रिपोर्ट: अमित कुमार
बलिया (Ballia) में माता-पिता की मौत के बाद अनाथ हुए दो बच्चों ने न्याय की गुहार लगाते हुए डीएम दरबार (DM Darbar) में अपनी शिकायत दर्ज कराई। बच्चों का कहना है कि बड़े पापा की वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
बच्चों का दर्द और परिवार की स्थिति:
बच्चों ने बताया कि उनकी मां की मौत बीमारी से हुई थी। वहीं पिता की मौत पर उन्हें संदेह है। बच्चों के अनुसार, मम्मी के निधन के बाद उनके जेवरात बड़े पापा ने रख लिए। इसके अलावा, पट्टीदार बड़े पापा ने उन्हें घर से बेघर कर दिया।
पिता की मौत पर बच्चों और नाना-नानी की अलगाव:
बच्चों ने कहा कि उनके बड़े पापा ने पिता की मौत के बाद उन्हें और नाना-नानी को मुलाकात की अनुमति नहीं दी। इस वजह से बच्चों और नाना-नानी ने पिता की मौत की जांच कराने की मांग की है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी की लापरवाही:
उधर, जिला प्रोबेशन अधिकारी (District Probation Officer) ने बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया। बच्चों के परिवार ने बताया कि फार्म भरने के बावजूद अधिकारी ने वर्षों तक उन्हें दौड़ाया और उनकी मदद नहीं की। इस लापरवाही के कारण अनाथ बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अनाथ बच्चों का वर्तमान निवास:
जिला प्रशासन और तहसील (Sadar Tehsil), थाना कोतवाली के रामपुर माहौल (Rampur Area) के इस मामले में अनाथ दोनों बच्चे नाना-नानी के घर रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि बड़े पापा की हरकतों से उन्हें मानसिक और शारीरिक संकट झेलना पड़ रहा है।
न्याय की मांग:
बच्चों ने डीएम दरबार (DM Darbar) से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उन्हें उनके माता-पिता की संपत्ति और अधिकारों का हक़ दिलाया जाए और पिता की मौत की निष्पक्ष जांच हो।
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समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी:
इस मामले ने बच्चों की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की अनुपालना पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि अनाथ बच्चों के हक़ और अधिकार सुरक्षित रह सकें।
बलिया में अनाथ बच्चों की न्याय की गुहार