अभिनेन्द्र की कलम से……..

6 सितम्बर 2022, दिन मंगलवार. उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के जिला न्यायालय परिसर में करीब 12 से 15 पुलिसकर्मियों से घिरे एक व्यक्ति का प्रवेश होता है. इस व्यक्ति चेहरा काले कपड़े से ढका था, आँखें दिख रही थी आँखों पर चश्मा था. लेकिन कोई कुछ समझ पाता पुलिसकर्मी उस व्यक्ति लेकर कोर्ट परिसर में प्रवेश कर जाते हैं. मीडिया कर्मी भी इस गति को देखकर आपस में भुनभुनाते हैं. लेकिन सवाल था कि क्या ये व्यक्ति कोई बड़ा अपराधी था? या कोई माफिया? इसका चेहरा क्यों ढका था? इतनी सुरक्षा क्यों थी? हुआ क्या था इसके साथ?

पता चला कि ये सख्स कुछ दिनों ने मोहम्दाबाद थाने में है, ना पत्नी बच्चों से मिलने दिया गया और न ही वकील से, मित्र और रिश्तेदार तो दूर की बात हैं. कुछ देर बाद ये स्पष्ट हो गया कि ये व्यक्ति यूपी के चर्चित उसरी चट्टी कांड का गवाह था. जी हाँ इनका नाम रमेश है और कोर्ट में इनके गवाही पर जिरह हो रही थी. नाम स्पष्ट हो गया था लेकिन सवाल कई थे, पर जवाब कैसे मिलता? परिस्थितियां ऐसी थी की मीडिया कर्मी उस तक पहुँच ही नहीं सकते. मामल नियम का था, मामला कानून का था, मामला कोर्ट के सम्मान का था.

लेकिन वकील लियाकत अली ने इन सवालों का जवाब दे दिया. लियाकत अली ने कहा कि उसरी चट्टी काण्ड मामले में गवाह रमेश की गवाही हुई, रमेश ने कोर्ट से अपने जान का खतरा बताया और कोर्ट ने सुरक्षा देने की बात कही. आप खुद सुनिए वकील लियाकत अली ने क्या कहा?

मुख्तार अंसारी आज करीब 58 साल के हैं और जेल में बंद हैं। भले ही उनकी छवि एक माफिया और गैंगस्टर की हो, मगर यूपी की राजनीति में उनकी एक अपनी जगह है। राज्य में जब-जब चुनाव हों और उनके नाम की चर्चा न हो, यह असंभव है। हालांकि इन्हीं मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari news) की जीवनलीला करीब 37 वर्ष की उम्र में ही खत्म हो गई होती, अगर उस दिन खुदा की उन पर इनायत न होती। उस तारीख और दिन को तो खुद मुख्तार अंसारी भी नहीं भूलेंगे, क्योंकि यही वो दिन है जब उन्हें एक नया जीवन मिला। इसी दिन मुख्तार अंसारी पर उनके जीवन का सबसे घातक और जानलेवा हमला हुआ था, यह उनकी खुशकिस्मती थी कि वह बाल-बाल बच गए क्योंकि हमलावर पूरी तैयारी से आए थे और मुख्तार की जान के प्यासे थे।

21 साल पहले यानि 15 जुलाई 2001 को उत्तर प्रदेश के अपराध के इतिहास में एक अहम दिन के तौर पर दर्ज है। साल 2001 के जुलाई महीने में पूरे यूपी में पंचायत चुनाव की सरगर्मी थी। मुख्तार अंसारी अपने उम्मीदवारों के प्रचार के लिए अपने पैतृक गांव मुहम्मदाबाद से मऊ जा रहे थे। मुहम्मदाबाद से उनका काफिला मऊ की तरफ बढ़ा ही था कि 7 किलोमीटर दूर उसरी चट्टी (Usri Chatti kand) नाम की जगह पर एक ट्रक उनके इंतजार में खड़ा था। इस ट्रक में बदमाश छिपे हुए थे। बदमाशों ने मुख्तार का काफिला नजदीक आते ही गोलीबारी शुरू कर दी। हमला इतना अचानक था कि मुख्तार और उनके सुरक्षाकर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

