गाजीपुर के दर्जनों गांव में फैली रहस्यमयी बीमारी, 40 से 50 बच्चे हुए मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग!

रिपोर्टर: हसीन अंसारी

गाजीपुर जिले के कई गांवों में बच्चों के मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के मामले सामने आने से इलाके में चिंता का माहौल है। जिले के मनिहारी, सदर और देवकली ब्लॉक के 15 से 20 गांवों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां दर्जनों बच्चे किसी न किसी प्रकार की दिव्यांगता से जूझ रहे हैं। इन मामलों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए जांच और इलाज के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी प्रभावित बच्चों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

किन क्षेत्रों में सामने आए मामले:
प्राप्त जानकारी के अनुसार मनिहारी, सदर और देवकली ब्लॉक के कई गांवों में यह समस्या देखी गई है। फतेहुल्लापुर, हरिहरपुर, पठानपुर, हाला, शिकारपुर, धरी कला, अगस्ता, भोरहा, भिक्केपुर, तार डीह, गोला और रठूली जैसे गांवों में प्रत्येक गांव में लगभग 8 से 10 बच्चे इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब जाकर मामले प्रशासन के संज्ञान में आए हैं।

बुखार के बाद बदल जाती है स्थिति:
परिजनों का कहना है कि अधिकांश बच्चे जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ होते हैं। जन्म के चार से छह महीने बाद अचानक तेज बुखार की शिकायत होती है। बुखार ठीक होने के बाद बच्चों में मानसिक और शारीरिक बदलाव देखने को मिलते हैं। कई बच्चे चलने, बोलने और समझने में असमर्थ हो जाते हैं। परिजन इसे किसी सामान्य बीमारी का परिणाम मानते रहे, लेकिन समय के साथ जब ऐसे मामले बढ़ते गए तो चिंता और गहराती चली गई।

परिजनों के सामने बड़ी चुनौती:
इन बच्चों का इलाज परिजनों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। आर्थिक तंगी के कारण कई परिवार समुचित इलाज नहीं करा पा रहे हैं। कुछ मामलों में बच्चों की मानसिक स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में कई परिजन ऐसे बच्चों को रस्सी या जंजीर से बांधकर रखने को विवश हैं, ताकि वे खुद को या दूसरों को नुकसान न पहुंचा सकें। यह स्थिति गांवों में सामाजिक और मानवीय चिंता का विषय बनी हुई है।

प्रशासन की सक्रियता:
मामले सामने आने के बाद जिलाधिकारी (District Magistrate) ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और दिव्यांग कल्याण अधिकारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। निर्देशों में सभी मामलों की जांच कराने, प्रभावित बच्चों की सूची तैयार करने और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा व सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की बात कही गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राज्यपाल तक पहुंचा मामला:
बच्चों की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिले के सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धार्थ राय ने इस समस्या को राज्यपाल (Governor) आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) तक पहुंचाया। राज्यपाल ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके विशेष कार्य अधिकारी एवं अपर मुख्य सचिव स्तर के डॉ. सुधीर एम. बोबडे (Dr. Sudhir M. Bobde) ने गाजीपुर के जिलाधिकारी (District Magistrate) को पत्र लिखकर आवश्यक कदम उठाने और की गई कार्रवाई से सचिवालय को अवगत कराने के निर्देश दिए।

जांच में क्या आ रही है आशंका:
जिला प्रशासन की ओर से कराई जा रही प्रारंभिक जांच में स्वास्थ्य अधिकारियों को आशंका है कि प्रेग्नेंसी के दौरान जटिलताएं और कुछ प्रकार के वायरल बुखार इसके पीछे कारण हो सकते हैं। हालांकि अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही सही कारण स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल प्राथमिकता प्रभावित बच्चों को इलाज और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।

इलाज और सुविधाओं पर जोर:
जिलाधिकारी (District Magistrate) ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित बच्चों को तत्काल इलाज, दवाएं और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र, सरकारी योजनाओं का लाभ और पुनर्वास से जुड़ी सुविधाएं भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रशासन का दावा है कि इस मामले में हर संभव मदद की जाएगी, ताकि बच्चों और उनके परिवारों को राहत मिल सके।

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