदन के भीतर या बाहर इस विषय पर सवाल उठते हैं तो सरकार की ओर से तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाएगा।
प्रारंभिक जांच में सामने आए सियासी संबंध:
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि गिरफ्तार किए गए कुछ अभियुक्तों के संबंध समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय एसआईटी इस पूरे मामले की निगरानी कर रही है और यूपी पुलिस तथा एसटीएफ से जुड़े अधिकारी इसमें सक्रिय रूप से शामिल हैं। अवैध तस्करी के साथ-साथ इससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
मीडिया रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का दावा:
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लखनऊ में अवैध कफ सिरप सिंडिकेट को लेकर जांच एजेंसियों ने कई बड़े खुलासे किए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) और अन्य एजेंसियों की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इस नेटवर्क का दायरा देश की सीमाओं से बाहर तक फैला हुआ था। कफ सिरप की सप्लाई विदेशों में भी की जा रही थी, जिससे इस मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
पूछताछ में उजागर हुए अहम नाम:
जांच के दौरान आलोक सिंह और अमित सिंह उर्फ टाटा से पूछताछ की गई। इसके अलावा विभोर राणा और विकास से हुई पूछताछ में भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। एजेंसियों के अनुसार सिंडिकेट के मास्टरमाइंड शुभम और विकास नार्वे को पूरे नेटवर्क की जानकारी थी और उनके निर्देशों पर अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था।
गिरफ्तारियों का विस्तृत विवरण:
एक रिपोर्ट के अनुसार कोडीन सिरप के अवैध व्यापार से जुड़े इस मामले में अब तक 32 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच अभी जारी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद को कोलकाता हवाई अड्डे से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह थाईलैंड भागने की कोशिश कर रहे थे।
अन्य प्रमुख आरोपी और फर्जी फर्मों का जाल:
गिरफ्तार किए गए अन्य प्रमुख व्यक्तियों में पूर्व बर्खास्त पुलिस कांस्टेबल आलोक प्रताप सिंह, अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा, सहारनपुर के दो सगे भाई विभोर राणा और विशाल सिंह, अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा शामिल हैं। इसके अलावा गाजीपुर में एक मेडिकल एजेंसी के संचालक सर्वांश वर्मा की भी गिरफ्तारी हुई है। जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध कारोबार को छिपाने के लिए 65 से अधिक फर्जी फर्मों का नेटवर्क बनाया गया था।
देशभर और पड़ोसी देशों तक फैला रैकेट:
जांच एजेंसियों के अनुसार यह रैकेट उत्तर प्रदेश के अलावा हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, असम और त्रिपुरा तक फैला हुआ था। इसके साथ ही इसके लिंक पड़ोसी देशों बांग्लादेश और नेपाल से भी जुड़े पाए गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में धन शोधन के पहलुओं की जांच कर रहा है और हाल ही में तीन राज्यों में 25 स्थानों पर छापेमारी की गई है।
जब्ती और दर्ज मुकदमों का आंकड़ा:
पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में 128 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। कार्रवाई के दौरान लगभग 3.5 लाख कफ सिरप की बोतलें जब्त की गई हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 4.5 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे सामने आ रही हैं और आने वाले समय में और तथ्य उजागर हो सकते हैं।
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