लखनऊ: ‘बालवाटिका नवारंभ उत्सव’ से नन्हें कदमों को नई उड़ान, प्रारंभिक शिक्षा सशक्त बनाने की अभिनव पहल

लखनऊ में योगी सरकार की पहल के तहत ‘बालवाटिका नवारंभ उत्सव’ का आयोजन बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ किया गया, जिसका उद्देश्य प्रारंभिक शिक्षा को सशक्त बनाना और बच्चों को विद्यालय से जोड़ना रहा। इस कार्यक्रम में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के नामांकन पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि शिक्षा की मजबूत नींव बचपन से ही रखी जा सके। विभिन्न विद्यालयों में आयोजित इस उत्सव ने बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक और सहज बनाने का संदेश दिया।

A group of adults and children gathered around a decorated table with a floral design, participating in a cultural event. Some individuals are taking photos, while children are interacting with materials on the table.

उच्चस्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ शुभारंभ:
कार्यक्रम की शुरुआत विकासखंड सरोजनीनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय, ग्राम रामचौरा में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा (Parth Sarathi Sen Sharma) और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी (Monika Rani) की उपस्थिति में की गई। इस दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला, जहां बच्चों ने खेल-खेल में सीखने की गतिविधियों में भाग लिया।

प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने पर जोर:
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा (Parth Sarathi Sen Sharma) ने कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के विकास का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस अवधि में बच्चों को शिक्षा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, जिससे वे आगे की पढ़ाई में सहज रूप से प्रगति कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।

खेल आधारित शिक्षण से बढ़ेगा आत्मविश्वास:
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी (Monika Rani) ने बताया कि खेल आधारित शिक्षण पद्धति से बच्चों में आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास होता है। ‘सेल्फ लर्निंग’ और ‘एक्टिव लर्निंग’ जैसी तकनीकों के माध्यम से बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वे शिक्षा को बोझ नहीं बल्कि आनंद के रूप में स्वीकार करें।

रेत लेखन और गतिविधियों ने बढ़ाया आकर्षण:
नवारंभ उत्सव का मुख्य आकर्षण ‘रेत पर लेखन’ गतिविधि रही, जिसमें छोटे बच्चों ने खेल-खेल में अक्षर और अंक सीखने का प्रयास किया। इस नवाचारी पद्धति ने बच्चों को सीखने के प्रति आकर्षित किया और शिक्षा को रोचक बना दिया।

बच्चों को उपहार और पाठ्यपुस्तकों का वितरण:
कार्यक्रम के दौरान 58 बच्चों को गिफ्ट हैंपर वितरित किए गए, जिनमें शैक्षिक सामग्री शामिल थी। इसके साथ ही नए शैक्षिक सत्र 2026-27 के तहत 25 बच्चों को पाठ्यपुस्तकें भी प्रदान की गईं। इस पहल से बच्चों और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ा।

समुदाय और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी:
इस आयोजन में अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इससे न केवल बच्चों के शैक्षिक विकास को बढ़ावा मिला, बल्कि विद्यालय और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ।

नामांकन बढ़ाने और शिक्षा से जोड़ने पर फोकस:
इस उत्सव के माध्यम से 3 से 6 वर्ष के बच्चों के नामांकन को बढ़ावा देने के साथ ही 6 वर्ष पूर्ण कर चुके बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया को सरल और आकर्षक बनाया गया। विद्यालयों में प्रिंट-समृद्ध वातावरण और लर्निंग कॉर्नर विकसित कर बच्चों के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।


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