गाजीपुर । उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने का असर जिले में भी पड़ सकता है। ग्लेशियर फटने के बाद बाद गंगा में बाढ़ आने की आशंका प्रबल हो गई है। ऐसे में शासन ने जिले को अलर्ट जारी किया है। शासन का पत्र मिलते ही आनन-फानन आपदा विभाग को क्रियाशील कर दिया गया। गंगा किनारे स्थापित सभी 92 बाढ़ चौकियों को पुन: सक्रिय कर दिया गया है। बाढ़ से जुड़ीं सभी टीमों को तैयार रहने को कहा गया है। रविवार होने के बाद भी आनन-फानन में आपदा विभाग खोला गया और सभी कर्मचारी काम में जुट गए।
संभावित बाढ़ को लेकर जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम राजेश कुमार ने सभी तहसीलों में उपजिलाधिकारियों को निर्देश भेजा है। उपजिलाधिकारियों को कहा गया है कि वह अपने क्षेत्र में आने वाले गंगा व अन्य बाढ़ प्रभावित नदियों के किनारे बसे गांवों का दौरा कर लें। वहां स्थापित बाढ़ चौकियों का जायजा ले लें और सभी ग्रामीणों को सजग रहने के लिए निर्देशित किया जाए।
कलेक्ट्रेट में स्थित इमरजेंसी आपरेशन सेंटर को तत्काल सक्रिय कर दिया गया। अवकाश पर गए आपदा विभाग के कर्मचारियों को वापस बुला लिया गया है। सभी कर्मचारी रविवार को भी कार्यालय पहुंचे और अपने कार्यों में जुट गए।
बाढ़ आपदा से संबंधित विभाग भी अलर्ट किए गए हैं। आपदा विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग, पशुचिकित्सा विभाग, सिचाई विभाग व राजस्व विभाग को विशेष तौर पर निर्देशित किया गया है कि वह संभावित बाढ़ से निबटने के लिए तैयार रहें। सभी संबंधित लोगों को वाट्सएप के माध्यम से संदेश भेजा गया है। निर्देश मिलते ही सभी विभाग तैयारी में जुट गए हैं।
गंगा में संभावित बाढ़ की खबर सुनने के बाद गंगा किनारे बसे गांवों के किसान भयभीत हो गए हैं। इस समय गंगा किनारे गेहूं से लेकर चना, अलसी, मसूर, प्याज, मटर, बैगन, टमाटर, मिर्च व सरसों आदि की फसल बर्बाद हो जाएगी। इससे किसानों का करोड़ों रुपये का नुकसान होगा।
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उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने के बाद शासन की ओर से गंगा में संभावित बाढ़ को देखते हुए शासन से अलर्ट रहने का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसके लिए आपदा विभाग को सक्रिय कर दिया गया है। सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि वह तैयार रहें।
– राजेश कुमार सिंह, एडीएम।

