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Special Report ।। आपने 5 रुपए वाला चिप्स का पैकेट तो खरीदा ही होगा, पैकेट जितना भरा भरा सा लगता है उससे यही प्रतीत होता है कि 5 रुपए में कितना ज्यादा चिप्स मिल रहा है लेकिन जब उस पैकेट को खोलते हैं तो उसमें चिप्स कम और हवा ज्यादा रहता है कुछ ऐसा ही हाल वाराणसी का है 2013 में प्रांजल यादव ने जितना विकास नहीं किया होगा उससे ना जाने कितने गुना ज्यादा विकास वाराणसी में हो गया है ऐसा दावा किया जा रहा है लेकिन तस्वीरें तो यही बताती है कि वाराणसी का हाल ₹5 की चिप्स के पैकेट जैसा है विकास के नाम पर दिखाने को कुछ चंद चीजें हैं और बाकी सब हवा है।

अब आप कहेंगे कि मैं यह क्या कह रहा हूं तो साहब यह मैं नहीं कह रहा हूं यह वाराणसी की यह तस्वीरें बोल रही हैं। हमारे सहयोगी विश्वजीत ने बताया कि वाराणसी के पड़ाव क्षेत्र अंतर्गत नई बस्ती जलीलपुर गांव कुछ वर्ष पूर्व राष्ट्रपति द्वारा निर्मल और स्वच्छता के मामले में सम्मानित किया जा चुका है। बावजूद इसके यहां की स्थिति फिलहाल काफी नारकीय है जिसकी सुध लेने वाला ना कोई राजनेता, ना कोई अधिकारी है। जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार यह मामला पत्रक और समय-समय पर धरना प्रदर्शन के माध्यम से शासन प्रशासन के सभी महकमे में संज्ञान के रूप में दिया गया। परन्तु आज तक इस समस्या का निदान नहीं हुआ। वर्ष 2014 के पहले से ऐसी समस्या है, सत्ता में आने से पहले जिला पंचायत सदस्य, सांसद और विधायक समेत अन्य अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों द्वारा कई प्रलोभन दिए गए, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन महत्वपूर्ण था। वर्तमान में सरकार भी लगभग 600 आबादी वाले क्षेत्र की सुध नहीं ले रही है। जबकि 2019 में ग्राम वासियों द्वारा लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने पर वर्तमान सरकार ने कच्चा नाला बनाने का काम शुरू किया था जो चुनाव परिणाम बाद ही गड्ढे खोदकर काम बंद करा दिया गया। वर्तमान में क्षेत्र का कूड़ा-कचरा गंदगी हीं राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित जलीलपुर गांव की पहचान है। सफाईकर्मी खुद को असमर्थ दिखाते हुए मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं क्योंकि उनके ऊपर किसी उच्चाधिकारी या जनप्रतिनिधियों का कोई दबाव नहीं है। स्थानीय निवासी संजय देववंशी ने बताया कि तकरीबन 600 आबादी के क्षेत्र में लोग रहते हैं, अगर ऐसे ही चलता रहा तो लगभग 600 आबादी जलीलपुर गांव छोड़कर पलायन के लिए मजबूर होगी। कुछ लोग तो अब तक अपनी संपत्ति बेचकर यहां से जा भी चुके हैं। साथ ही कई मकानों में ताला लटका हुआ है।

बात केवल वाराणसी कि नहीं है वाराणसी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है बात और उसकी जनपद की करले यानी गाजीपुर की तो यहां की भी स्थिति न रखी है यहां रिहायशी कालोनियों में जल निकासी की समस्या का कोई समाधान नहीं है। टूटी-फूटी सड़कों का जलजमाव के कारण और भी स्थिति पूरी हो चुकी है। ना कोई संज्ञान लेता है ना ही पानी निकालने के लिए कोई उचित व्यवस्था की जाती है। जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र के रौजा में आवास विकास और चंदन नगर जैसी कई कालोनियां है जहां गलियों में पानी भरा हुआ है, लोगों के घर में पानी घुस जा रहा है, आने जाने के लिए जो सड़क है वह टूटी फूटी है और जलजमाव की वजह से स्थिति और दयनीय हो गई है, बीमारी का खतरा बढ़ा हुआ है, गंदगी का अंबार है।

जब इन समस्याओं को लेकर क्षेत्र के विधायक डॉ वीरेंद्र यादव से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि सरकार हमारे साथ सौतेला व्यवहार करती है हम लोग समाजवादी पार्टी के विधायक हैं और सूबे में भाजपा की सरकार है।

अब इन समस्याओं का समाधान तो जनप्रतिनिधि और सरकार ही निकाल सकते हैं लेकिन कैसे यह तो अब उन्हें सोचना होगा। पूर्वांचल में बारिश कम होने की वजह से सूखे की स्थिति है इस बीच बाढ़ से आम जनमानस को बहुत नुकसान हुआ। गाजीपुर में नाव हादसा भी हो गया और 7 लोगों की मृत्यु भी हो गई। लेकिन बाढ़ वाली समस्या का समाधान भाजपा एमएलसी विशाल सिंह चंचल ने खूब बताया। उन्होंने कहा कि गाजीपुर में जब सीएम योगी के कदम पड़े तो गंगा जी वापस लौट गई यानी बाढ़ खत्म हो गया।

अब बाढ़ की समस्या हो या जल निकासी की समस्या या टूटी-फूटी सड़कों की समस्या, इन समस्याओं का समाधान तो जनप्रतिनिधियों को ही निकालना है अब समाधान निकालने का तरीका उनका कैसा है यह तो वही बताते हैं और अगर इस तरीके से समाधान निकल जाता है और जनता संतुष्ट है तो भैया फिर बजाओ ताली।

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