Ayodhya । 7 सितंबर 2025 को लगने वाले चंद्र ग्रहण के कारण धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ग्रहण के समय मंदिरों में पूजा-अर्चना और दर्शन स्थगित कर दिए जाते हैं। इसी क्रम में श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा। इसके बाद रामलला के दर्शन बंद कर दिए जाएंगे। संतान धर्म परंपरा के अनुसार सूतक काल लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, क्योंकि इस अवधि में देव दर्शन, पूजा-पाठ, विवाह और धार्मिक आयोजन नहीं किए जाते।
अयोध्या के प्रमुख मंदिरों के कपाट भी ग्रहण समाप्त होने तक बंद रहेंगे। श्रद्धालुओं को घर पर रहकर मंत्र-जप और धार्मिक क्रियाएं करने की सलाह दी गई है। सूतक काल रात 11:42 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद ही समाप्त होगा। इसके बाद ही मंदिरों के कपाट खोले जाएंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। हालांकि भारत से इसे प्रत्यक्ष नहीं देखा जा सकेगा, लेकिन इसका धार्मिक प्रभाव विश्वभर में पड़ेगा। यह ग्रहण एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कई हिस्सों से देखा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चंद्र ग्रहण सामाजिक और प्राकृतिक घटनाओं पर भी असर डाल सकता है। चंद्रमा जल तत्व से जुड़ा माना जाता है, इसलिए समुद्री तूफान, ज्वार-भाटे जैसी घटनाओं की संभावना अधिक रहती है।
धार्मिक दृष्टिकोण से यह अवधि संवेदनशील मानी जाती है, इसलिए श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे इस समय सावधानी बरतें और सूतक काल समाप्त होने के बाद ही मंदिरों में पूजा-अर्चना करें।
7 सितंबर को चंद्र ग्रहण, दोपहर बाद नहीं होंगे रामलला के दर्शन

