बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर NDA (National Democratic Alliance) ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय कर दिया है। इस बार BJP (भारतीय जनता पार्टी) और JDU (जनता दल यूनाइटेड) दोनों बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। दोनों दल 101-101 सीटों पर मैदान में उतरेंगे। वहीं, Chirag Paswan की पार्टी LJP (R) को 29 सीटें मिली हैं, जबकि Jitan Ram Manjhi की HAM (Hindustani Awam Morcha) और Upendra Kushwaha की RLM (Rashtriya Lok Morcha) को 6-6 सीटें दी गई हैं। सीट बंटवारे के बाद मांझी और कुशवाहा के बयान राजनीतिक तापमान बढ़ा रहे हैं।
NDA में अब JDU नहीं रही ‘बड़े भाई’ की भूमिका:
इस बार सीट बंटवारे में JDU और BJP दोनों बराबर खड़ी हो गई हैं। पहले JDU को NDA में ‘बड़े भाई’ की भूमिका हासिल थी, लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं। NDA ने यह तय किया कि BJP और JDU दोनों बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। यही वजह है कि BJP 101 और JDU भी 101 सीटों पर चुनाव मैदान में है।
मांझी का बयान, अहमियत घटाई गई:
HAM (Hindustani Awam Morcha) प्रमुख Jitan Ram Manjhi ने पहले तो सीट बंटवारे को स्वीकार किया, लेकिन बाद में असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि आलाकमान ने फैसला लिया है, उसे स्वीकार करते हैं, मगर हमें सिर्फ 6 सीटें देकर हमारी अहमियत कम आंकी गई है। मांझी का कहना है कि इस फैसले का असर NDA के भीतर दिख सकता है।
कुशवाहा का दर्द, ‘समय बताएगा फैसला सही या गलत’
RLM (Rashtriya Lok Morcha) प्रमुख Upendra Kushwaha ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सीट बंटवारे से पार्टी कार्यकर्ताओं का मन दुखी हुआ है। उन्होंने कहा कि “आपके मन के अनुरूप सीटों की संख्या नहीं हो पाई। कई घरों में आज खाना नहीं बना होगा, लेकिन कुछ निर्णय ऐसे होते हैं जो बाहर से नहीं दिखते। समय बताएगा कि फैसला सही था या गलत।”
लोकसभा फॉर्मूले पर बना NDA का समीकरण:
NDA की इस सीट शेयरिंग का आधार 2024 लोकसभा चुनाव को माना गया है। उस चुनाव में BJP ने 17 सीटों पर और JDU ने 16 सीटों पर मुकाबला किया था। लोकसभा सीटों के आधार पर विधानसभा की सीटों का बंटवारा किया गया। इस बार NDA ने एक संतुलित फॉर्मूला अपनाया, जिसके तहत दोनों बड़ी पार्टियां बराबर सीटों पर उतरी हैं।
JDU की सीटों में 15 साल में 29% की कमी:
2005 से 2025 तक JDU की सीटों में करीब 29 प्रतिशत की गिरावट आई है। 2005 में JDU 138 सीटों पर लड़ी थी, जबकि 2010 में 141 पर। अब यह संख्या घटकर 101 रह गई है। दूसरी ओर, BJP ने 2005 में जितनी सीटों पर चुनाव लड़ा था, 2025 में भी वही संख्या बरकरार रखी है।
JDU और BJP पहली बार बराबर सीटों पर:
पिछले चुनावों में JDU हमेशा अधिक सीटों पर चुनाव लड़ती रही थी, लेकिन इस बार BJP ने बराबरी कर ली। 2020 के चुनाव में JDU 115 और BJP 110 सीटों पर लड़ी थी। अब दोनों दलों को बराबर 101 सीटें मिली हैं। इस बदलाव को बिहार की राजनीति में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
चिराग पासवान बने NDA के सबसे बड़े बार्गेनर:
LJP (R) प्रमुख Chirag Paswan ने सीट शेयरिंग में सबसे ज्यादा मोलभाव किया। 2020 में वे NDA से अलग होकर 135 सीटों पर उतरे थे, जिससे JDU को भारी नुकसान हुआ था। इस बार उन्होंने NDA में लौटकर अपनी शर्तों पर 29 सीटें हासिल कीं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब NDA में दलित चेहरे के रूप में चिराग पासवान की स्थिति मजबूत हुई है।
मांझी की सीटें घटीं, नाराज़गी बरकरार:
Jitan Ram Manjhi 20 से अधिक सीटों की मांग कर रहे थे, लेकिन NDA ने सिर्फ 6 सीटें दीं। वे चाह रहे थे कि उनकी पार्टी को राज्य स्तरीय दर्जा मिल सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मांझी को सीमित सीटें देकर NDA ने यह संदेश दिया है कि उन्हें गठबंधन में रहते हुए ही सम्मान मिलेगा।
कुशवाहा की पार्टी कमजोर कड़ी बनी:
Upendra Kushwaha की RLM पिछले कई सालों से विधानसभा में प्रतिनिधित्व नहीं कर पाई है। 2015 के चुनाव में उनकी पार्टी ने दो सीटें जीती थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में वे हार गए थे, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हो गई। इसलिए NDA ने उन्हें भी सिर्फ 6 सीटें देकर सीमित दायरे में रखा है।
राजनीतिक संदेश साफ, NDA में संतुलन का दौर:
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, BJP ने इस बार सीट शेयरिंग के जरिये JDU के बराबर खुद को खड़ा किया है। वहीं, NDA में शामिल छोटे दलों को सीमित सीटें देकर संदेश दिया गया है कि गठबंधन में बने रहने पर ही राजनीतिक लाभ मिलेगा।
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