रिपोर्टर: हसीन अंसारी
गाजीपुर में सामने आए कोडीन सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। इस केस में आरोपी स्वास्तिक मेडिकल एजेंसी के संचालक सर्वांश वर्मा की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। मामला न सिर्फ अवैध दवा कारोबार से जुड़ा है, बल्कि इसमें सरकारी विभागों की भूमिका और उनकी निष्क्रियता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई से जुड़े अहम निर्देश दिए हैं।
जमानत याचिका पर अदालत का फैसला:
गाजीपुर स्थित एडीजे प्रथम शक्ति सिंह की अदालत में कोडीन सिरप मामले के आरोपी सर्वांश वर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देना उचित नहीं है। इसके साथ ही जमानत प्रार्थनापत्र को खारिज कर दिया गया।
गाजीपुर जेल में बंद है आरोपी:
सैदपुर क्षेत्र की स्वास्तिक मेडिकल एजेंसी का संचालक सर्वांश वर्मा कोडीन सिरप मामले में आरोपी है। पुलिस ने 14 दिसंबर को उसे गिरफ्तार कर गाजीपुर जिला जेल भेज दिया था। गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में बंद है। आरोपी की ओर से अदालत में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
मुख्य आरोपी के पिता की पेशी:
इस मामले में मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल को भी अदालत में पेश किया गया। भोला जायसवाल वर्तमान में सोनभद्र जेल में बंद है। उसे रिमांड के लिए अदालत में लाया गया था। अदालत में उसकी पेशी के दौरान भी पूरे प्रकरण को गंभीरता से सुना गया और केस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।
कोडीन सिरप गोरखधंधे पर सख्ती:
गाजीपुर में कोडीन सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े इस केस को अदालत ने बेहद गंभीर माना है। सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि इस तरह के मामलों का समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और युवाओं को नशे की ओर धकेलने में ऐसी गतिविधियों की बड़ी भूमिका होती है। इसी वजह से अदालत ने मामले में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के संकेत दिए।
एफएसडीए और राज्य कर विभाग पर टिप्पणी:
सुनवाई के दौरान अदालत ने एफएसडीए और राज्य कर विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कुछ अफसर और कर्मचारी निष्क्रिय दिखाई दिए हैं। अदालत का मानना है कि यदि समय रहते संबंधित विभाग सक्रिय भूमिका निभाते, तो इस तरह के अवैध कारोबार पर पहले ही रोक लगाई जा सकती थी।
वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी आदेश की प्रति:
अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति अपर मुख्य सचिव राज्य कर एवं प्रमुख सचिव को भेजी जाए। इसका उद्देश्य यह है कि संबंधित विभाग इस प्रकरण की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय किया जाना जरूरी है।
न्यायिक सख्ती का संकेत:
कोडीन सिरप मामले में अदालत के इस फैसले को न्यायिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। जमानत याचिका खारिज होने से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत इस तरह के मामलों में कठोर रुख अपनाने के मूड में है। साथ ही सरकारी विभागों की भूमिका पर उठे सवालों ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।
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