रिपोर्टर: सऊद अंसारी
लखनऊ (Lucknow)। केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर किए जाने वाले मुकदमों की पैरवी के लिए तैयार की गई नई अधिवक्ता सूची में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस संशोधित सूची में फर्रूखाबाद (Farrukhabad) के अधिवक्ता मोहित मिश्र का नाम ग्रुप ‘ए’ पैनल में शामिल किया गया है। उनकी नियुक्ति तीन वर्ष की अवधि के लिए की गई है। यह आदेश भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) के न्यायिक अनुभाग द्वारा जारी किया गया है। मंत्रालय ने पहले से कार्यरत पैनल अधिवक्ताओं की सूची में संशोधन करते हुए नए और अपडेटेड नाम दर्ज किए हैं। कई पुराने नाम हटाए गए हैं और चयनित अधिवक्ताओं की सूची को पुनर्गठित किया गया है। मोहित मिश्र ने अपनी विधिक शिक्षा लखनऊ यूनिवर्सिटी (Lucknow University) से एलएलबी और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी रायपुर (NLU Raipur) से एलएलएम कर पूरी की है।
सुप्रीम कोर्ट में करेंगे केंद्र की ओर से पैरवी:
नई नियुक्ति के अनुसार अब मोहित मिश्र भारत सरकार के मुकदमों की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में करेंगे। वर्तमान में वे इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में वकालत कर रहे हैं और विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनके परिवार में भी कानूनी पृष्ठभूमि मजबूत है। उनकी पत्नी प्रियंका पांडे लखनऊ हाईकोर्ट में अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता के रूप में सेवारत हैं। मोहित मिश्र ने कहा कि केंद्र सरकार ने जो विश्वास उन पर जताया है, उसे वे पूर्ण निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।
नियुक्ति से जुड़े पूर्व नियम रहेंगे लागू:
मोहित मिश्र की नियुक्ति के संदर्भ में मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में जारी नियम और शर्तें यथावत रहेंगी। यह नियुक्ति 24 सितंबर 1999 और 1 अक्टूबर 2015 को जारी अधिसूचनाओं में वर्णित निर्देशों के अनुसार ही प्रभावी होगी। ये अधिसूचनाएं मंत्रालय की वेबसाइट पर ‘Judicial Section’ में उपलब्ध हैं। आदेश की प्रतियां संबंधित विभागों, अधिकारियों और एजेंसियों को डिजिटल माध्यम से भेज दी गई हैं। साथ ही, इसे मंत्रालय की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है, ताकि सभी संबंधित इकाइयां इसे देख सकें।
विभागों को भेजी गई आदेश की डिजिटल प्रति:
न्यायिक अनुभाग द्वारा जारी यह आदेश इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों, सरकारी एजेंसियों और अधिकारियों को भेजा गया है। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी संबंधित कार्यालय नियुक्ति से जुड़े निर्देशों और नियमों की जानकारी समय पर प्राप्त कर सकें। इससे सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से मुकदमों की पैरवी करने वाले नए पैनल की कार्य प्रणाली और अधिक सुव्यवस्थित होगी।
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