अब अफजाल अंसारी पर कैमरे से निगरानी !

राजनीति, इसके रंग भी कई हैं और रूप भी. रंग बदलती राजनीति ने 75 सालों में कई नयी कहानियाँ सुनाई! पीढियां बदलती गयीं और कहानियां भी.
हर पीढ़ी में नौजवानों को उनके बुजुर्गों ने नयी कहानियां सुनाई. राजनीति का समाज पर एक गहरा असर होता है और यहीं राजनीति अपने स्वार्थ में कहानियों को
भी बदलती रहती है. तो क्या पता आपने जो कहानी सुनी उसमे कितना सत्य था?

खैर ये कहानी एक ऐसे नेता की है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वो राजनीति का चाणक्य है. जिसका असर पूर्वांचल के अधिकांश विधानसभा और लोकसभा सीटों पर
रहता है. कहा ये भी जाता है कि शायद इसीलिए कई राजनीति दलों को इसी वजह से कई नयी रणनीति बनानी पड़ती है. जी हाँ हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के गाजीपुर
लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद अफजाल अंसारी की. नाम तो सुना ही होगा आपने. इनके भाई को आज कल माफिया मुख्तार अंसारी कहा जाता है. बड़ा भतीजा मोहम्दाबाद
विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. छोटा भतीजा भी मऊ से विधायक है, लेकिन अभी जेल है. अफजाल अंसारी कैसे अचानक वर्तमान से पूर्व सांसद हो गये. उनके समर्थक इस बात को
अभी तक समझ नहीं पा रहे.

90 के दशक की राजनीति की कई ऐसी कहानियां जिसने कटु सत्य को बयाँ भी किया और कुछ कहानियों को बनाया भी गया. अफजाल अंसारी के दादा स्वतंत्रता सेनानी थे, नाना
भारतीय सेना में ब्रिगेडियर थे, चाचा देश के उप राष्ट्रपति थे. आखिर फिर क्यों अंसारी परिवार पर माफिया नाम का कला धब्बा लगा? अफजाल अंसारी तीन भाई हैं. तीनों भाइयों ने
राजनीति में खूब नाम कमाया. कई बार विधायक बने, अफजाल खुद कई बार विधायक बने और सांसद भी. अंसारी परिवार पर क्राइम का धब्बा, वाकई में क्रिमिनल मानसिकता का
प्रतिरूप है या राजनीती का अभिशाप? खैर इसपर चर्चा लम्बी हो सकती है लेकिन ये सत्य है कि अंसारी परिवार पर जनता का अटूट विश्वास रहा, शायद इसीलिए वो लगातार राजनीति
में काबिज रहे.

लेकिन अब अंसारी बंधुओं पर मुसीबत के काले बदल मंडरा रहे हैं. अब ये कृतिम बादल हैं या प्राकृतिक इसके बारे कहना थोड़ा मुश्किल होगा. ख़बरों के अनुसार इसके पहले भी जब अफजाल
अंसारी को सांसद बनने का मौका मिला था तो उन्हें जेल जाना पड़ा था. अब एक फिर संसदीय कार्यकाल समाप्त होने के ठीक एक साल पहले उन्हें जेल जाना पड़ा. सवाल कई थे लेकिन फैसला
कोर्ट का था तो इसका जवाब भी कोर्ट से ही मिल सकता है.

ख़बरों के अनुसार गैंगस्टर के मामले में गाजीपुर की एमपीएमएलए की स्पेशल कोर्ट ने अफजाल अंसारी को चार साल की सजा सुनाई थी। इसके चलते अफजाल की संसद सदस्यता भी समाप्त हो गई है।
अफजाल अंसारी गाजीपुर से सांसद थे। लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दो साल से ऊपर सजा होने पर संसद की सदस्यता के अयोग्य हो जाता है। चार साल की सजा मिलने के बाद अफजाल की
लोकसभा की सदस्यता समाप्त हो गई थी। अफजाल ने गैंगस्टर एक्ट कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। (सोर्स : अमर उजाला)

खबरें ये भी कहती हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर मामले में गाजीपुर जिला अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए अफजाल अंसारी की अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत से रिकॉर्ड तलब किया है।
इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से भी जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा है की अफजाल अंसारी की सजा के मामले में अगर सरकार को कुछ कहना है तो वह मामले की अगली सुनवाई तक
अपनी आपत्ति दाखिल कर दे। कोर्ट इस मामले में 4 जुलाई को सुनवाई करेगी। (सोर्स : अमर उजाला)

