राष्ट्रकवि भोलानाथ शेखर की जयंती पर कविताओं से गूंजा घर



लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) में राष्ट्रकवि भोलानाथ शेखर की 113वीं जयंती श्रद्धा और सादगी के साथ मनाई गई। मोहल्ला नई बस्ती स्थित उनके निज निवास पर परिवार के सदस्यों और शुभचिंतकों ने एकत्र होकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर कवि की स्मृति में उनके परिवार के सभी सदस्यों ने उनकी प्रसिद्ध कृति “तलवार चली” से कविताओं का पाठ किया, जिससे वातावरण काव्यमय हो उठा।

कविता पाठ से सजी शाम:
कार्यक्रम की शुरुआत कविवर भोलानाथ शेखर की कविताओं के पाठ से हुई। उनके बड़े पुत्र रामगोपाल ने प्रसिद्ध कविता “भारतीय नारी” की कुछ प्रेरणादायक पंक्तियां प्रस्तुत करते हुए कहा—
“तुम हो सहाय असहयों की, तुम दिनों की दुख हरनी हो,
हो तुम ही जन्मदाता जग की, तुम जग की पालन करनी हो।”
इन पंक्तियों ने भारतीय नारी के त्याग, शक्ति और सृजन की भावना को सजीव कर दिया।

नई पीढ़ी ने दी श्रद्धांजलि:
भोलानाथ शेखर के परपोत्र नाभ्य शेखर ने उनकी कविता से अंश प्रस्तुत करते हुए वीरता और देशभक्ति की झलक दिखाई। उन्होंने कहा—
“खप्पर त्रिशूल वाली बनकर, चंडिका मुंड माली बनाकर
तुम कूद पड़ो सीमाओं पर, काली बन कंकाली बनकर।”
वहीं परपोती रिद्धिमा शेखर ने कवि की रचित होली पर आधारित कविता से कुछ पंक्तियां सुनाईं—
“त्याग अभियान मान अपमान, शत्रु कर रहा शत्रु से प्यार,
अजब है होली का त्यौहार।”
इन पंक्तियों ने कार्यक्रम में एक अलग ही उत्साह और उमंग भर दी।

कविता और कवि पर अभिव्यक्ति:
कविवर के पोत्र एडवोकेट रजत शेखर ने “कविता और कवि” शीर्षक से कविता पाठ करते हुए कहा—
“कविता कवि का दम भरती है, वीणावादिनी द्वार कवि का,
निशि वॉशर झांका करती है।”
उनकी प्रस्तुति ने कवि और काव्य के आत्मिक संबंध को बखूबी व्यक्त किया।

शहादत की याद में भावुक हुआ परिवार:
कविवर भोलानाथ शेखर का निधन आज से लगभग 60 वर्ष पूर्व करवा चौथ के दिन हुआ था। वे उस समय एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ कर रहे थे। मंच पर ही कविता पढ़ते-पढ़ते उन्होंने अंतिम सांस ली, जिससे पूरा साहित्य जगत शोकाकुल हो गया था। आज भी उनकी शहादत को नमन करते हुए परिवार और नगरवासी भावुक हो उठे।

नगर में अब भी जीवित है उनकी परंपरा:
लखीमपुर खीरी नगर पालिका परिषद (Municipal Council) द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में प्रतिवर्ष होने वाला अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कविवर भोलानाथ शेखर की स्मृति को समर्पित रहता है। इस आयोजन के माध्यम से उनकी साहित्यिक धरोहर को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

भोलानाथ शेखर की विरासत:
कविवर भोलानाथ शेखर ने अपने लेखन से राष्ट्रभक्ति, समाज सुधार और भारतीय संस्कृति की महानता को अपनी कविताओं में साकार किया। उनकी रचनाएं आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती हैं।


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डिस्क्लेमर:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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