अलीगढ़: ज़हर खाया व्यक्ति तड़पता रहा, लेकिन निजी हॉस्पिटल ने नहीं दिया उपचार

रिपोर्टर: जेड ए खान

अलीगढ़ (Aligarh) के मडराक थाना क्षेत्र के अलीपुर गांव (Alipur Village) के एक व्यक्ति द्वारा जहरीला पदार्थ खाए जाने के बाद परिजन उसे उपचार के लिए तत्काल एक निजी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, लेकिन पैसों के अभाव में अस्पताल स्टाफ ने उपचार शुरू करने से इंकार कर दिया। परिजन लगातार विनती करते रहे कि मरीज को पहले उपचार दे दिया जाए, घर के अन्य सदस्य आते ही पैसे जमा कर दिए जाएंगे, लेकिन स्टाफ ने बात मानने से इनकार कर दिया। लगभग 20 मिनट तक मरीज तड़पता रहा और अस्पताल की ओर से केवल मेडिकल ले जाने की सलाह दी जाती रही।

पैसे न होने पर रोक दिया उपचार:
परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने हॉस्पिटल स्टाफ से बार-बार अनुरोध किया कि मरीज की हालत नाजुक है, इसलिए तुरंत इलाज शुरू किया जाए, लेकिन स्टाफ पैसे जमा होने तक किसी भी तरह की प्रक्रिया शुरू करने को तैयार नहीं था। इस दौरान मरीज दर्द से कराहता और तड़पता रहा। परिजन लगातार स्टाफ से आग्रह करते रहे, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।

वीडियो सामने आने पर बढ़ा विवाद:
जब परिजनों ने पूरी घटना का वीडियो बनाना शुरू किया, तो स्टाफ ने नाराजगी जताते हुए उन्हें धमकी दी कि “जो कर सको कर लेना।” वीडियो में साफ दिखाई देता है कि परिजन मिन्नतें कर रहे थे और अस्पताल स्टाफ उन्हें धकेलते हुए बाहर कर रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आपातकालीन स्थिति में भी चिकित्सा संस्थान पैसे को प्राथमिकता क्यों दे रहे हैं।

जिला अस्पताल में मिली राहत:
निजी हॉस्पिटल से निराश होकर परिजन घायल को लेकर तुरंत जिला अस्पताल (District Hospital) पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बिना देर किए प्राथमिक उपचार शुरू किया। मरीज की हालत गंभीर होने के कारण जिला अस्पताल से उसे जेएन मेडिकल कॉलेज (J.N. Medical College) रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार ज़हरीला पदार्थ अधिक मात्रा में ग्रहण किए जाने से समय पर उपचार न मिलना मरीज की हालत खराब होने का बड़ा कारण बना।

पारिवारिक क्लेश में खाया जहर:
जानकारी के अनुसार व्यक्ति ने पारिवारिक विवाद के चलते जहर खाया था। अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे तुरंत नजदीकी निजी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें मदद के बजाय केवल निराशा मिली। घटना के बाद परिजन बेहद आक्रोशित हैं और पूरे प्रकरण की जांच की मांग कर रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल:
यह मामला एक बार फिर निजी चिकित्सा संस्थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आपातकालीन स्थिति में भी उपचार के बदले पैसों की मांग न सिर्फ नैतिकता के विपरीत है, बल्कि मानवता के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर इलाज मिलता, तो मरीज की हालत इतनी गंभीर न होती।

Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com



#aligarh #hospital #negligence #patient

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading