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यूपी के गाजीपुर जिले के अठहठा गांव के पास बुधवार शाम ग्रामीणों से भरी नाव अनियंत्रित होकर बाढ़ के पानी में डूब गई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। पांच लोग लापता हैं, नाविक की हालत गंभीर बनी हुई है। 17 लोग बचा लिए गए। हादसे के बाद से गांव में हड़कंप मचा है। लापता बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अठहठा गांव बाढ़ से घिरा है। प्रशासन ने आवागमन के लिए डीजल चलित नाव की व्यवस्था कराई थी। शाम करीब पांच बजे 24 लोग उतरौली बाजार से सामान खरीद कर नाव से घर जा रहे थे। कुछ दूरी पर अचानक स्पीड कम होने से नाव में पानी भरने लगा। इससे लोगों में अफरातफरी मच गई।

यहां पर दो गंभीर सवाल खड़े होते हैं पहला सवाल यह कि नाव की क्षमता कितनी थी? दूसरा सवाल यह कि नाव में कितने लोग सवार थे? बचाए गए लोग और लापता लोगों की संख्या को देखें तो करीब 24 लोगों का नाव में सवार होने की संभावना है। लेकिन नाविक का कुछ और ही कहना है।

नाविक राम सिंह ने कहा कि नाव पर करीब 17 से 20 लोग सवार थे। जब 17 लोगों को बचा ही लिया गया तो 5 लोग लापता हैं और दो की मौत हो गई तो यह संख्या 24 हो जाती है। नाविक ने सफाई दी कि कि नाव पर कम लोग सवार थे हर बार 30 से ज्यादा लोग सवार होते हैं। क्या नाव की क्षमता इतनी है?

नाव को डूबता देख किनारे पर ग्रामीणों की भीड़ हो गई। उन्होंने किसी तरह 19 लोगों को पानी से बाहर निकाला। उनको ट्रैक्टर ट्राली से भदौरा सीएचसी लाया गया। जहां डॉक्टरों ने अठहठा गांव के शिव शंकर उर्फ डब्लू गौड़ (40) और नगीना पासवान (50) को मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि किसी को क्या पता था कि गांव पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटने वाला है। गांव बाढ़ में घिरा था, लोग बाजार से सामान खरीदने के लिए गए थे। घर पहुंचने से पहले हादसा हो गया। 

अठहठा गांव में नाव डूबने की घटना के बाद करीब छह बजे फ्लड पीएससी की बटालियन मौके पर पहुंची। चार गोताखोर और फ्लड पीएससी की मदद से रामपुर, कल्याणुपर समेत आस-पास के गांवों में करीब ढाई घंटे तक तलाश की गई। लेकिन लापता लोगों का कोई सुराग हाथ नहीं लगा। गुरुवार सुबह से फिर तलाशी अभियान चल रहा है।

नाव अटहटा गांव के पश्चिमी हरिजन बस्ती के पास लगी हुई थी। गांव के दूसरे छोर से नाव चली। क्षमता से अधिक लोग नाव पर सवार थे। नाव के अगले हिस्से में दो वजनी व्यक्ति बैठे थे। नाविक नाव को लेकर जैसे रवाना हुआ वह अनियंत्रित होने लगा। हालांकि उस दौरान तो नाविक ने संभाल लिया।

अभी मुश्किल से 100 मीटर ही नाव आगे बढ़ी कि नाव फिर से अनियंत्रित होने लगी। इससे घबराकर आगे बैठे दोनों लोग पानी में जैसे ही कूदे, नाव में पानी भरना शुरू हो गया। देखते ही देखते उस पर सवार अन्य लोगों में भी अफरा-तफरी मच गई और जान बचाने के लिए बाढ़ में कूद पड़े। ये बात ग्रामीणों ने बताई है जो खबरों में लिखा है।

जब ग्रामीणों की नजर नाव पर पड़ी तो कोहराम मच गया। गांव के लोग किसी तरह बाढ़ के पानी में डूब रहे ग्रामीणों को बचाने में जुट गए। इधर नाव करीब 20 से 25 फीट नीचे पानी डूब गई। कड़ी मशक्कत कर ग्रामीणों ने तो 19 लोगों को बचा लिया, लेकिन पांच बच्चों का पता नहीं चल सका। 19 और 5 कितने होते हैं, 24. वहीं गंभीर रूप में तीन लोगों को गांव के लोग सीएचसी भदौरा लेकर आए, जहां दो की मौत हो गई और नाविक का उपचार चल रहा है।    

अठहठा गांव पहुंचकर क्षेत्रीय लेखपालों की टीम नाव पर सवार लोगों की सूची तैयार करने में जुटे रही। वहीं ग्रामीण दूसरे छोर पर खड़ा होकर लापता बच्चों के इंतजार में एकटक बैठे थे। इधर सीएचसी पहुंचे जिलाधिकारी एमपी सिंह और पुलिस अधीक्षक रोहन पी बोत्रे नाविक के होश में आने का इंतजार में थे ताकि घटना की पूरी जानकारी मिल सके।

गांव निवासी दयाशंकर, शिवशंकर और झटहां की एक-एक पुत्री के अलावा अनिल पासवान व कमलेश के पुत्र लापता हैं। घटना की जानकारी होते ही डीएम एमपी सिंह, पुलिस अधीक्षक रोहन पी बोत्रे, सेवराई एसडीएम राजेश प्रसाद चौरसिया, खंड विकास अधिकारी सुरेंद्र सिंह राणा के साथ रेवतीपुर और गहमर कोतवाली की पुलिस पहुंच गई थी। 

क्या वाकई निर्देश था बड़ी नाव देने का और मिली थी मझौली?

