Apna Uttar Pradesh

क्या सांसद अफजाल अंसारी की होगी गिरफ्तारी?

सुप्रीम कोर्ट में ED की ओर से दाखिल रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 51 सांसदों और 71 विधायकों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत केस दर्ज हैं। रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया है कि इनमें से कितने मौजूदा सांसद या विधायक हैं और कितने पूर्व। ख़बरों के अनुसार CBI की कोर्ट में पेश एक ऐसी ही रिपोर्ट में बताया गया है कि मौजूदा और पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ कुल 121 केस लंबित हैं। इनमें से 51 सांसद हैं। जिनमें 14 मौजूदा और 37 पूर्व संसद सदस्य हैं। 5 का निधन हो चुका है। इसके साथ ही CBI के समक्ष 112 विधानसभा सदस्यों के खिलाफ केस है। इनमें 34 मौजूदा और 78 पूर्व विधायक हैं जबकि 9 के निधन हो चुके हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 37 सांसदों के खिलाफ CBI जांच लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट में दोनों जांच एजेंसियों की दाखिल रिपोर्ट जैसे तथ्य कोर्ट में वरिष्ठ वकील विजय हंसरिया द्वारा दायर रिपोर्ट में भी हैं। हंसारिया को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया है। दरअसल, कोर्ट में भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर की है। इसमें सांसदों-विधायकों के खिलाफ मामलों में तेजी से सुनवाई की मांग की है। हंसारिया ने अपनी रिपोर्ट में सांसदों के खिलाफ मामलों की सुनवाई में अत्यधिक देरी का उल्लेख किया है। कई तो 5 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। जस्टिस यशवंत वर्मा ने अर्जी पर आदेश जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी।

इधर खबर आई की उत्तर प्रदेश में बसपा के दो सांसदों की गिरफ्तारी हो सकती है. मुख्तार अंसारी के खिलाफ मनी लांड्रिंग में ईडी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया दिया है. अब ईडी के रडार पर पूर्वांचल के दो सांसद आ गए हैं. वहीं आई कि ईडी अफजाल अंसारी को भी गिरफ्तार कर सकती है.

गाँव की सड़कों को शहर और हाईवे से जोड़ने का प्रण लेकर 190 करोड़ की लागत से 250 किलोमीटर सड़क का निर्माण करवाते करवाते गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी कितनी बार ईडी के दफ्तर में बैठाये गए, ये क्या किसी को पता है? इस मामले में अब क्या हुआ क्या किसी को पता चला? संपत्ति की कुर्की हुई, ये तो पता चला. लेकिन कैसे हुई ये क्या किसी को पता चला? ईडी को अब तक क्या मिला? ये क्या किसी को पता चला? ये पता होना चाहिए. राजनीति की रणनीति और सत्ता की लालच का जाल इतना बड़ा है कि जनता की सोच उसमे फस जाती है. उस जाल में जाति, धर्म, झूठ और लूट के इतने कीड़े होते हैं कि उनके काटने से जनता के सवाल बदल जाते हैं. इसीलिए कहते हैं कि आपका जनप्रतिनिधि कैसा है ये आपको पता होना चाहिए. तभी आपको मूलभूत सुविधाएं, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा का लाभ मिलेगा.

खैर करीब चार महीने पहले सड़क के लोकार्पण के दौरान सांसद अफजाल अंसारी ने पूर्व सांसद और केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा पर टिप्पड़ी करते हुए कहा था कि 5 वर्ष के कार्यकाल में 100 किलोमीटर तक का सड़क भी नहीं बनवा पाए। भाजपाई उनको विकास पुरुष कहते है। मैं विपक्ष का नेता हूँ. हमारी निधि को कम किया गया. विकास कार्यों में व्यवधान पैदा हुआ, लेकिन संघर्षों और प्रयासों से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए बजट लेकर आया.

खैर खबर है कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ मनी लांड्रिंग में ईडी अपना शिकंजा कसते जा रही है. मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी और साले सरजील रजा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ईडी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया दिया है. अब ईडी के रडार पर पूर्वांचल के दो सांसद आ गए हैं. दोनों सांसद बहुजन समाज पार्टी से जुड़े हुए हैं. इनमें से एक सांसद मुख्तार अंसारी के परिवार से जुड़े हुए हैं, जबकि दूसरे कभी मुख्तार के परिवार के बेहद खास हुआ करते थे.

