पटना। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत राज्य सरकार ने बिहार (Bihar) की दस लाख महिलाओं के बैंक खातों में दस-दस हजार रुपये की राशि भेजी है। अब तक इस योजना के अंतर्गत एक करोड़ 51 लाख महिलाओं के खाते में यह राशि भेजी जा चुकी है। जीविका (JEEViKA) के पदाधिकारी के अनुसार, जिन महिलाओं के आवेदन 6 सितंबर से पहले प्राप्त हुए थे, उनमें से चयनित लाभार्थियों के खाते में यह राशि भेजी गई है। सूत्रों का कहना है कि यह खबर 24 अक्टूबर 2025 के आसपास सामने आई थी।
महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहन:
जीविका की सदस्य बनी महिलाओं को राज्य सरकार की ओर से स्वरोजगार शुरू करने के लिए दस-दस हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके बाद उनके द्वारा शुरू किए गए व्यवसाय या रोजगार का मूल्यांकन कर सरकार दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक मदद प्रदान करेगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन की कोई अंतिम तिथि तय नहीं की गई है। पात्र महिलाएं किसी भी समय आवेदन कर इस योजना का लाभ ले सकती हैं। वहीं, जिन महिलाओं के खाते में अभी राशि नहीं भेजी गई है, उन्हें दिसंबर तक भुगतान करने का कैलेंडर जारी किया गया है। योजना के तहत हर परिवार से केवल एक महिला को लाभ देने का प्रावधान रखा गया है।
राशि वापस नहीं करनी होगी: जीविका (JEEViKA):
जिलों से प्राप्त सवालों के जवाब में जीविका (JEEViKA) ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत दी गई दस हजार रुपये की राशि केवल रोजगार शुरू करने के उद्देश्य से है। इस राशि को किसी भी स्थिति में वापस नहीं करना होगा। यह पूरी तरह से राज्य सरकार की स्वीकृत अनुदान राशि है, न कि कोई ऋण या कर्ज। जीविका के अनुसार, यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
आचार संहिता लागू होने के बीच राशि वितरण पर सवाल:
Election Commission of India (ECI) द्वारा Bihar Legislative Assembly Election 2025 के मद्देनजर राज्य में Model Code of Conduct (MCC) 6 अक्टूबर 2025 से लागू कर दिया गया है। ऐसे में महिलाओं के खातों में राशि भेजे जाने को लेकर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या आचार संहिता लागू होने के बाद इस तरह की वित्तीय सहायता देना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।
आचार संहिता के प्रमुख नियम:
चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी नई सरकारी योजना, सड़क, भवन या सुविधा की घोषणा नहीं की जा सकती। पहले से स्वीकृत योजनाओं का प्रचार भी चुनावी लाभ के लिए नहीं किया जा सकता। साथ ही सरकारी संसाधनों — जैसे वाहन, गेस्ट हाउस, कर्मचारी या फंड — का उपयोग प्रचार कार्यों में प्रतिबंधित है।
भाषण और प्रचार पर मर्यादा आवश्यक:
चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि किसी भी नेता को धर्म, जाति, भाषा या समुदाय के आधार पर वोट मांगने की अनुमति नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झूठी या भड़काऊ सामग्री साझा करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
मीडिया और सरकारी विज्ञापनों पर रोक:
चुनाव अवधि के दौरान सरकारी विज्ञापनों का प्रकाशन पूरी तरह से रोक दिया जाता है। राजनीतिक दलों को टीवी, रेडियो और डिजिटल माध्यमों पर विज्ञापन देने से पहले Media Certification and Monitoring Committee (MCMC) से अनुमति लेना आवश्यक होता है।
सरकारी अधिकारियों की निष्पक्षता पर ज़ोर:
आचार संहिता लागू होने के बाद बिना चुनाव आयोग की अनुमति के किसी अधिकारी का तबादला या पदस्थापन नहीं किया जा सकता। आयोग के निर्देशों का उल्लंघन होने पर उम्मीदवार या दल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक सराहनीय पहल है, लेकिन आचार संहिता के बीच राशि वितरण पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बहस तेज़ हो गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पर Election Commission of India (ECI) क्या रुख अपनाता है।
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Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवाददाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।
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