दरअसल उन दिनों विधायक अंसारी दिन भर प्रचार करने के बाद शाम को अपने मुहम्मदाबाद स्थित घर वापस आ जाते थे। इस बात की सटीक मुखबिरी हुई थी कि मुख्तार अंसारी रोज की तरह कब अपने विधानसभा क्षेत्र में अपने कैंडिडेट्स के प्रचार के लिए जा रहे हैं। इसी मुखबिरी के आधार पर उनके लिए पहले से जाल बिछाया गया था। उसरी चट्टी पर ट्रक और सूमो में सवार हमलावरों ने ऑटोमैटिक रायफल से अंसारी के काफिले पर हमला बोल दिया। मुख्तार और उनके बॉडीगार्ड संभल पाते तब तक एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो चुकी थी। मुख्तार के सुरक्षाकर्मियों ने मोर्चा संभाला और हमलावरों को खदेड़ने में कामयाब रहे। इस गोलीकांड में मुख्तार अंसारी और उनके सुरक्षाकर्मियों समेत 11 लोग घायल हुए। मुख्तार अंसारी को भी गोली गली, मगर वह बाल-बाल बच गए और बच गया इस काण्ड का चश्मदीद गवाह, मुख्तार अंसारी का ड्राईवर रमेश.

मुख्तार की जान लेने आए हमलावर कितनी तैयारी से थे, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि उन्होंने ट्रक के जिस तरफ से गोलियां चल रही थीं, उस ओर लोहे की मोटी चादर खड़ी कर दी थी ताकि दूसरे पक्ष से गोलियां दागी जाएं तो चादर को पार न कर पाएं। बदमाश इसी के पीछे छिपकर फायरिंग कर रहे थे। यह वो दौर था जब यूपी में गैंगस्टरों ने एके-47 जैसी ऑटोमैटिक रायफलों का इस्तेमाल करना शुरू किया था। कहा जाता है कि उसरी चट्टी कांड में भी मुख्तार अंसारी पर हमला करने आए हमलावर एके-47 से लैस थे।

मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह के बीच अदावत तो ऐतिहासिक है। मगर इस उसरी चट्टी कांड ने उसे और गाढ़ा करने का काम किया। हमले में बाल-बाल बचे मुख्तार अंसारी ने इस मामले में बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया। तत्कालीन बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय का नाम भी सामने आया। कहा जाता है कि इस हमले में बृजेश सिंह भी गोली लगी थी और तभी बृजेश सिंह के मौत की अफवाह भी उड़ गई. कहा जाता है कि सालों तक बृजेश सिंह ने अंडर ग्राउंड रहकर अपना कारोबार छिपकर संचालित किया. बृजेश सिंह पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, जब दिल्ली स्पेशल सेल ने बृजेश सिंह को भुवनेश्वर से बड़े नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया. दिल्ली स्पेशल सेल के द्वारा की गई इस गिरफ्तारी के बाद बृजेश सिंह को यूपी के वाराणसी जेल में लाया गया. लंबे समय तक विचाराधीन रहने के बाद साल 2019 से उसरी चट्टी कांड में दर्ज मुकदमे की सुनवाई में तेज आई। इस कांड के दोनों आरोपियों बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह के खिलाफ 11 जनवरी 2019 को अदालत में आरोप तय हुआ। बृजेश सिंह कई बार कोर्ट में पेश नहीं हुए, फिर सख्ती तो हुई तो उन्हें आना पड़ा। मामले में सारे सबूत उनके खिलाफ हैं।