अब्बास अंसारी और सरजील रजा से हुई पूछताछ के बाद ईडी की टीम अब दोनों सांसदों का बयान दर्ज करने की तैयारी में जुटी है. गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी अक्टूबर महीने में इडी के दफ्तर जा चुके हैं. अब तक की जांच में सामने आया है कि सांसद अफजाल अंसारी ही मुख्तार, उसके बेटों और ससुराल के लोगों के अवैध कारोबार को सियासी तौर पर संरक्षण दिलाते थे. जांच में सहयोग ना करने के आधार पर ईडी की टीम सांसद अफजाल अंसारी की गिरफ्तारी भी कर सकती है. कुछ दिनों पहले तक मुख्तार के परिवार के बेहद करीबी कहे जाने वाले घोसी सीट से बीएसपी के सांसद अतुल राय भी ईडी के निशाने पर हैं. अतुल राय सांसद चुने जाने के बाद से ही जेल में बंद हैं. ख़बरों में कहा गया है कि मुख्तार अंसारी के परिवार की कंपनी मोबाइल टावर लगाने का काम करती हैं. जबकि अतुल राय की कंपनी मोबाइल टावर में तेल सप्लाई का काम करती है. ईडी को शक है कि अतुल राय की कंपनी भी मुख्तार के परिवार की बेनामी है.

अब इस मामले में हमने सांसद अफजाल अंसारी से बात किया तो उनका कहना है कि ईडी ने जब भी बुलाया है मैं गया हूँ, मैंने जाँच में पूरा सहयोग किया है. जो प्रश्न पूछा गया उसका मैंने उत्तर दिया. अभी अक्टूबर महीने की 19 तारीख को भी ईडी ने बुलाया था तो मैं गया था. सुबह के 11 बजे से रात 12 बजे तक रहा. उन्होंने मुझसे कहा कि अब पूछने के लिए कुछ बचा नहीं है, आप जा सकते हैं, अब कुछ कंप्यूटर और लैपटॉप जो जब्त हुए हैं यदि उसमे कुछ निकलेगा तो आपको बुलाया जायेगा. मैंने कहा कि आप जब बुलायेंगें मैं आ जाऊंगा. अगस्त में ईडी जाँच करने लिए हमारे आवास पर भी आ चुकी है, उन्होंने पूरा जाँच किया, जिसमे सच सामने आया. मैंने हमेशा ही अपने चुनावी हलफनामे में अपने संपत्ति और अन्य चीजों का पूरा ब्यौरा दिया है. मेरे पास छुपाने को कुछ नहीं है. इधर पूरा ब्यौरा देने के बाद भी संपत्ति कुर्क की जा रही है. 2005 के एक मुकदमा दर्ज किया गया, उसमे सीबीआई ने क्लीन चिट दिया, तब भी उस मुक़दमे के आधार पर गैंगस्टर लगाया गया. मोहम्दाबाद के इंस्पेक्टर ने वादी बनकर मुकदमा किया. 2010 में चार्जशीट सबमिट हुई. उस समय विवेचना में अवैध संपत्ति का जिक्र नहीं था. होगा भी कैसे चुनावी हलफनामे में सब कुछ है. जिस मामले में पहले से ही चार्जशीट सबमिट है, 15 साल बाद उसी मामले में बिना न्यायलय के आदेश के उसी थाने के इंस्पेक्टर द्वारा दुबारा चार्जशीट सबमिट किया गया. मैंने 2019 में भी चुनावी हलफनामे में सबका जिक्र किया है.

उन्होंने कहा कि 2021 में गैंगस्टर एक्ट में संशोधन हुआ और संपत्ति अटैच करने का प्रावधान आया. जब भी कोई नया कानून बनता है या संसोधित होता है तो जब भी वो लागू होता है तो उसके बाद की घटनाओं में उसका इस्तेमाल होता है. पहले के मुकदमों में नहीं.

उन्होंने कहा कि गैंगस्टर एक्ट में संशोधन 2021 में हुआ और मुझपर गैंगस्टर 2007 में लगाया गया था, वो भी उस केस के आधार पर जिसमे सीबीआई ने क्लीन चिट दिया है. उस वक़्त चार्जशीट में अवैध संपत्ति का जिक्र नहीं था. लेकिन अब संपत्ति को अवैध करार दिया जा रहा है. इत्तेफाक कि बात है कि 2004 में भी मैंने मनोज सिन्हा को हराया था और 2007 में मुझ पर मुकदमा हुआ. फिर 2019 में भी जनता ने मुझ पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि मेरे पास कानून का रास्ता है और राजनतिक द्वेष में किये गए कार्रवाइयों से मेरा मनोबल कमजोर नहीं होने वाला. मैं जिन्दा रहा तो 2024 में फिर सामना होगा और जनता सब जानती है.

Leave a Reply