क्या मायावती समझ गयीं खेल? ख़त्म हुआ आकाश का “आनंद”!

सियासत और सियासत को जिन्दा रखने की रणनीति. शायद ये समझना आमजन की बात नहीं. सीतापुर में भड़काऊ भाषण देना बसपा के नेशनल कोआर्डिटनेटर और बसपा सुप्रीमो मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद पर भारी पड़ गया। मायावती ने मंगलवार देर रात उन्हें दोनों अहम जिम्मेदारियों से अलग कर दिया। उन्होंने अपने इस फैसले को कुर्बानी का रूप देकर यह संदेश भी दिया कि बसपा अपने मूवमेंट से किसी भी कीमत पर नहीं डिगेगी।

बता दें कि आकाश आनंद को बीते वर्ष दिसंबर में लखनऊ में हुए पदाधिकारियों के सम्मेलन में मायावती ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। हालांकि उन्होंने आकाश को यूपी और उत्तराखंड से दूर रखने का निर्णय भी लिया था। इसके बावजूद लोकसभा चुनाव आने पर आकाश आनंद ने बसपा की जनसभाओं की शुरुआत नगीना से की। जानकारों की मानें तो इस जनसभा में उन्होंने आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष एवं नगीना के प्रत्याशी चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण पर सीधा हमला बोला, जो कि बसपा नेतृत्व को रास नहीं आया। आकाश आनंद के इस रुख का सियासी फायदा चंद्रशेखर को मिलने की संभावना जताई जाने लगी। इसके बाद उन्होंने सीतापुर में दिए अपने भड़काऊ भाषण से पार्टी नेतृत्व को नाराज करने मे कोई कसर बाकी नहीं रखी। दरअसल, उनके भाषण की वजह से बसपा के जिलाध्यक्ष विकास राजवंशी, लखीमपुर के प्रत्याशी अंशय कालरा, धौरहरा के प्रत्याशी श्याम किशोर अवस्थी, सीतापुर के प्रत्याशी महेंद्र सिंह यादव पर भी मुकदमा हो गया। यह आकाश आनंद पर भारी पड़ गया और माायवती ने बिना कोई मुरव्वत किए उन्हें सारी जिम्मेदारियों से हटा दिया।

क्या आकाश की जल्दबाजी ने तस्वीर साफ़ कर दी?

आकाश आनंद को लेकर दो तरह की बातें हैं पहली चर्चा ये है कि आकाश आनंद पार्टी में एक नए ध्रुव के तौर पर उभर रहे थे, जिससे कई बड़े नेता असहज थे, जिस तरीके से आकाश आनंद की पब्लिक रैलियों की डिमांड बढ़ने लगी थी उससे कई बड़े नेताओं में असुरक्षा की भावना भी घर कर रही थी. चर्चा यह भी है कि आकाश आनंद की रैलियां, मायावती की रैलियों से ज्यादा डिमांड में थीं और वह मायावती की रैलियों को ओवरशैडो कर रहे थे, जिससे मायावती के करीबी नेताओं का एक वर्ग नाराज था और इसकी शिकायत लगातार मायावती से कर रहा था.

और दूसरी चर्चा आकाश को मिले Y+ सुरक्षा और बसपा के टिकट बटवारे को लेकर है. बसपा भाजपा का विरोध तो कर रही है लेकिन भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए बनाये गये इंडिया गठबंधन में शामिल नहीं है तो क्या बसपा ऐसी स्थिति में है कि वो अकेले दम पर केंद्र की सत्ता में आ सके? वहीँ बसपा के टिकट बटवारे को लेकर भी चर्चा हैं. ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है जो चुनावी समीकरण को बदल सकते हैं और जो नहीं बदल सकते, उन उम्मीदवारों को ही बदल दिया गया. इन सबके पहले आकाश आनंद Y+ सुरक्षा मिलना भी चर्चाओं में रहा.

क्या है Y+ सुरक्षा के मायने?

1 मार्च की बात है, खबर आई कि मायावती के भतीजे आकाश आनंद को Y कैटेगिरी की सुरक्षा दी गई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ये फैसला लिया है. 28 वर्षीय आकाश को मायावती ने पिछले साल दिसंबर में अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था. दरअसल, आकाश आनंद मायावती के छोटे आनंद कुमार के बेटे हैं. उन्होंने लंदन के नामी कॉलेज से MBA करने के बाद 2017 में राजनीति में एंट्री ली थी.

मायावती ने आकाश आनंद को 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के पहले जनता के सामने पेश किया था. इसके बाद से ही आकाश प्रदेश की राजनीति में काफी एक्टिव नजर आते रहे हैं. वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई दफे सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना भी साधते दिखे. बसपा ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश को स्टार प्रचारक की लिस्ट में भी शामिल किया था. बता दें कि Y कैटेगिरी की सुरक्षा कम खतरे वाले लोगों को दी जाती है. इसमें कुल 8 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं. इस कैटेगिरी के तहत जिस वीआईपी को सुरक्षा दी जाती है, उसके साथ पांच आर्म्ड स्टैटिक गार्ड उसके घर पर लगाए जाते हैं. साथ ही तीन शिफ्ट में तीन पीएसओ सुरक्षा प्रदान करते हैं.

चर्चाओं का बाज़ार गर्म !

आकाश आनंद ऐसे मौके पर मैदान से बहार हुए जब उनकी कुछ बड़ी रैलियां होनी थी. उनके पहले ही उनपर आचार संहिता का मुकदमा दर्ज होता है, मायावती जिम्मेदारियों से मुक्त करती हैं और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो जाती हैं.

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading