रिपोर्ट: सऊद अंसारी
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने नोटबंदी (Note Bandi) की वर्षगांठ पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐसा “घाव” थी, जिसका दर्द आज भी किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को महसूस हो रहा है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि भारत ने भीतर ही भीतर अमेरिका (America) से हाथ मिला लिया है और आने वाले दिनों में इसका असर आम जनता पर दिखाई देगा।
गरीबों की आय में नहीं हुआ सुधार:
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर सरकार का वास्तविक योगदान होता, तो गरीब और मध्यम वर्ग की आमदनी बढ़ी होती। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश की जीडीपी (GDP) बढ़ने का दावा किया जा रहा है, तो फिर गरीबों की थाली खाली क्यों है? उन्होंने कहा, “महंगाई चरम पर है, किसान खाद और बीज के लिए परेशान हैं, जबकि सरकार विज्ञापन और प्रचार में व्यस्त है।” यादव ने कहा कि नोटबंदी के बाद से आज तक किसान की स्थिति सुधरी नहीं, बल्कि बदतर हो गई है।
सरकार की नीतियों से सोना महंगा:
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा (BJP) की नीतियों का सीधा असर सोने (Gold) की कीमतों पर पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि “बीजेपी सोना जमा कर रही है, इसलिए कीमतें बढ़ती जा रही हैं।” अखिलेश ने कहा कि आज आम और गरीब आदमी सोना खरीदने में असमर्थ है, जबकि अमीर वर्ग अपनी संपत्ति को और बढ़ा रहा है। यह नीति गरीब और अमीर के बीच की खाई को और चौड़ा कर रही है।
खजांची के जन्मदिन पर दी मिसाल:
नोटबंदी के समय जन्मे खजांची का जन्मदिन मनाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि “खजांची उस पीढ़ी का प्रतीक है, जिसने सरकार की गलत नीतियों के बीच आंखें खोलीं।” उन्होंने याद दिलाया कि नोटबंदी के दौरान बैंक की लंबी लाइन में खड़ी एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया था और वह बच्चा अब देश की आर्थिक सच्चाई का प्रतीक बन गया है। अखिलेश ने कहा कि “खजांची की कहानी यह बताती है कि नोटबंदी ने आम आदमी की जिंदगी को कितना प्रभावित किया।”
अयोध्या के DIOS पर हाई कोर्ट की सख्ती:
इसी बीच अयोध्या (Ayodhya) से जुड़ी एक और खबर सामने आई है। हाई कोर्ट (High Court) ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के खिलाफ लापरवाही और नियमों की अनदेखी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है और कहा है कि अनियमितताओं और मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कदम शिक्षा विभाग में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अखिलेश यादव के बयानों से एक बार फिर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर बहस तेज हो गई है। भाजपा जहां नोटबंदी को “काले धन पर वार” बताती है, वहीं विपक्ष इसे “गरीबों पर आर्थिक प्रहार” मानता है। अखिलेश द्वारा खजांची का जन्मदिन मनाना इस बात का संकेत है कि विपक्ष अभी भी नोटबंदी को देश की सबसे बड़ी आर्थिक भूल मानता है।
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवाददाता, मीडिया प्लेटफार्म या अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।