दुनियाभर से कोविशील्ड वैक्सीन हो रही है वापस…

जब बात कोरोना की होती है तो लोगों की रुंह कांप जाती है. वो तस्वीरें जहाँ में आने लगती है जब लोगों की मौत ने पुरे विश्व में डर पैदा कर दिया था. हजारों लाशों को देख इंसान सहम उठा था. लॉक डाउन ने हजारों को सड़क पर ला दिया था. कई परिवार उजड़ गये. कईयों की जिन्दगी तबाह हो गयी. अपनों ने अपनों की कद्र बता दिया. बेटा बाप का नहीं हुआ तो बाप बेटे को छू न सका. जब ममता तड़प रही थी और सत्ता तमाशा देख रहा था. आपनी जान बचाने के लिए लोगों ने वो सब कुछ किया जिसको करने के लिए जिम्मेदारों ने बोला था. उनमे से सबसे महत्वपूर्ण था वैक्सीनेशन. वैक्सीनेशन के लिए लोगो की भीड़ लगती थी. दो गज की दुरी मास्क है जरुरी की धज्जियाँ उड़ गयी थीं. वैक्सीनेशन के बाद लोगों को राहत मिली की अब हम सुरक्षित हैं. लोग कोरोना के डर से धीरे धीरे बाहर आने लगे लेकिन फिर खबर आने लगी की अचानक हृदयघात से मौत हो रही है. नौजवान, किशोर, बुजुर्ग सभी इसकी चपेट में आ रहे हैं. लेकिन अचानक खेलते वक़्त, जिम करते वक़्त कैसे लोगों की हृदयघात से मौत हो रही है. इन सवालों का अभी जवाब ढंग से सामने नहीं आया था कि तभी वैक्सीनेशन पर आरोप लगा कि ये इसी वहज से हो रहा है. जिस वैक्सीन पर आरोप लगा उसका नाम है कोविशील्ड वैक्सीन.

इन आरोपों को और बल तब मिल गया जब खुद टीके मुहैया कराने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने लिखित दस्तावेजों में स्वीकार किया कि कोरोना वैक्सीन के कुछ दुर्लभ मामलों में साइड इफेक्ट दिख सकते हैं, जिससे हृदयघात से मौत हो सकती है। अब खबर आ रही है कि टीके मुहैया कराने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने अपना कोरोना का टीका वापस मंगा लिया है। कंपनी ने कहा है कि वह दुनियाभर से अपनी वैक्सजेवरिया वैक्सीन को वापस मंगा रही है। गौरतलब है कि एस्ट्रा जेनेका के लाइसेंस वाली कोविशील्ड वैक्सीन ही भारत में भी कोरोना से बचाव के लिए दी गई थी। 

विपक्ष ने सरकार पर जमकर आरोप लगाया था कि कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने लापरवाही की, कई फैसले जल्दबाजी में लिए गये. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने 5 मार्च को ही वैक्सीन वैक्सजेरवरिया को वापस मंगाने का फैसला कर लिया था, लेकिन यह आदेश 7 मई से प्रभावी हुआ। कंपनी ने दावा किया है कि वैक्सीन का अपडेट संस्करण उपलब्ध है, ऐसे में वैक्सीन के पुराने स्टॉक को वापस मंगाया गया है। 

ब्रिटिश-स्वीडिश फार्मास्यूटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका का यह कदम ऐसे वक्त सामने आया है, जब कंपनी ने बीते दिनों ही स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट सामने आए हैं और इसकी वजह से कुछ लोगों में थ्रंबोसिस थ्रंबोसाइटोपीनिया सिंड्रोम बीमारी के लक्षण देखे गए हैं, जिसमें लोगों में खून के थक्के जमने लग जाते हैं। 

कंपनी के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे

एस्ट्राजेनेका कंपनी कोविड वैक्सीन को लेकर कई मुकदमों का सामना कर रही है। आरोप है कि कोविड वैक्सीन लगने के बाद कई लोगों की जान गई है। जैमी स्कॉट नामक एक व्यक्ति ने एस्ट्राजेनेका के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। स्कॉट का आरोप है कि वैक्सीन लेने के बाद उसके शरीर में खून के थक्के जमने की समस्या हुई और दिमाग में भी ब्लीडिंग हुई। इससे उसके मस्तिष्क को नुकसान हुआ। ऐसे ही कंपनी के खिलाफ 50 से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। कंपनी ने भी कोर्ट में लिखित दस्तावेजों में स्वीकार किया कि कोरोना वैक्सीन के कुछ दुर्लभ मामलों में साइड इफेक्ट दिख सकते हैं।

भारत में भी उठी चिंताएं

भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एस्ट्राजेनेका के फार्मूले से ही कोविशील्ड वैक्सीन का निर्माण किया था। एस्ट्राजेनेका ने यूरोप और दुनिया के अन्य देशों से ही कोरोना वैक्सीन वापस मंगाने का फैसला किया है। भारत में सीरम इंस्टीट्यूट की तरफ से अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। भारत में भी कोविशील्ड को लेकर चिंता उठ रही है और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है और वैक्सीन की सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर सुनवाई की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट भी सुनवाई के लिए सहमत हो गया है, लेकिन अभी तक तारीख तय नहीं हुई है।

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