बसपा के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट ने फर्जी कागजात के जरिये शस्त्र लाइंसेंस हासिल करने के मामले में मुख्तार अंसारी पर आरोप तय कर दिए हैं.
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मुख्तार पर पांच धाराओं में आरोप तय किया गया है. अदालत में अब जल्द ही इस मुकदमे का ट्रायल शुरू हो सकेगा. हालांकि आज की सुनवाई के दौरान मुख्तार ने खुद पर तय किये गए आरोपों से इंकार किया और अदालत से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की गुहार लगाई.
33 साल पुराना है मामला
मुख्तार अंसारी पर आरोप है कि साल 1987 में उन्होंने फर्जी कागजात और डीएम के जाली दस्तखत बनाकर गलत तरीके से बंदूक का लाइसेंस हासिल किया था. मुख्तार ने शस्त्र लाइसेंस के लिए 10 जून 1987 को आवेदन किया था. जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद मुख्तार के खिलाफ गाजीपुर के मोहम्मदाबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी. लंबे अरसे से यह मामला अलग-अलग अदालतों में लटका रहा. कुछ सालों पहले यह मामला प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट ट्रांसफर हो गया.
स्पेशल कोर्ट के जज आलोक कुमार श्रीवास्तव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई सुनवाई में मुख्तार पर आरोप तय किये. अदालत ने मुख्तार पर आईपीसी की धारा 467, 468, 420, 120 बी और एंटी करप्शन एक्ट की धारा 13 (2) के तहत आरोप तय किये. सुनवाई के दौरान स्पेशल जज ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े आरोपी मुख्तार अंसारी को पूरा फैसला पढ़कर सुनाया. मुख्तार अंसारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया और अदालत से फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की.