कहते हैं समय चक्र चलता है और बदलता भी है, 4 अगस्त 2022 को खबर आई की बृजेश सिंह को जमानत मिल गई. इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र की सिंगल बेंच ने गाजीपुर के उसर चट्टी कांड में बृजेश सिंह को सशर्त जमानत मिल गई. जमानत के समर्थन में याची की ओर से कहा गया कि वह इस मामले में 2009 से जेल में बंद है. हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद गाजीपुर के इस मामले में अब तक ट्रायल शुरू नहीं हो सका है, सिर्फ एक गवाही पूरी हो पाई है. बता दें इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में बृजेश सिंह की जमानत को पहले खारिज करते हुए सुनवाई करने वाली निचली अदालत को एक साल में ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया था, लेकिन एक साल का वक्त गुजर जाने के बाद भी ट्रायल पूरा नहीं हो पाया जिस पर बृजेश सिंह की तरफ से हाई कोर्ट में जमानत पर दोबारा अर्जी डाली गई थी.

लेकिन कहते हैं न समय चक्र चलता है और बदलता भी है. 06 सितम्बर 2022 को उसरी चट्टी कांड के आरोपी बृजेश सिंह कड़ी सुरक्षा के बीच अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम /एमपी-एमएलए कोर्ट रामसुधार सिंह की अदालत में पेश हुए। इस मामले में अभियोजन की तरफ से गवाह रमेश राम की गवाही पहले ही दर्ज कराई जा चुकी है। 06 सितम्बर को रमेश राम की गवाही पर ही कोर्ट में जिरह हुई। लेकिन सरकारी वकील नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि बृजेश सिंह को पेश होने के लिए अलग से कोई आदेश नहीं दिया गया था. तो सवाल ये हैं कि बृजेश सिंह पर कई बार कोर्ट में पेश ना होने का आरोप लगता था और अब दृश्य अलग कैसे हो गया?

दरअसल 06 सितम्बर 2022 को गाजीपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट में उसरी चट्टी मामले में गवाह रमेश राम की गवाही पर जिरह हुई. जिरह में बृजेश सिंह के अलावा दुसरे आरोपी त्रिभुवन सिंह की पेशी विडियो कांफ्रेसिंग से हुई. ड्राइवर रमेश राम भी पुलिस अभीरक्षा में एमपी एमएलए कोर्ट में पेश हुआ। कोर्ट में जिरह के दौरान गवाह रमेश राम ने आरोपी के पहचानने की बात की। लेकिन सरकारी वकील के द्वारा आरोपियों के पहचानने की बात नहीं की गई। जिसके बाद पहचान के लिए एक प्रार्थना पत्र दिया गया है। फिलहाल मामले में जिरह जारी करते हुए अगली तारीख 13 सितंबर कोर्ट के द्वारा मुकर्रर की गई है।

इस मामले में मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता लियाकत अली ने मुख्य गवाह के पुलिस अभिरक्षा में हुई पेशी को लेकर कहा कि पिछली तारीख में गवाह रमेश राम ने न्यायालय से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। जिसपर न्यायालय ने रमेश राम को थाने में सुरक्षा देने का आदेश जारी किया गया था। लेकिन मोहम्मदाबाद थाने की पुलिस द्वारा बंदी की तरह व्यवहार की जा रहा था , न तो उनकी पत्नी, बच्चों और उनके अधिवक्ता से मिलने दिया जा रहा था। पेशी के दौरान न्यायालय ने गवाह रमेश राम को उनके घर पर रहने और सुरक्षा देने का आदेश दिया है और सुरक्षा की जिम्मेदारी मरदह थाने को दी गई है ।

बता दें कि बृजेश सिंह पर 41 आपराधिक मामले दर्ज थे. इनमें से 15 में बरी किया जा चुका है. सिर्फ तीन मुकदमों में विचारण चल रहा है, जिनमें से दो मुकदमों में वह जमानत पर है. सिर्फ उसर चट्टी कांड मामले में जमानत नहीं मिली थी. उसमे भी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बृजेश सिंह को दे दी है.

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यह रिपोर्ट मीडिया प्लेटफार्म पर प्रकाशित ख़बरों और वकील के बयानों पर आधारित है.

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