Varanasi में रविवार को कांग्रेस की संविधान संवाद रैली आयोजित की गई। इस रैली में देश के अलग-अलग हिस्सों से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, सांसद और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। रैली का केंद्र बिंदु केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर हमला रहा। मंच से दिए गए भाषणों में काशी, मां गंगा, विकास कार्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणियां की गईं। रैली के दौरान माहौल पूरी तरह राजनीतिक रहा और कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
देशभर से नेताओं की मौजूदगी:
रैली में कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरों ने शिरकत की। मंच पर राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा (Pawan Khera), सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinate), सांसद इमरान मसूद (Imran Masood), सांसद किशोरी लाल (Kishori Lal), उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय (Ajay Rai) सहित पार्टी के 20 से अधिक वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने मंच पर एक-दूसरे का हाथ थामकर एकजुटता का संदेश दिया और संगठन की मजबूती को रेखांकित किया।
पवन खेड़ा का काशी और गंगा पर बयान:
राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से प्रधानमंत्री पर जो संकट के बादल छाए हुए हैं, उनकी जड़ें काशी में हैं। उन्होंने मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) और मां गंगा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही काशी है, जहां मां गंगा के आंचल में लाशें बहती दिखीं। उनके अनुसार मां गंगा के आंसू बह रहे थे, लेकिन यह दृश्य प्रधानमंत्री को नजर नहीं आया। उन्होंने कहा कि जिसने काशी को धोखा दिया, वह आम जनता के हितों को कैसे समझेगा। मां गंगा के नाम पर राजनीति करने वालों पर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए और इसे काशी की जनता के साथ विश्वासघात बताया।
सुप्रिया श्रीनेत का सभ्यता और विरासत पर जोर:
सुप्रिया श्रीनेत ने अपने भाषण में काशी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री यहां मूर्तियां तुड़वाते हैं, तो खून खौल उठता है। उनके अनुसार काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने 2024 के चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए कहा कि जब नतीजे सामने आ रहे थे और हर राउंड में नरेंद्र मोदी पीछे जा रहे थे, तब उन्हें सुखद अनुभूति हुई। इसके लिए उन्होंने काशी की जनता का आभार व्यक्त किया और कहा कि जनता ने लोकतंत्र में अपनी ताकत दिखाई।
इमरान मसूद का सुरक्षा और जिम्मेदारी का सवाल:
सांसद इमरान मसूद ने संसद की सुरक्षा को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रधानमंत्री की जान को संसद के भीतर खतरा हो जाए, उसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सबसे पहले इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री अपने ही कार्यक्षेत्र में सुरक्षित नहीं हैं, तो देश की सुरक्षा का भरोसा कैसे दिलाया जा सकता है। उनके इस बयान के बाद रैली स्थल पर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई।
कार्यकर्ताओं का जोश और नारेबाजी:
रैली के दौरान कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मंच से नेताओं के भाषण के बीच कार्यकर्ता लगातार राहुल गांधी (Rahul Gandhi), मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge), प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi), सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और कांग्रेस पार्टी के समर्थन में नारे लगाते रहे। नारों से पूरा माहौल गूंजता रहा और कांग्रेस की एकजुटता का प्रदर्शन हुआ।
डॉक्यूमेंट्री फिल्म और विकास पर सवाल:
रैली के दौरान लगभग 15 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। इस फिल्म में बनारस (Varanasi) के विकास कार्यों पर सवाल उठाए गए। विकास के नाम पर सनातन विरासत और परंपराओं से खिलवाड़ किए जाने का आरोप लगाया गया। फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई कि किस तरह विकास परियोजनाओं के चलते सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचा है। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने फिल्म को गंभीर बताते हुए इस पर चर्चा की।
काशी के मुद्दों पर शास्त्री घाट तक रैली:
डॉक्यूमेंट्री के साथ-साथ काशी से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर शहर में शास्त्री घाट (Shastri Ghat) पर भी रैली निकाली गई। इस दौरान प्रयागराज (Prayagraj) में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwaranand) के कथित अपमान का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए।
संविधान संवाद के जरिए राजनीतिक संदेश:
कांग्रेस की इस रैली को संविधान संवाद का नाम दिया गया। मंच से वक्ताओं ने लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की बात करते हुए मौजूदा सरकार पर आरोप लगाए। नेताओं का कहना था कि संविधान की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है और कांग्रेस इसे बचाने के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी।
एकजुटता और आगामी रणनीति का संकेत:
पूरी रैली के दौरान कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी एकजुट है और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार है। नेताओं के साझा मंच, नारेबाजी और मुद्दों की प्रस्तुति से यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि काशी से एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया गया है।
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