Ayodhya Medical Case: जांच में देरी से शासन सख्त…

रिपोर्ट: अनुज कुमार

अयोध्या (Ayodhya) स्थित अयोध्या मेडिकल कॉलेज (Ayodhya Medical College) के पूर्व प्रिंसिपल ज्ञानेन्द्र कुमार से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। जांच प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी को लेकर शासन स्तर पर नाराजगी साफ तौर पर सामने आई है। प्रकरण को लेकर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है और उच्च स्तर से जवाबदेही तय करने की कवायद शुरू कर दी गई है।

अपर मुख्य सचिव की नाराजगी:
जांच में अपेक्षित प्रगति न होने पर अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित घोष (Amit Ghosh) ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। जांच रिपोर्ट में विलंब को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।

महानिदेशक से मांगी गई रिपोर्ट:
प्रकरण को लेकर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक अर्पणा यू (Arpana U) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि जांच किस स्तर पर है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है। शासन की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि रिपोर्ट में किसी प्रकार की ढिलाई या अस्पष्टता मिलने पर आगे कड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।

जांच रिपोर्ट में देरी पर स्पष्टीकरण:
जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध न कराने को लेकर अपर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। शासन का मानना है कि गंभीर आरोपों से जुड़े मामलों में विलंब से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठते हैं बल्कि जनविश्वास भी प्रभावित होता है। इसी कारण देरी के कारणों को लिखित रूप में स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच अधिकारी से जवाब तलब:
प्रकरण की जांच कर रहे अधिकारी से भी शासन ने स्पष्टीकरण की रिपोर्ट तलब की है। उनसे पूछा गया है कि जांच पूरी होने में अब तक इतनी देरी क्यों हुई और इसमें कौन-कौन से स्तर पर अड़चनें आईं। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं होने की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

पूर्व प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप:
पूर्व प्रिंसिपल डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार उन्होंने अवकाश पर रहते हुए भी वित्तीय मामलों में हस्तक्षेप किया और चेक पर हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये का भुगतान किया। यह मामला प्रशासनिक नियमों और वित्तीय अनुशासन के उल्लंघन से जुड़ा माना जा रहा है।

जेम पोर्टल से भुगतान का मामला:
जांच में यह भी सामने आया है कि जेम पोर्टल (GeM Portal) के माध्यम से की गई खरीदारी का भुगतान भी डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार द्वारा किया गया। आरोप है कि यह भुगतान उस समय किया गया जब वे अवकाश पर थे, जो नियमों के अनुरूप नहीं है। इसी बिंदु को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

अन्य घोटालों से भी जुड़ाव की जांच:
सूत्रों के अनुसार ऐसे घोटालों से जुड़े अन्य मामलों में भी ज्ञानेंद्र कुमार की भूमिका की जांच चल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वित्तीय अनियमितताएं किसी एक मामले तक सीमित हैं या इसके पीछे कोई व्यापक पैटर्न मौजूद है।

शासन का सख्त संदेश:
शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को यह संदेश दिया गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस पूरे प्रकरण को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

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