रिपोर्टर: जेड ए खान
अलीगढ़ (Aligarh) की जिला कारागार (District Jail) में एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक के परिजनों और गांव के लोगों ने इस घटना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे परिवार के सदस्य और ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और न्याय की मांग को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बंदी की मौत स्वाभाविक नहीं है, बल्कि इसमें हत्या की आशंका है।
परिजनों का आरोप और प्रदर्शन:
मृतक के परिवार और गांव के लोगों ने जिला प्रशासन के समक्ष प्रदर्शन करते हुए कहा कि जेल के भीतर हुई इस मौत की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। परिजनों का कहना है कि बंदी पूरी तरह स्वस्थ था और अचानक उसकी मौत की सूचना मिलना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने जिलाधिकारी को संबोधित एक शिकायती पत्र सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा और पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की।
हाल ही में हुई थी गिरफ्तारी:
जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले अलीगढ़ पुलिस (Aligarh Police) ने 4.50 कुंटल गांजा बरामद करने के मामले में आरोपी पुष्पेंद्र को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत जिला कारागार भेजा गया था। जेल में लगभग सात दिन बिताने के बाद उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से उठे सवाल:
परिवार का कहना है कि जब तक वह जेल में था, तब तक उसकी हालत को लेकर कोई गंभीर सूचना नहीं दी गई। अचानक मौत की खबर मिलने से परिजन स्तब्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जेल प्रशासन की ओर से लापरवाही या किसी प्रकार की प्रताड़ना हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। ग्रामीणों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की है।
न्यायिक जांच की मांग:
परिजनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मामले की न्यायिक जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, जिससे किसी प्रकार की शंका न रहे।
प्रशासन की भूमिका पर नजर:
जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के बाद अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। फिलहाल प्रशासन की ओर से औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन परिजनों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच का आदेश जारी नहीं होता, वे न्याय की मांग करते रहेंगे। यह मामला जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
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