जानलेवा इंतज़ार: बलिया में अधूरा पुल, बांस की सीढ़ियों से गुजर रहे लाखों लोग

रिपोर्ट: अमित कुमार

Ballia: बलिया ज़िले के चितबड़ागांव में सरयू नदी पर बना 17 करोड़ 50 लाख की लागत का पुल आज भी अधूरा पड़ा है। सेतु निगम ने करीब दो साल पहले पुल तो बना दिया, लेकिन उसकी एप्रोच रोड (पहुंच मार्ग) अब तक तैयार नहीं हुई। नतीजतन, रोज़ लाखों लोगों की ज़िंदगी जोखिम में है।

बांस की सीढ़ियों पर रोज़ाना ‘ख़तरनाक सफ़र’

एप्रोच न होने की वजह से ग्रामीणों ने अस्थायी इंतज़ाम कर बांस-बल्ली की सीढ़ियाँ लगा दी हैं। इन्हीं सीढ़ियों के सहारे स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, व्यापारी और किसान रोज़ नदी पार कर रहे हैं। कोई कंधे पर दूध का टैंक लेकर चढ़ रहा है तो कोई ईख या साइकिल लेकर उतर रहा है। हर रोज़ यह भयावह नज़ारा देखने को मिलता है। कई लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं।

स्थानीय लोग बताते हैं कि लगभग 10 लाख की आबादी का यही एकमात्र रास्ता है। ऐसे में मजबूरी में उन्हें बांस की सीढ़ियों से उतरना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

जनप्रतिनिधियों की बेबसी

आदर्श नगर पंचायत चितबड़ागांव के चेयरमैन अमरजीत सिंह ने कहा कि कई बार सेतु निगम से शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठाया जाएगा।

वहीं, एक स्थानीय व्यापारी बनारसी ने बताया कि रोज़ कंधे पर भारी बोझ उठाकर सीढ़ियों से उतरना बेहद खतरनाक है, लेकिन रोज़गार की मजबूरी में जान हथेली पर रखनी पड़ रही है।

प्रशासन ने माना खामी

बलिया के ज़िला अधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने माना कि पुल का काम अधूरा है और एप्रोच न बनने की वजह से लोग जान जोखिम में डाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि सेतु निगम को पुल और एप्रोच मार्ग के निर्माण का काम जल्द शुरू करने का आदेश दिया गया है। हालांकि, तकनीकी दिक्कतों की वजह से फाइल शासन स्तर पर अटकी हुई है।

डीएम ने चेतावनी दी है कि बांस की सीढ़ियों का उपयोग बंद कराया जाएगा, क्योंकि इससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

जनता में गुस्सा, सवालों के घेरे में सेतु निगम

17 करोड़ 50 लाख की लागत से बने इस पुल का उद्देश्य लोगों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन था। लेकिन अधूरा निर्माण अब तक शासन-प्रशासन की लापरवाही का प्रतीक बना हुआ है। स्थानीय लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद अब तक उन्हें सुरक्षित मार्ग क्यों नहीं मिला?

जब तक एप्रोच रोड तैयार नहीं होती, तब तक लाखों लोग इसी जोखिम भरे रास्ते पर चलने को मजबूर रहेंगे।

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