रिपोर्टर: जेड ए खान
अलीगढ़! करीब नौ वर्ष पूर्व नाबालिग के साथ हुई दुष्कर्म की घटना में न्यायालय ने दोषी को सख्त सजा सुनाई है। मामले में विशेष पोक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए लंबी अवधि का कारावास और आर्थिक दंड लगाया है। यह मामला अलीगढ़ जनपद के इगलास थाना क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा है, जहां वर्ष 2016 में यह घटना सामने आई थी।
घटना के बाद पीड़िता और उसके परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब इस मामले में फैसला आया है।
पोक्सो कोर्ट का फैसला:
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम पोक्सो न्यायालय (POCSO Court) के न्यायाधीश अनिल कुमार ने मामले में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को दस वर्ष का कठोर कारावास और बीस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी आदेश में शामिल किया गया है।
घटना का विवरण:
अभियोजन पक्ष के अनुसार, छह सितंबर 2016 को आरोपी ने उस समय वारदात को अंजाम दिया था, जब नाबालिग अपने घर में अकेली थी। आरोपी ने स्थिति का फायदा उठाते हुए उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता ने परिजनों को आपबीती बताई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।
अभियोजन पक्ष की भूमिका:
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) ललित सिंह पुंढीर ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि यह मामला नाबालिग के साथ गंभीर अपराध से जुड़ा है और इसमें सख्त सजा समाज में निवारक संदेश देने के लिए आवश्यक है।
न्यायालय की टिप्पणी:
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराध समाज के लिए अत्यंत गंभीर हैं। ऐसे मामलों में कठोर दंड दिया जाना जरूरी है ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और भविष्य में इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके। पोक्सो अधिनियम के तहत इस प्रकार के अपराधों में त्वरित और निष्पक्ष सुनवाई का उद्देश्य भी न्यायालय ने रेखांकित किया।
स्थानीय क्षेत्र में प्रतिक्रिया:
फैसले के बाद क्षेत्र में इस निर्णय को लेकर चर्चा रही। लोगों का कहना है कि इतने पुराने मामले में भी न्याय मिलना न्याय प्रणाली में भरोसे को मजबूत करता है। वहीं, कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश है।
यह मामला अलीगढ़ (Aligarh) जिले के इगलास (Iglas) थाना क्षेत्र से जुड़ा रहा, जहां वर्ष 2016 की यह घटना अब न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंची है।
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