हसीन अंसारी की रिपोर्ट
गाजीपुर : लालदरवाजा उपकेंद्र परिसर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में बिजलीकर्मियों ने बुधवार को निजीकरण के विरोध में एक दिवसीय सांकेतिक कार्य बहिष्कार किया। चेताया कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे बड़े आंदोलन को बाध्य होंगे।
समिति के जिला संयोजक निर्भय नारायण सिंह ने बताया कि सभी संविदा कर्मियों एवं निविदा कर्मियों को तेलंगाना राज्य की तरह विभाग में नियमित किया जाए। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार की निजीकरण की नीतियों के विरोध एवं बिजली कर्मियों की ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए इस सांकेतिक कार्य बहिष्कार में न केवल शामिल होने का निश्चय किया है बल्कि इस एक दिवसीय सांकेतिक कार्य बहिष्कार का नोटिस केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और प्रदेश सरकार को भी दे दिया है।
उन्होंने कहा कि बिजली के निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा, ग्रेटर नोएडा और आगरा में पूरी तरह विफल होने के बावजूद केंद्र सरकार ने बिजली के निजीकरण की दिशा में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेट) बिल 2020 एवं स्टैंडर्ड बिडिग डाक्यूमेंट जारी किया है। केंद्र सरकार के निर्देश पर केंद्र शासित प्रदेशों चंडीगढ़ और पांडिचेरी में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है जिसे लेकर देश भर के बिजलीकर्मियों में असंतोष है। सह संयोजक इंजीनियर संतोष मौर्या ने बताया कि सरकार की हठधर्मी के विरोध में प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और अभियंताओं ने एक दिवसीय सांकेतिक कार्य बहिष्कार किया जो सफल रहा। धरने में मुख्य रूप से अधिशासी अभियंता मनीष कुमार, आदित्य पांडेय, आशीष चौहान, महेंद्र मिश्रा एवं सहायक अभियंता शिवम राय, अमित कुमार, शिव शंकर, मिठाई लाल, अभिषेक राय, सत्यनारायण चौरसिया, अवर अभियंता अविनाश सिंह, तपस कुमार, रोहित कुमार, नीरज सोनी, पंकज जायसवाल एवं समस्त मीटर रीडर तथा जिले के सभी संविदा कर्मी थे।