बताया जा रहा है कि ये आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्र ने अफजाल अंसारी के अधिवक्ता उपेन्द्र उपाध्याय को सुनकर दिया. अफजाल अंसारी की ओर से दाखिल अपील में मुख्य आधार यह लिया गया है कि दो बार सांसद
और पांच बार विधायक रहे अफजाल अंसारी को राजनीतिक रंजिश के कारण गैंगस्टर एक्ट के इस मुकदमे में झूठा फंसाया गया है। साथ ही कृष्णानंद राय की हत्या के जिस मुकदमे के आधार पर अफजाल अंसारी
पर वर्ष 2007 में गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज किया गया, सत्र न्यायालय ने उस हत्याकांड में अफजाल अंसारी को दोषमुक्त करार दिया है। एडवोकेट उपेंद्र उपाध्याय ने कहा कि अपील में यह भी आधार लिया गया है कि
गैंगस्टर एक्ट का यह मुकदमा वर्ष 2007 में दर्ज हुआ था और उसके बाद से अब तक अफजाल अंसारी के विरुद्ध एक भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ। यह भी कहा गया है कि गैंगस्टर एक्ट के आरोप से जुड़ी जनता की
ओर से एक भी शिकायत नहीं हुई। गैंगस्टर एक्ट का यह मुकदमा पुलिस ने दर्ज किया था। (सोर्स : हिन्दुस्तान)

अब ये बात यहीं नहीं ख़त्म होती एक तरफ जहाँ मामला कोर्ट के स्तर पर तो वहीँ पुलिस डिपार्टमेंट भी सख्ती के मूड में नज़र आ रहा है. ख़बरों के अनुसार पूर्व सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) को गाजीपुर
की जेल की बैरक नंबर-10 में रखा गया है। जेल प्रशासन अफजाल अंसारी पर जेल के बैरक नंबर-10 में भी पैनी नजर बनाए हुए है। जेल सिक्योरिटी को लेकर स्टेट हेडक्वॉर्टर से आए दिशानिर्देश के बाद जेल प्रशासन ने
अफजाल अंसारी से मिलने आने वाले मुलाकातियों से होने वाली मुलाकात के दौरान भी निगाह रखने का निर्णय लिया है।

सूत्रों की माने तो अफजाल अंसारी से मिलने आने वाले मुलाकातियों से मुलाकात के दौरान करीब 20 मीटर की दूरी पर एलआईयू (अभिसूचना इकाई) और जेल अधिकारी मौजूद रहेंगे। यह आदेश जेल प्रशासन के आला अधिकारी ने
जारी कर दिया है। इस निर्देश के अनुपालन में डीएम और एसपी ने एलआईयू और जेल अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है। इस आदेश का पालन भी शुरू कर दिया गया है। कुछ ही दिन पहले जिला जेल में अफजाल अंसारी से
मिलने आई उनकी पत्नी और बेटियों से मुलाकात के दौरान एलआईयू और जेल अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

जेल सूत्रों की मानें तो पूर्व सांसद अफजाल अंसारी से मिलने वाले लोगों की लिस्ट सबसे पहले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भेजी जाती है। इसके बाद मुलाकाती के लिए बनी पर्ची भी आनलॉइन अधिकारियों तक भेजी जाती है।
पर्ची की जांच करने के बाद एसपी के निर्देश पर एलआईयू का कोई अधिकारी जेल पहुंच जाता है और जेल अधिकारियों के साथ वह मुलाकात करने वाले व्यक्ति के आसपास ही मौजूद रहता है।

जेल सूत्रों के अनुसार प्रदेश मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद जिला जेल के बैरक नम्बर दस में सजा काट रहे अफजाल अंसारी पर बॉडी वॉर्न कैमरे से निगरानी की जा रही है। बैरक के आसपास मौजूद जेल के सुरक्षाकर्मियों के कपड़े में
यह कैमरा फिट किया गया है। पूर्वांचल के कई अतिसंवेदनशील जेलों पर मानीटरिंग करने के लिए हाईटेक कैमरे को लखनऊ में बैठे आला अधिकारियों के कार्यालयों से जोड़ा गया है।जिससे वह लखनऊ से ही बैठे जेल के भीतर की
सभी गतिविधियों पर खुद नजर रख सके। अफजाल अंसारी जिला जेल में आने के कुछ रोज बाद जेल की मानीटरिंग करने के लिए ऑनलाइन वेब स्ट्रीमिंग कैमरे लगा दिये गये। इस कैमरे का प्रसारण जेलर के कमरे में मौजूद एलईडी स्क्रीन पर भी डिस्प्ले होता है।

तो भईया ये कहानी है अफजाल अंसारी की. कितना सही कितना गलत, ये कैसे बताएं? बस जो खबरें वही आप तक पहुंचा रहे हैं. विचार आप खुद कर लीजिये. धन्यवाद

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading