रिपोर्टर: अमित कुमार
बलिया से सामने आए एक मामले ने स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेता उपेंद्र पांडेय (Upendra Pandey) जेल से रिहा होने के बाद प्रदेश की BJP सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि बलिया में जेल ही नहीं है, इसलिए जिले को अपराध मुक्त घोषित कर देना चाहिए। पांडेय का आरोप है कि पुलिस ने उन पर फर्जी मुकदमा दर्ज किया और पहली बार उन्हें जेल भेजा, जिससे उनके परिवार और समर्थकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रिहाई के बाद आरोपों की बरसात:
उपेंद्र पांडेय (Upendra Pandey) ने रिहाई के तुरंत बाद कहा कि पूरे मामले में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। उनका दावा है कि जिस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया वह आधारहीन था और जांच के नाम पर उन्हें परेशान करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के दौरान जिन लोगों ने उनका साथ दिया, उन्हें भी कई मुश्किलों से गुजरना पड़ा।
परिवार और समर्थकों को हुआ नुकसान:
पांडेय ने बताया कि जेल भेजे जाने के बाद उनके परिवार के सदस्य और समर्थक उनसे मिलने के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकते रहे। चूंकि बलिया में जेल नहीं है, इसलिए उन्हें कई किलोमीटर दूर जाकर मिलना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों दोनों का नुकसान होता था। उन्होंने इसे एक मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न बताते हुए कहा कि इस स्थिति ने कई परिवारों को संकट में डाल दिया।
BJP सरकार पर निशाना:
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) नेता ने BJP सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई राजनीतिक द्वेष के चलते की गई। उनका कहना है कि प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष नहीं रही और यह राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने बलिया को अपराध मुक्त घोषित करने की बात कहते हुए पूरे मामले को प्रशासनिक अव्यवस्था का परिणाम बताया।
फर्जी मुकदमे का आरोप:
उपेंद्र पांडेय (Upendra Pandey) ने दोहराया कि उनके खिलाफ दर्ज मामला वास्तविकता से कोसों दूर था। उनका कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और विरोधियों को दबाने का प्रयास है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पुलिस की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाया जाए।
जिले में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी:
पांडेय के आरोपों के बाद बलिया की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय राजनीतिक माहौल में इस बयान का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या वाकई प्रशासनिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल हुआ है या मामला राजनीतिक बयानबाजी भर है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
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