गाजीपुर (Ghazipur) जनपद में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती प्रक्रिया को लेकर सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों में असंतोष सामने आया है। भर्ती में EWS आरक्षण की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पूर्व छात्र संघ महामंत्री एवं पूर्व अध्यक्ष युवा कांग्रेस सुधांशु तिवारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। इस मुद्दे ने जिले में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन:
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी गाजीपुर (District Magistrate Ghazipur) को ज्ञापन सौंपते हुए आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में EWS वर्ग को आरक्षण का लाभ न दिए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान चयन प्रक्रिया में EWS श्रेणी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे पात्र अभ्यर्थियों को अवसर से वंचित होना पड़ रहा है।
आरक्षण प्रावधानों की याद दिलाई:
सुधांशु तिवारी (Sudhanshu Tiwari) ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार सरकारी एवं सहायता प्राप्त संस्थानों में EWS वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान अनिवार्य है। ऐसे में आंगनबाड़ी सहायिका जैसी महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया में इस नियम की अनदेखी गंभीर विषय है और इसे तुरंत दुरुस्त किया जाना चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया में विसंगति का आरोप:
पूर्व छात्र नेता शशांक उपाध्याय (Shashank Upadhyay) ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि पूर्व में हुई भर्तियों में EWS श्रेणी को स्थान दिया गया था, लेकिन वर्तमान में चल रही भर्ती प्रक्रिया में यह व्यवस्था लागू नहीं दिख रही है। इससे यह संदेह पैदा होता है कि नियमों का समान रूप से पालन नहीं किया जा रहा।
विज्ञापन में स्पष्टता न होने से नाराजगी:
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि भर्ती विज्ञापन या चयन प्रक्रिया के दिशा-निर्देशों में EWS श्रेणी का स्पष्ट उल्लेख न होने के कारण सामान्य वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों में भारी असंतोष है। युवाओं का मानना है कि नियमों की अस्पष्टता के कारण उन्हें उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
जांच और पारदर्शिता की मांग:
पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय (Deepak Upadhyay) ने अपर उपजिलाधिकारी विनोद जोशी (Vinod Joshi) से मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह सामान्य वर्ग के युवाओं के अधिकारों से जुड़ा मामला है और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि EWS वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार उनका हक मिले। यदि प्रक्रिया में कोई तकनीकी बाधा है तो उसे दूर कर चयन प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए।
आंदोलन की चेतावनी:
दीपक उपाध्याय ने यह भी कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो युवाओं को धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि नियमों के अनुरूप न्याय सुनिश्चित करना है।
प्रतिनिधिमंडल में कई युवा शामिल:
इस अवसर पर पूर्व छात्र नेता शशांक उपाध्याय, शिवम पांडेय (Shivam Pandey), सुजीत राजभर (Sujeet Rajbhar), चमचम चौबे (Chamcham Chaubey) और ताम्रध्वज (Tamradhwaj) सहित कई अन्य युवा मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में भर्ती प्रक्रिया में EWS आरक्षण लागू करने की मांग की।
उच्च स्तर पर भी भेजी गई प्रतिलिपि:
ज्ञापन की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय (Chief Minister Office Uttar Pradesh) और महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग (Department of Women Welfare and Child Development) को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है, ताकि मामले पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके।
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