धर्म पर राजनीति करने की चर्चाएं खूब होती रहती है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है की आम जनमानस धर्म के प्रति इतना गंभीर क्यों है और शायद यही कारण है की धर्म पर की गई राजनीति सफल हो जाती है? खबरों के अनुसार एक रिपोर्ट कहती है कि भारतीयों का धर्म से अटूट लगाव है।

यही कारण है कि भारतीय परिवारों ने साल 2021-22 में 23.7 हजार करोड़ रुपये दान देने में खर्च किए हैं। एक निजी यूनिवर्सिटी के अध्ययन में यह रोचक खुलासा भी हुआ है कि भारतीय सबसे अधिक दान धार्मिक संस्थानों को देते हैं। इस मामले में दूसरा नंबर भिखारियों का है।

दान देने में भारतीयों को सबसे ज्यादा प्रेरणा उनकी धार्मिक आस्था से मिलती है, उसके बाद आता है आर्थिक संकट में फंसे किसी शख्स की मदद करने की प्रेरणा और उसके बाद पारिवारिक परंपरा। अध्ययन के अनुसार औसत दान राशि में पहला स्थान दक्षिण भारत और दूसरा पश्चिम भारत का है। हालांकि दान की संख्या के मामले में पूर्वी और उत्तरी भारत भी आगे हैं।

परिवार और मित्रों को दी नौ फीसदी राशि
रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक संगठनों को दान की गई कुल नकद रकम लगभग 16.6 हजार करोड़ रुपये रही, जो कुल दान राशि का 70 फीसदी है। इसके बाद कुल दान में भिखारियों का हिस्सा है जो 12 फीसदी या 2.9 हजार करोड़ रुपये रहा। परिवार और मित्रों को 9 फीसदी (2 हजार करोड़ रुपये), गैर धार्मिक संस्थाओं को 5 फीसदी (1.1 हजार करोड़ रुपये) और घरेलू कर्मचारियों को 4 फीसदी (1 हजार करोड़ रुपये) दान मिला।

इनकी राय पर दिया दान
दान किसे देना है इसमें परिवार और दोस्तों की राय सबसे महत्वपूर्ण होती है। कुल धार्मिक दान का 27 प्रतिशत हिस्सा इस राय के आधार पर दिया गया। यह भी दिलचस्प है कि दान देने वाले परिवारों की संख्या के मामले में ग्रामीण भारत शहरी भारत से आगे रहा है। इस सर्वेक्षण में स्वत: अपने मन से दान की बड़ी घटनाओं की बात सामने नहीं आई है।

बड़ा दान ‘अपनों’ को
ज्यादा राशि का दान, जिसमें 10 हजार रुपये से ऊपर, 5 से 10 हजार रुपये के बीच और 1001 से 5000 रुपये के बीच की राशि शामिल है, ज्यादातर परिवार, दोस्तों और घरेलू कर्मचारियों को दिया गया। सबसे कम नकद दान (100 रुपय या कम) भिखारियों के हिस्से है। धार्मिक और गैर धार्मिक संस्थाओं की स्थिति इस मामले में भिखारियों से कुछ बेहतर रही जिन्हें 101 रुपये से लेकर 300 रुपये और 301 रुपये से लेकर 500 रुपये तक का दान मिला। धार्मिक संगठनों को मिलने वाले दान में स्थिति और त्योहारों का असर पड़ता है।

81 हजार लोगों पर अध्ययन
ये अध्ययन अशोका यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सोशल इंपैक्ट एंड फिलैन्थ्रॉपी और वर्ल्ड पैनल डिवीजन ऑफ कांतार ने हाऊ इंडिया गिव्स, 2020-21 शीर्षक से प्रकाशित की है। इसमें 18 प्रदेशों के 81 हजार लोगों को शामिल किया गया।

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