रिपोर्टर: अनुज कुमार
बुर्का विवाद के बाद बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार राजनीतिक विवादों में घिरे हुए हैं। विपक्षी दल जहां इस मुद्दे को लेकर उन पर हमलावर हैं, वहीं सहयोगी दलों के नेता उनके पक्ष में सफाई देते नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद का बयान सामने आया, जिसने विवाद को और गहरा कर दिया। उनके बयान को लेकर अब उन्हें भी सवालों के घेरे में खड़ा किया जा रहा है और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
पटना की घटना पर बढ़ता विवाद:
मुस्लिम समुदाय से जुड़ी एक महिला डॉक्टर के साथ पटना (Patna) में हुए व्यवहार को लेकर नीतीश कुमार की आलोचना लगातार की जा रही है। आरोप है कि मुख्यमंत्री ने महिला डॉक्टर के चेहरे से बुर्का अपने हाथों से नीचे खींच दिया था। इस घटना को लेकर इसे सम्मान और मर्यादा से जोड़कर देखा जा रहा है। कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस घटना को गंभीर बताते हुए सवाल उठाए हैं कि सार्वजनिक जीवन में इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।
संजय निषाद का विवादित बयान:
इसी मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने बयान देते हुए मामले को हल्के अंदाज में लेने की कोशिश की। उन्होंने कहा था कि केवल बुर्का खींचे जाने पर इतना हल्ला हो रहा है और यदि इससे आगे कुछ हो जाता तो क्या होता। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। बयान को महिला सम्मान से जोड़कर देखा गया और इसे आपत्तिजनक बताया गया।
आलोचनाओं के बाद सफाई:
भारी आलोचना और विवाद बढ़ने के बाद संजय निषाद ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था और उन्होंने यह बात केवल विवाद को टालने के लिए कही थी। उन्होंने अपने बयान को ग्रामीण और पूर्वांचल (Purvanchal) की बोलचाल का उदाहरण बताते हुए कहा कि वहां अक्सर किसी बात को हल्के में लेने के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग किया जाता है। उनका कहना था कि उन्होंने सहज भाव और हंसते हुए ऐसा कहा था, न कि किसी को ठेस पहुंचाने के लिए।
बयान वापस लेने की बात:
संजय निषाद ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनके बयान से किसी को बुरा लगा है तो वे अपनी बात वापस लेने को तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा कि उनके काम को जनता भली-भांति जानती है और उसी आधार पर उन्हें समर्थन मिलता रहा है।
कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया:
कांग्रेस (Congress) की नेता सुप्रिया श्रीनेत ने संजय निषाद के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की बात को हंसते हुए कहना बेशर्मी को दर्शाता है। उनके अनुसार जिस अंदाज और हंसी के साथ यह बयान दिया गया, वह महिला विरोधी सोच को उजागर करता है। कांग्रेस नेता ने इसे समाज में गलत संदेश देने वाला बताया और कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को अपनी भाषा और व्यवहार को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी का हमला:
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की ओर से भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया आई। पार्टी नेताओं का कहना था कि इस तरह की मानसिकता रखने वाले लोगों से प्रदेश की हर मां, बहन और बेटी को बचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग किसी भी धर्म की महिला का सम्मान नहीं कर सकते और यह सोच समाज के लिए खतरनाक है।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज:
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। एक ओर जहां सत्ताधारी दल अपने नेताओं के बयानों को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे महिला सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर उठा रहा है। मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में भाषा, आचरण और जिम्मेदारी पर व्यापक बहस का विषय बन चुका है।
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