ह्रदय विदारक घटना पर, 4 लाख, सड़क और पुल का मरहम. तहसीलदार ने दिखाई दरियादिली…

…………………..
#hadsa #ghazipur #CMYogi #Flood

अभिनेन्द्र की कलम से……..

Special Report || ये अमृत युग है और आज़ादी का अमृत महोत्सव चल रहा है. हर तिरंगा अभियान भी चला, ख़बरों के अनुसार जिसपर करीब 750 करोड़ खर्च भी आया. स्कूल और कार्यालयों में बिका भी कुछ लोगों को निःशुल्क मिला भी. लोगों ने घरों पर तिरंगा भी फहराया भी. लेकिन हमारे देश को आज़ादी ऐसे ही नहीं मिली इसके अनगिनत क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया. किसी को कुचला गया, राजद्रोही बनाया गया और किसी को फांसी पर लटकाया गया. इन्ही बलिदानों से आज़ादी मिली. लोगों का कहना है कि कभी कभी ऐसा प्रतीत होता है कि आज भी जनसमस्याओं के समाधान के लिए बलिदान देना पड़ता है.

अहमदाबाद में एक नदी बहती है साबरमती। राजस्थान से निकलती है लेकिन इसका ज़्यादातर हिस्सा गुजरात में आता है। साबरतमी को आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति से अलग नहीं कर सकते और न ही इसे चुनाव से अलग कर सकते हैं। जब भी चुनाव आता है, इस नदी को लेकर कुछ न कुछ नया हो जाता है। पुराना भुला दिया जाता है और नया जोड़ दिया जाता है।नदियों के किनारे बनने वाले रिवर फ्रंट और उनकी सजावट पर बहाए जा रहे करोड़ों रुपये से जनता का कितना हित होता है, नदी का कितना हित होता है, इस पर बात बंद हो चुकी है।

साबरमती नदी पर एक नया पुल बना है, इसका मकसद मनोरंजन के लिए ही नज़र आता है क्योंकि बिना टिकट लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं ।विकास के शहरी मॉडल में नदियों के किनारे को सजाने की राजनीति अगर कहीं परिपक्व हुई है तो केवल साबरमती नदी का यह किनारा है जिस पर यह पुल बना है। ख़बरों के अनुसार साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड ने 74 करोड़ की लागत से इस पुल का निर्माण कराया है।इस पुल का नाम अटल ब्रिज रखा गया है। अहमदाबाद में होने वाले पतंग उत्सव की प्रेरणा लेकर पुल का आकार बनाया गया है। 300 मीटर लंबे इस पुल को बनाने में 26 lakh किलोग्राम स्टील की पाइप का इस्तेमाल हुआ है। शीशे और स्टील की मदद से इस तरह बनाया गया है कि सेल्फी खींचाने वालों की भूख बढ़ती भी रहेगी और मिटती भी रहेगी। स्मार्ट फोन ने जिस तरह से लोगों को अब ढाल दिया है, उनके हिसाब से ये पुल ढाल दिया गया है। यही कारण है कि जिस नदी को लोग दिन रात देखते हैं, इस पुल के कारण बार बार आ रहे हैं। नदी के लिए नहीं, इस रंग-बिरंगे पुल को देखने के लिए।ऐसा नहीं है कि साबरमती को देखने के लिए अहमदाबाद शहर में ही कई पुल बने हैं। गांधी पुल, सरदार पुल, नेहरु पुल, सुभाष पुल, लाल बहादुर शास्त्री पुल, इंदिरा पुल, अंबेडकर पुल, विवेकानंद पुल,ऋषि दधिची पुल इतने पुलों के रहते भी एक पुल केवल मनोरंजन के लिए बनाया गया है। अटल पुल सरदार पुल और विवेकानंद पुल के बीच में बना है। विवेकानंद पुल का पुराना नाम एलिस ब्रिज है।

लेकिन ये जगह किसी आपदा की शिकार नहीं हुई की यहाँ पुल बनाना पड़ा और न ही जनता ने आन्दोलन किया पुल के लिए. लेकिन यूपी के गाजीपुर में 5 मासूमों की जीवन लीला समाप्त हो गई, क्योंकि वहां पुल नहीं था. परिजनों के लिए ये झाख्म कोई साधारण जख्म नहीं था ये ताउम्र का जख्म था. वो स्थान, मिलने वाले पैसे या बनने वाला पुल उन मासूमों के बलिदान की निशानी होगा.

गाजीपुर के अठहठा गांव में बुधवार को यात्रियों से भरी नाव बाढ़ के पानी में पलटने से लापता पांच लोगों के शव भी गुरुवार को बरामद कर लिए गए। इस तरह हादसे में मरने वालों की संख्या सात हो गई। ह्दय विदारक हादसे से पूरा जनपद गमगीन हो गया। जनपद के कई जनप्रतिनिधि और अन्य लोग घटना स्थल, मर्चरी हाउस और अंत्येष्टि स्थल पहुंचे। विधायक मन्नू अंसारी घटना स्थल पर पहुंचे, उन्होंने परिजनों को हर मुमकिन मदद करने का आश्वासन दिया, वहीँ भज जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह समेत कई भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्त्ता मर्चरी हाउस पहुंचे वहां उन्होंने इस घटना पर दुःख जताया. पीड़ितों के रोने-बिलखने और बदहवासी के बीच वे लोगों को ढाढ़स बंधाते रहे। नाव हादसे ने छह परिवारों को ताउम्र न भूलने वाला दुख दिया है।

