वाराणसी। घोसी सीट से बहुजन समाज पार्टी के सांसद अतुल कुमार सिंह उर्फ अतुल राय एक बार फिर चर्चा में है। प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में बंद अतुल राय पर दुष्कर्म पीड़िता व गवाह साथी को आत्महत्या को उकसाने मामले में मुकदमा दर्ज है। गुरुवार को वाराणसी कोर्ट में पेशी के दौरान बेहोश हुए अतुल राय का संसदीय कार्यकाल आधा से ज्यादा जेल में ही बीता। बसपा के टिकट पर 2019 लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद से ही अतुल राय जेल में निरुद्ध है।

यही नहीं, निर्वाचित होने के छह महीने बाद अतुल राय ने जेल में रहते हुए 31 जनवरी 2020 को पैरोल पर लोकसभा सदस्य के रूप में सदस्यता ग्रहण की थी। कभी मुख्तार के खासमखास रहे अतुल राय के ऊपर वाराणसी समेत पूर्वांचल के अन्य जिलों के थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। मंडुवाडीह थाने के हिस्ट्रीशीटर में आज भी अतुल राय का नाम दर्ज है।

लोकसभा चुनाव को लेकर जब अतुल राय ने नामांकन किया तभी बलिया की रहने वाली यूपी कॉलेज की पूर्व छात्रा ने अतुल राय पर चितईपुर स्थित फ्लैट पर ले जाकर
दुष्कर्म का आरोप लगाया। एक मई 2019 को वाराणसी के लंका थाने में पीड़िता ने दुष्कर्म सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर अतुल राय ने डेढ़ माह बाद 22 जून को वाराणसी कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। कुछ दिन चौकाघाट जिला जेल में रहने के बाद उसे प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल ट्रांसफर कर दिया गया, तब से अब तक अतुल राय सेंट्रल जेल में ही बंद है।

यूपी कॉलेज की पूर्व छात्रा और गाजीपुर के रहने वाले उसके गवाह साथी ने 16 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट के बाहर आत्मदाह कर लिया था। आत्मदाह का गवाह साथी ने फेसबुक पर लाइव वीडियो शेयर किया था और वाराणसी के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाया था। इस मामले में शासन स्तर से लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हुई थी। इस घटना के बाद तत्कालीन सीओ भेलूपुर अमरेश सिंह बघेल को वाराणसी पुलिस ने बाराबंकी से गिरफ्तार किया था, बाद में शासन ने अमरेश सिंह बघेल को सेवा से बर्खास्त भी कर दिया था।

हालांकि विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए सियाराम चौरसिया की कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में छह अगस्त 2022 को बरी कर दिया। यूपी कॉलेज की पूर्व छात्रा की ओर से लगाए गए आरोपों पर कोर्ट ने 101 पेज के आदेश में कहा था कि पीड़िता ने जो साक्ष्य और सबूत दिए हैं और जो बात कहीं, वह विश्वसनीय नहीं है। विवेचना, परिस्थितियों और साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए सांसद अतुल को दोषमुक्त किया जाना न्यायसंगत है। हालांकि पीड़िता को आत्महत्या को उकसाने और अन्य मामले में अभी अतुल राय को कोर्ट से राहत नहीं मिली है।

लेकिन एक दूसरे मामले में अतुल राय को राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए सियाराम चौरसिया की अदालत ने रोहनिया थाने के गैंगेस्टर के मामले में घोसी से बसपा सांसद अतुल राय व इशूपुर बड़ागांव निवासी राहुल सिंह को बरी कर दिया। साथ ही अदालत ने तत्कालीन
थानाध्यक्ष रोहनिया सीताराम चौधरी, तत्कालीन थानाध्यक्ष जंसा रमेश प्रसाद द्वारा लापरवाही पूर्ण विवेचना पर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए एक प्रति प्रमुख सचिव गृह
को भेजने का निर्देश दिया है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुज यादव, दिलीप श्रीवास्तव, मनीष रॉय के अनुसार तत्कालीन रोहनिया थानाध्यक्ष सीताराम चौधरी 2009 को घोसी सांसद अतुल राय व राहुल सिंह के खिलाफ रोहनिया थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

अदालत में दलील दी गई कि गैंगस्टर एक्ट के मामले में जिलाधिकारी की संतुष्टि आवश्यक है। जबकि तत्कालीन रोहनिया थानाध्यक्ष ने अदालत में आरोपपत्र भेजने से पूर्व जिलाधिकारी की संस्तुति नहीं ली। साथ ही गैंग चार्ट में जिन मुकदमों का जिक्र किया गया है उसमें अधिकतर मामलों में बरी हो चुके हैं।

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