समाचार पत्र अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार बाढ़ प्रभावित अठहठा में बुधवार को नाव डूबने की घटना से सभी हतप्रभ है। करीब दो दर्जन लोगों को लेकर नाव एकाएक कैसे डूब गई, इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा सवाल नाव के आकार को लेकर उठाया जा रहा है। आखिर अठहठा जैसे टापू बने गांव को मझौली आकार की नाव क्यों दी गई। जबकि प्रशासन की तरफ से लगातार बाढ़ प्रभावित गांवों को बड़ी नाव मुहैया कराने का निर्देश दिया जा रहा है।

अठहठा के ग्राम प्रधान अशोक कुमार यादव का कहना है कि दस दिन पहले मां कामख्या स्थान पर बैठक के दौरान तहसीलदार से दो बड़ी नाव की मांग की गई थी। रात भर वहां प्रतीक्षा के बाद एक मझौली आकार की नाव मुहैया कराई गई। उन्होंने बताया कि गंगा की धार में मझौली नाव असंतुलित हो जाती है। नौली से गांव की तरफ लौटने के दौरान पानी में सांप दिखाई दिया। जिससे नाव पर सवार बच्चे और लोग इधर-उधर होने लगे। इससे नाव डगमगाने लगी और करीब 25 फीट गहरे पानी में समा गई।

वहीं समाचार पत्र में जिलाधिकारी का बयान भी है। जिलाधिकारी ने कहा कि नाव डूबने के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। नाव में 30 लोग बैठ सकते हैं इसकी तुलना में 18 से 20 लोगों के सवार होने की जानकारी मिल रही है। इसी नाव को लोग कई दिनों से प्रयोग कर रहे थे अचानक नाव के डूबने के कारणों की तलाश की जा रही है।

जाहिर सी बात है कि अभी जानकारी जुटाई जा रही है तो इस बयान को अंतिम बयान नहीं माना जा सकता। लेकिन नाभिक और जिलाधिकारी के बयान में समानता नजर आती है और ग्रामीणों के बयान से बिल्कुल भी मेल नहीं खाती है।

दो वजनी लोगों के कूदते ही डूबने लगी नाव

समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार अठहठा गांव के ग्रामीणों को एक छोर से दूसरे छोर तक आने-जाने के लिए मझली जनरेटर चालित नाव 30 अगस्त को प्रशासन ने उपलब्ध कराई थी। नाव गांव के पश्चिमी हरिजन बस्ती के पास लगी हुई थी। गांव के दूसरे छोर से नाव चली, लेकिन क्षमता से अधिक लोगों के सवार के साथ ही दो वजनी व्यक्ति नाव के अगले हिस्से पर ऐसे बैठे कि नाव के अनियंत्रित होते ही वह दोनों पानी में ज्यों ही कूदे तो नाव पानी भरने से करीब 20 से 25 फीट नीचे जा बैठी।

ग्रामीणों ने बताया कि किसी को क्या पता था कि गांव पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटने वाला है। गांव बाढ़ में घिरा था, लोग बाजार से सामान खरीदने के लिए नौली के तरफ जमानिया से लाकर लगाई गई नाव पर सवार हो गए। शाम में पुन: ग्रामीण नाव पर सवार हुए। ऐसे में दो वजनी लोग नाव के अगले हिस्से पर बैठ गए। नाविक नाव को लेकर जैसे रवाना हुआ वह अनियंत्रित होने लगा। हालांकि उस दौरान तो नाविक ने संभाल लिया। अभी मुश्किल से 100 मीटर ही नाव आगे बढ़ी कि नाव पुन: अनियंत्रित होने लगी।

इससे घबराकर आगे बैठे दोनों लोग पानी में जैसे ही कूदे, नाव में पानी भरना शुरू हो गया। देखते ही देखते उस पर सवार अन्य लोगों में भी अफरा-तफरी मच गई और जान बचाने के लिए बाढ़ में कूद पड़े। इधर जब ग्रामीणों की नजर नाव पर पड़ी तो कोहराम मच गया। गांव के लोग किसी तरह बाढ़ के पानी में डूब रहे ग्रामीणों को बचाने में जुट गए। इधर नाव करीब 20 से 25 फीट नीचे पानी डूब गई। कड़ी मशक्कत कर ग्रामीणों ने तो 19 लोगों को बचा लिया, लेकिन पांच बच्चों का पता नहीं चल सका। वहीं गंभीर रूप में तीन लोगों को गांव के लोग सीएचसी भदौरा लेकर आए, जहां दो की मौत हो गई और नाविक का उपचार चल रहा है।

वहीं इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताते हुए जिला प्रशासन को राहत और बचाव कार्य तत्परता से करने का निर्देश दिया है। वहीं राज्य मंत्री अन्नपूर्णा सिंह ने भी इस घटना पर दुख जताया है।

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