Special Report।। क्या आपने कहीं से लोन लिया है या कोई सामान किस्तों पर लिया है? क्या आपको भी रिकवरी एजेंट परेशान करते हैं? क्या आपको पता है कि जो आपको लोन दे रहा है वह कैसे दे रहा है? क्या आपको पता है कि लोन लेने और उसे चुकाने का नियम क्या है? क्या आपको पता है कि लोन देने वाली कंपनियां रिकवरी एजेंट को किस आधार पर रखती हैं?

अवैध कर्ज के जाल में फंसे कुछ लोगों ने अपनी आपबीती सुनाई। खबरें कहती हैं कि बीते दो साल में तत्काल ऋण देने वाले बेलगाम एप के वसूली एजेंटों ने विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित कर कई भारतीयों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया।

एक राष्ट्रीय समाचार पत्र ने लोन के जाल में फंसे दो युवकों की कहानी को गंभीरता से छापा है। आइए आपको भी बताते हैं कि वह कहानी क्या है?

केस-1 : जान-सम्मान पर भारी पड़ गया 40,000 का कर्ज

  • इंदौर : बीते माह 23 तारीख को अमित यादव (35) ने पत्नी और दो बच्चों समेत जहर पीकर आत्महत्या कर ली। और पता है आपको सुसाइड नोट में क्या लिखा था?… कि एक फकीर इंसान, जो सम्मान बचाने के लिए जान दे रहा है।

दरअसल, अमित ने पांच महीने पहले कई एप से 40,000 का कर्ज लिया था, जिसे चुका नहीं पाए। और रिकवरी एजेंटों ने उनकी जिंदगी को चुकाने लायक छोड़ा नहीं, शायद यही वजह रही होगी कि उन्होंने अपने परिवार से आत्महत्या कर लिया।

केस-2 : कर्ज चुकाने के बाद भी खत्म करनी पड़ी जिंदगी

  • तेलंगाना : 19 जुलाई को के वाई सुधाकर (33) ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
  • मौत की वजह : गोल्डन रुपी एप।
  • सुधाकर ने 5,000 का कर्ज लिया था। उसे चुका भी दिया। फिर भी रिकवरी एजेंट अज्ञात नंबर से पत्नी को लेकर अश्लील संदेश रिश्तेदारों तक भेजने लगे।
  • इनसे आजिज आकर सुधाकर ने जान दे दी।

यह दर्दनाक कहानी सिर्फ अमित और सुधाकर की ही नहीं है। दरअसल, कोरोना महामारी में काम-धंधे चौपट होने और नौकरियां छूटने पर लोगों को घर-परिवार चलाने के लिए मजबूरन कर्ज लेना पड़ा। इसी मजबूरी को चीन के जालसाजों ने धंधा बना लिया। तत्काल कर्ज देने के लिए ढेरों मोबाइल एप भारतीय बाजार में उतार दिए, जो बिना किसी खास सत्यापन के महंगे ब्याज पर लोगों को कर्ज देने लगे।

लोग कब अपने फोन के जरिये बेहद निजी और संवेदनशील जानकारियां चीनी जालसाजों से साझा कर बैठे, उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। कर्ज नहीं चुका पाने या किस्त में देरी पर ये चीनी एप ब्लैकमेल कर लोगों को प्रताड़ित करने लगे। इसकी वजह से देशभर में पिछले दो साल में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

  • फरवरी, 2021 में देश में 81 विभिन्न एप स्टोर पर 600 से 1,100 अवैध एप मौजूद थे। गूगल ने तो 2,000 से ज्यादा लोन एप को हटा दिया है।
  • 1,100 मोबाइल एप लोन, त्वरित ऋण जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • गूगल ने 2,000 से ज्यादा लोन एप हटाए जिसमे 600 एप भारत में ही संचालित।

आपके पास भी छोटे-छोटे लोन देने के लिए मैसेज या फोन आते होंगे तो सावधान हो जाइए इनके साथ अपनी किसी जानकारी को साझा ना करें। ये आपके साथ बड़ा धोखा कर सकते हैं।

बात केवल ऋण देने वाले ऐप कि नहीं है बात किस्तों पर सामान देने वाले फाइनेंस कंपनियों की भी है, बैंकों की भी है। मजबूरी में कई बार लोगों को लोन (loan) लेना पड़ता है, लेकिन कई बार ऐसी परिस्थिति बनती है कि वे किस्त नहीं चुका पाते हैं। इससे बैंकों के लोन रिकवरी एजेंट (recovery agent) उन्हें वसूली को लेकर परेशान करने लगते हैं। कई बार तो वे गाली-गलौच और हाथापाई पर उतर आते हैं।

आरबीआई ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक नोटिफिकेशन में कहा कि वह रिकवरी एजेंट्स की करतूतों से चिंतित है। रेगुलेटर एंटिटीज को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे या उनके एजेंट कर्ज की वसूली करते समय किसी तरह की डराने-धमकाने वाली हरकत न करें।

केंद्रीय बैंक का कहना है कि रिकवरी एजेंट्स को बार-बार कर्जदार को फोन नहीं करना चाहिए। लोन की रिकवरी के बारे में कर्जदारों को सुबह आठ बजे से पहले और शाम सात बजे बाद फोन नहीं किया जाना चाहिए।

रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक लोन रिकवरी एजेंट लोन की वसूली के लिए धमकी या उत्पीड़न का सहारा नहीं ले सकते हैं। इसमें मौखिक या शारीरिक दोनों तरह का उत्पीड़न शामिल है। कर्ज लेने वाले व्यक्ति को बार-बार फोन करना भी परेशान करने की श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं, लोन लेने वाले व्यक्ति के घर या वर्कप्लेस पर बिना बताए जाकर रिश्तेदारों, दोस्तों या साथी कर्मचारियों को धमकाना और परेशान करना भी उत्पीड़न है। धमकी या अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी इसे दायरे में आता है।

अगर लोन रिकवरी एजेंट आपको परेशान करता है तो आपको सबसे पहले बैंक से इसकी शिकायत करनी चाहिए। आप अपनी परिस्थितियों के बारे में बैंक को बता सकते हैं और लोन रिपेमेंट की शर्तों में बदलाव का अनुरोध कर सकते हैं। अगर बैंक 30 दिन के भीतर आपकी शिकायत का निपटारा नहीं करता है तो आप बैंकिंग ओंबड्समैन से शिकायत कर सकते हैं। साथ ही बैंकिंग रेगुलेटर आरबीआई को भी शिकायत की जा सकती है। रिजर्व बैंक उस बैंक को ऑर्डर दे सकता है और खास मामलों में जुर्माना भी लगा सकता है। अगर रिकवरी एजेंट कोई गैर-कानूनी एक्शन लेता है। यानी हाथापाई करता है या कोई चीज उठा ले जाता है तो पुलिस में शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा कर्जदार के पास लोक अदालत और कंज्यूमर कोर्ट में जाने का भी विकल्प है।

अब आप सोच रहे होंगे कि रिकवरी एजेंट ऐसा करते क्यों है? तो यह समझने की जरूरत है कि आखिर रिकवरी एजेंट को नौकरी मिलती कैसे हैं या नौकरी मिलने का आधार क्या होता है? वैसे तो रिकवरी एजेंट के लिए एक आम नौकरी की तरह हाई स्कूल पास या डिग्री और कंप्यूटर की जानकारी आमतौर पर मांगी जाती है। लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि इस नौकरी में ऐसे ही लोगों को रखा जाता है जिनका व्यवहार आक्रमक होता है। जो लोकल होते हैं और वसूली लक्ष्य पूरा करने पर एजेंट को अच्छा खासा बोनस मिलता है।

कुछ जानकारों का यह कहना है कि आमतौर पर रिकवरी एजेंट का सोशल बैकग्राउंड सामाजिक स्तर पर ठीक नहीं होता। अगर सोशल बैकग्राउंड की जांच की जाए तो गली मोहल्ले में आमतौर पर लड़ाई झगड़ा करने और गुंडागर्दी करने में इनका नाम शामिल होता है। खास तौर पर प्राइवेट फाइनेंस कंपनियां या बैंक या प्राइवेट एजेंसीज ऐसे ही लोगों को रिकवरी एजेंट बनाती हैं जो स्थानीय होते हैं और मारपीट करने और झगड़ा करने में आगे होते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अगर इनका पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाए तो इनमें से कईयों के ऊपर मुकदमे भी मिल जाएंगे।

अब कुछ लोग कहेंगे कि जब चुकाने की ताकत नहीं है तो लोन लेते ही क्यों है? इस बात को समझने की जरूरत है हमारे यहां कानून व्यवस्था है और हर चीज नियम और कानून के तहत होता है। लोन लेना और उसे चुकाने का भी एक नियम है और किसी कारणवश यदि समय पर नहीं चुका पाता है तो उसका भी एक नियम है और अच्छे व्यवहार और कानून के जरिए लोन की रिकवरी भी आराम से हो जाती है। लेकिन फाइनेंस कंपनियां या बैंक ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोन देती हैं और उसे जल्द से जल्द रिकवरी करना चाहती हैं और इसी प्रोसेस में ग्राहक फसता जाता है जिसका फायदा फाइनेंस कंपनियों को होता है वह अलग-अलग चार लगाती हैं और ब्याज दरों को भी बढ़ा देती हैं।

ग्राहक कोशिश करें कि लोन या किस्तों पर कोई सामान सरकारी बैंक से ही ले या कोशिश करें की लोन न लें। अपनी इच्छाओं पर अंकुश लगाएं और मेहनत और वैध तरीके से कमाए गए पैसे को इकट्ठा करके ही अपनी इच्छाओं को पूरा करें।

खबर के अनुसार दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, पहले निवेश एप घोटाला सामने आया था। अब लोगों से ज्यादा उगाही के लिए तत्काल ऋण एप का इस्तेमाल हो रहा है। हाल ही में पुलिस ने एक ऋण एप के खिलाफ मिली 100 से ज्यादा शिकायतों के बाद किए भंडाफोड़ में 23 लोगों को गिरफ्तार किया।

तो यदि आपको रिकवरी एजेंट परेशान करें तो पहले संबंधित बैंक या फाइनेंस कंपनी में उसकी शिकायत करें। उसका वीडियो बना ले और उसके कॉल को भी रिकॉर्ड करें। उसका नाम उसका कांटेक्ट नंबर सुरक्षित रखें। यदि बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी शिकायत पर कार्य नहीं करता है तो कंज्यूमर फोरम या पुलिस का सहारा लें। तत्काल एफ आई आर दर्ज करवाएं। और इसकी जानकारी मीडिया को देना बिल्कुल ना भूलें।

सबसे महत्वपूर्ण बात किसी अनजान आपसे ना लोन लें और ना अपनी जानकारी साझा करें। एक्सपर्ट से राय लेना बिल्कुल ना भूलें।

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