अलीगढ़ में चौंकाने वाला फैसला! छह साल के बच्चे पर इतने लाख का मुचलका…

अलीगढ़ (Aligarh) में पुलिस और न्यायिक प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ खड़े हो गए हैं। मामला थाना क्वार्सी क्षेत्र का है, जहां एक छह वर्षीय बच्चे पर एक लाख रुपये के मुचलके का आदेश जारी किया गया है। इस आदेश ने न केवल परिजनों को हिला दिया, बल्कि क्षेत्र के लोगों में भी हैरानी और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

मामला थाना क्वार्सी क्षेत्र का:
जानकारी के अनुसार, राजीव नगर निवासी हितेश चौहान के छह वर्षीय पुत्र प्रियांशू को न्यायालय द्वारा ₹1 लाख के मुचलके पर पाबंद करने का आदेश दिया गया है। यह मामला एक मामूली विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है, जो मकान के दरवाजे को खोलने को लेकर दो पक्षों के बीच हुआ था। विवाद की सूचना पर थाना क्वार्सी पुलिस मौके पर पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कर ली।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल:
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह विवाद इतना गंभीर नहीं था कि इसमें एक छोटे बच्चे को आरोपी बनाया जाए। बावजूद इसके, पुलिस ने नाबालिग प्रियांशू का नाम भी रिपोर्ट में दर्ज कर लिया और मामला धारा 126/135 बीएनएसएस (BNSS) के तहत अपर नगर मजिस्ट्रेट (द्वितीय) न्यायालय में भेज दिया। इस कार्रवाई ने पुलिस की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

न्यायालय का आदेश और परिजनों की प्रतिक्रिया:
न्यायालय द्वारा छह वर्षीय नाबालिग के खिलाफ ₹1 लाख के मुचलके का आदेश जारी किए जाने के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश है। प्रियांशू के पिता हितेश चौहान का कहना है कि यह आदेश न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण भी है। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र के बच्चे पर इस तरह की कानूनी कार्रवाई करना कानून की भावना के विपरीत है।

स्थानीय लोगों में रोष और न्यायिक पुनर्विचार की मांग:
घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता और जांच की आवश्यकता को दर्शाता है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

मामले ने उठाए कानून की समझदारी पर सवाल:
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल पुलिस प्रशासन बल्कि न्यायिक विवेक पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि छह वर्ष की आयु में कोई भी बच्चा कानूनी रूप से अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे में अदालत द्वारा इस तरह का आदेश जारी किया जाना गंभीर चिंता का विषय है।

निष्कर्ष:
अलीगढ़ में छह वर्षीय मासूम पर मुचलका लगाए जाने का मामला यह दर्शाता है कि कभी-कभी प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर संवेदनशीलता की कमी गंभीर सवाल खड़े कर देती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या नाबालिग के परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवाददाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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