गाजीपुर। एक शिक्षक छात्र का भविष्य निर्माता है। एक शिक्षक छात्र रूपी पौधे को ज्ञान से सींच कर वृक्ष बनाता है। लेकिन यदि उस शिक्षक का ही शोषण होने लगे तो क्या? यदि वो शिक्षक खुद ही अपने धर्म यानी शिक्षा देने के कार्य से बेईमानी करे तो क्या? यदि कोई शिक्षक ऐसा कार्य करता है या उससे ऐसा कार्य करवाया जाता है तो इसे हमारे समाज को ज्ञान से वंचित कर खोखला बनाने की साजिश मात्र मान लेना काफी नहीं होगा अपितु इसे गंभीर अपराध की संज्ञा देना ही उचित होगा ताकि न्याय हो सके।
कुछ ऐसा ही गंभीर आरोप जनपद गाज़ीपुर ने बाराचवंर क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी पर है। मंगलवार को अपना भारत टाइम्स यानी ABT News को ईमेल के माध्यम से एक पत्र भेजा जाता है, उस पत्र खंड शिक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यहां तक यही भी लिखा गया है कि खंड शिक्षा अधिकारी के भ्रष्टाचार की शिकायत पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी से भी किया गया है लेकिन अभी तक न्याय नहीं हुआ। पूरी रिपोर्ट इस वीडियो में देखें:
अब सवाल उठता है कि पत्र में कौन से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। तो सुनिए, पत्र में लिखा है खंड शिक्षा अधिकारी पूरे ब्लॉक में धन की उगाही का उद्योग लगाए हुए हैं। आरोप है कि किसी भी अध्यापक को विद्यालय ना आने की सुविधा देने की एवज में 10 से ₹15000 महीना लेते हैं। आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी प्रधानाध्यापक से कहते हैं कि ड्रेस में जो पैसा कमा रहे हो हमें दो और प्रधानाध्यापक से प्रति छात्र ₹100 की दर से लेते हैं। पत्र में आगे आरोप लगाया गया है कि खंड शिक्षा अधिकारी वेस्टीज कंपनी का प्रचार भी करते हैं और अध्यापकों पर दबाव बनाते हैं कि वेस्टीज ज्वाइन करो नहीं तो तुम्हारे ऊपर कार्यवाही होगी।
इस पत्र के मिलने के बाद हमने थोड़ा जांच पड़ताल किया। जांच पड़ताल में हमें पता चला कि जनसंदेश टाइम्स में इन्हीं खंड शिक्षा अधिकारी को लेकर एक खबर प्रकाशित हुआ था। खबर में खंड शिक्षा अधिकारी को चर्चित अधिकारी बताया गया था और यह भी लिखा था कि यह पहले मोहम्मदाबाद के खंड शिक्षा अधिकारी थे। अभी चर्चित खंड शिक्षा अधिकारी कैसे बने? जनसंदेश टाइम्स के अनुसार प्राइवेट कंपनी वेस्टीज को अध्यापकों के माध्यम से घर-घर पहुंचाने के लिए प्रचार प्रसार कर रहे थे इसके अलावा अध्यापकों के संकुल मीटिंग में भी बीमा एजेंट के साथ मीटिंग करने का फोटो वीडियो वायरल हुआ था। वहीं कुछ समय पूर्व दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पूर्व में भोजन की गुणवत्ता को लेकर धरना प्रदर्शन तक किया गया था जिसमें प्रशिक्षण के लिए ₹30 नाश्ता और ₹120 भोजन के लिए शासन से पैसा मिला था लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा पैसे बचाने के लिए गुणवत्ता विहीन भोजन अध्यापकों को खिलाया जा रहा था। जनसंदेश टाइम्स में प्रकाशित इस खबर ने हमें प्राप्त पत्र को बल दे दिया।
हमने और पता करने की कोशिश की तो हमें पता चला कि 15 जुलाई 2021 को एक शासनादेश के अनुसार इनका स्थानांतरण आजमगढ़ कर दिया गया है लेकिन यह अभी तक बाराचवर में बने हुए हैं। वही 6 अगस्त 2021 को अपर शिक्षा निदेशक द्वारा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को एक पत्र भेजा गया है उस पत्र में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से पूछा गया है कि अभी तक स्थानांतरण क्यों नहीं हुआ और उसकी सूचना अभी तक अप्राप्त है।
अब इस पूरे मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी से बात करना भी जरूरी था तो हमने बेसिक शिक्षा अधिकारी को फोन मिलाया और उनसे इस मामले में जानकारी मांगी। शिक्षा अधिकारी ने बताया कि बाराचवर के खंड शिक्षा अधिकारी दिव्यांग कोटे से हैं इसलिए उनका स्थानांतरण नहीं हो सकता। जब हमने शिकायत के बारे में पूछा कि क्या आपको इनकी कोई शिकायत कहीं से प्राप्त हुई है तो उनका कहना था कि हमें किसी भी प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
अब इस पत्र के माध्यम से खंड शिक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाया गया था तो खंड शिक्षा अधिकारी का भी पक्ष जानना जरूरी है तो हमने खंड शिक्षा अधिकारी को फोन मिलाया हमने खंड शिक्षा अधिकारी से पूछा की आपके ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए हैं इस मामले में आपका क्या कहना है तो खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि मैं वेस्टीज कंपनी का प्रचार प्रसार नहीं करता हूं हां मैंने वेस्टीज और एमवे के प्रोडक्ट जरूर यूज़ करता हूं। स्थानांतरण के सवाल पर उनका कहना था कि उन्होंने प्रत्यावेदन किया हुआ है आरोपों के सवाल पर उनका कहना था कि यह तो अभी नया-नया ब्लॉक है यदि मोहम्मदाबाद से कोई आरोप लगाता तो मैं एक बार सोचता भी कि मैं वहां 3 साल रहा हूं कोई मेरी बात समझे ना समझे।
हमें प्राप्त पत्र में ये भी लिखा था कि 15 दिन पूर्व इसकी शिकायत गाजीपुर के जिलाधिकारी से भी की गई है उनको भी पत्र भेजा गया है तो हमने उक्त पत्र को जिलाधिकारी को ट्वीट किया और उनके व्हाट्सएप पर भी भेजा।
जनसंदेश टाइम्स में छपी खबर और इस पत्र से संदेह तो खड़ा होता है अब देखते हैं कि इस पर जिलाधिकारी इस मामले में आगे क्या करते हैं।