हादसे में किसी ने इकलौते पुत्र तो किसी ने पिता और भाई तो किसी ने पुत्री और पति को खोया। दुर्घटना में पत्नी को तो बचा लिया पर खुद की सांसें थम गई। गांव पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि सिर्फ चीत्कार ही सुनाई दे रही है। गुरुवार को बच्चों का शव देखकर रोती- बिलखती महिलाओं को देखकर हर किसी का कलेजा कांप रहा था।

बीएसएफ जवान की पांच वर्षीय मासूम पुत्री अलीशा यादव का 30 अगस्त को जन्मदिन था। घर के लोगों ने काफी धूमधाम के साथ उसका जन्मदिन मनाया था। परिजनों को क्या पता था कि मासूम का यह आखिरी जन्मदिन है। हादसे की जानकारी होने के बाद घर पहुंचे पिता अपनी मासूम पुत्री को मृत देख बेसुध हो गए और बिलख पड़े। 

अठहठा गांव निवासी शिवशंकर उर्फ डब्लू गौड़ अपने छोटे पुत्र सत्यम गौड़ की तबीयत खराब होने पर उतरौली चिकित्सक के पास दिखाने आए थे। वहां से पुत्र को दवा दिलाकर बाजार से खरीदारी की। इधर बड़ा पुत्र शिवम गौड़ पिता और छोटे भाई के लौटने का इंतजार कर रहा था। उसे क्या पता था कि उसका इंतजार अब कभी खत्म नहीं होगा। नाव हादसे में पिता-पुत्र दोनों की डूबकर मौत हो गई।

नाव हादसे के बाद जनपद ही नहीं कई जिलों के लोग सिहर उठे। इधर राहत बचाव के लिए एनडीआरएफ की टीम को भी सूचना दी गई। ग्रामीणों के मुताबिक टीम सुबह दस बजे के बाद पहुंची। हालांकि टीम ने पहुंचकर अलीशा का शव बरामद कर लिया, लेकिन ग्रामीणों का कहना था कि अगर समय से टीम पहुंच जाती तो सुबह से गांव के लोग जिस तरह से कड़ी मशक्कत कर रहे थे, उन्हें इस टीम की सहायता मिलती और राहत-बचाव का कार्य तेज हो जाता। 

परिजनों को मिलेंगे चार-चार लाख रुपये

अठहठा गांव में नाव हादसे के दूसरे दिन गुरुवार तक सात शव पानी से निकाले गए। इसके साथ ही प्रशासन ने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दिया है। इसमें दैविक आपदा के अंतर्गत छह परिवार के सात सदस्यों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

तहसील प्रशासन का कहना है कि अभी दैविक आपदा के तहत मदद मुहैया कराई जा रही है। इसमें किसान परिवार के पीड़ितों को कृषक दुर्घटना बीमा के तहत एक लाख रुपये की और मदद मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि इसमें समय लग सकता है। 

सड़क और पुलिया बनाने का आश्वासन

वहीं, हादसे के मुख्य कारणों में शामिल आवागमन की परेशानी को देखते हुए सड़क और पुलिया बनाने को लेकर सहमति बनी है। बाढ़ के कारण अठहठा गांव टापू बन जाता है। इससे ग्रामीणों को बड़ी परेशानी होती थी। इसको देखते हुए क्षेत्र के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त की ओर से अठहठा गांव में सड़क और पुल निर्माण का आश्वासन दिया गया है। इस पर तहसील प्रशासन की ओर से ग्रामीणों से प्रस्ताव मंगाया गया है। एसडीएम ने कवायद शुरू करते हुए जल्द ही ग्रामीणों से प्रस्ताव भेजने को कहा है।   

एक ऐसा गाँव जो हर बार बाढ़ में टापू बन जाता है लेकिन आज तक यहाँ पुल का निर्माण नाही हो सका. देखने वाली बात है ये भी की ये पुल कब तक बनता है. शायद ऐसे गाँव केवल चुनाव के समय ही याद आते हैं या हादसों के समय. यदि सरकार, अधिकारी और जनप्रतिनिधि ईमानदारी से अपने शिक्षा का उपयोग करके बजट का सटीक प्रबंधन कर सटीक योजना बनाये तो ऐसे ना जाने कितने काम आसानी से हो जाये और किसी को बलिदान न देना पड़े. इस खबर को पढने वालों अपने दिल पर हाथ रख के सोचो.

खैर गुरूवार देर शाम सभी मृतकों का अंतिम संस्कार प्रशासन की तरफ से गाजीपुर स्थित शमशान घाट पर कराया गया. तहसीलदार सदर अभिषेक कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर हम लोग पोस्ट मार्टम हाउस गये. वहां से नियम के तहत हम शमशान घाट आये, वहां मृतक के परिजन, वर्तमान प्रधान, पूर्व प्रधान, भाजपा और बसपा के नेता मौजूद थे. उन्होंने कहा कि हम लोगों ने नगरपालिका इओ लाल चंद सरोज की मदद से घाट पर लकड़ियों सहित अन्य सामग्री की व्यवस्था करवाई. सात लोगों का अंतिम संस्कार करवाया गया है. मौके पर नगरपालिका इओ लाल चंद सरोज, छावनी लाइन के लेखपाल राम अवतार, गोंडा के लेखपाल राकेश राय, लेखपाल सुदीप झा, लेखपाल निलेश यादव सहित सम्बंधित थाने इंस्पेक्टर मौजूद थे.

…………………………………………

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading