सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को विधायक अब्बास अंसारी को बड़ी राहत देते हुए उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट से जुड़े एक मामले में उनकी अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदल दिया। इस आदेश के साथ ही लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे अब्बास अंसारी को स्थायी राहत मिली है। अब्बास अंसारी दिवंगत गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के बेटे हैं और उनके खिलाफ दर्ज इस मामले को लेकर पहले से ही राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा चल रही थी।
क्या है पूरा मामला:
यह मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से जुड़ा है। कोतवाली कर्वी थाना (Kotwali Karvi Police Station) में 31 अगस्त, 2024 को अब्बास अंसारी सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने आरोप लगाया था कि इस मामले में जबरन वसूली और मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर अब्बास अंसारी पर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई की गई थी।
एफआईआर दर्ज होने के बाद से यह मामला अदालतों में विचाराधीन रहा। गैंगस्टर एक्ट लगाए जाने के कारण कानूनी स्थिति और गंभीर हो गई, जिससे अब्बास अंसारी की मुश्किलें बढ़ीं।
न्यायालय की बेंच और सुनवाई:
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने की। अब्बास अंसारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता निजाम पाशा ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने दलील दी कि अंतरिम जमानत की शर्तों का पालन किया गया है और मामले में नियमित जमानत दिए जाने का आधार बनता है।
बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पहले से दी गई अंतरिम जमानत के आदेश को बरकरार रखते हुए उसे नियमित जमानत में बदल दिया।
जेल से रिहाई का रास्ता साफ:
मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत के बाद अब्बास अंसारी की कासगंज जेल (Kasganj Jail) से रिहाई का रास्ता साफ हो गया था। उस समय अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले को छोड़कर उनके खिलाफ दर्ज अन्य आपराधिक मामलों में उन्हें जमानत दी जा चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उस दौरान कुछ शर्तें भी लगाई थीं। बाद में इन शर्तों में आंशिक ढील दी गई थी। इनमें यह शर्त भी शामिल थी कि वह जांच अधिकारी की अनुमति के बिना लखनऊ (Lucknow) नहीं छोड़ सकते।
अन्य मामलों में पहले ही मिल चुकी है जमानत:
अब्बास अंसारी को चार नवंबर, 2022 को अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद छह सितंबर, 2024 को उन्हें गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया। पिछले वर्ष मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए गैंगस्टर एक्ट के अलावा अन्य सभी मामलों में जमानत प्रदान कर दी थी।
हालांकि, इस बीच 18 दिसंबर, 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने इसी गैंगस्टर एक्ट मामले में उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब अंतिम रूप से राहत मिली है।
अन्य आरोपियों का भी जिक्र:
इस मामले में अब्बास अंसारी के अलावा नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान को भी आरोपी बनाया गया है। इन सभी के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग स्तरों पर जारी है।
कानूनी प्रक्रिया पर बनी नजर:
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल जमानत से संबंधित है और इससे मामले की अंतिम सुनवाई या आरोपों के निपटारे पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि कानून के तहत आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी और मामले की सुनवाई अपने निर्धारित क्रम में होगी।
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