समूचे पूर्वांचल में बारिश के दगा देने से इलाके के किसान आफत में फंस गए थे। सावन माह समाप्त होने को बाद भी खेतों में रोपनी कार्य शुरू तक नहीं हुई थी। बारिश नहीं होने से खेतों में मिट्टी की परत सूखने लगी थी। थोड़ा बहुत खेतों में रोपनी करने वाले किसान फसल बचाने को जद्दोजहद कर रहें थे। मौसम की बेरुखी से खेतों में लगाए गए धान की खेती सूखने के कगार पर थी। तो अब बढ़ ने सब कुछ डुबों दिया.

जीवनदायिनी मानी जाने वाली गंगा का जलस्तर बढ़ने का सिलसिला बरकरार है। वाराणसी, चंदौली, बलिया, गाजीपुर, चंदौली में जलस्तर लाल निशान पार है तो मिर्जापुर, भदोही में चेतावनी बिंद्रु पार कर गया। बलिया में गंगा उच्चतम बाढ़ बिंदु के नजदीक पहुंच गई हैं।  पूर्वांचल के सैकड़ों गांव बाढ़ में का असर है। बाढ़ से बचने के लिए लोग खुद अपना घर उजाड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की जंग लड़ रहे हैं। गंगा का रौद्र रूप देखकर किनारे बसे लोग दहशत में जी रहे हैं। अगले 24 घंटे तक अगर गंगा का यही तेवर बना रहा तो कई और इलाके में भी पानी तबाही की कहानी लिखने लगेगा।  

वाराणसी में पानी का प्रसार शहरी आबादी व बस्तियों में होने लगा है। 15 हजार से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। गंगा के तटवर्ती इलाकों में पांच एकड़ फसलें जलमग्न हो चुकी हैं।गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान 63.105 मीटर से ऊपर बह रही हैं। रेवतीपुर ब्लॉक के आधा दर्जन गांवों के तीन संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से आवागमन बंद हो गया है।  गंगा के जलस्तर में दो सेमी प्रतिघंटे बढ़ोतरी हो रही है। चंदौली में गंगा खतरे के निशान 71.26 मीटर के ऊपर बह रही हैं।

बलिया में गंगा उच्चतम बाढ़ बिंदु के नजदीक पहुंचने की स्थिति में है। गंगा का जलस्तर वर्ष 2016 के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है। 2016 में उच्चतम बाढ़ बिंदु 60.390 मीटर था। गंगा का पानी आधा दर्जन गांवों में प्रवेश कर गया है। करीब एक दर्जन प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय के साथी ही दो इंटर कॉलेज वह एक महाविद्यालय में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। 

मिर्जापुर में छानबे, कोन, मझवां, सीटी, पड़री, सीखड़, नरायनपुर विकास खंड में गंगा के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। सड़कों पर पानी भर जाने से संपर्क टूट गया है। गांवों तक पहुंचने के लिए केवल नाव ही सहारा है। शनिवार को शाम चार बजे प्रति घंटे एक सेंटीमीटर की गति से गंगा के जलस्तर में बढ़ाव हो रहा था। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार करते हुए 78.44 मीटर पर पहुंच गया है। खतरे का निशान 77.724 मीटर है। 

भदोही में जलस्तर चेतावनी बिंदु पार कर गया। 1.2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ रहा है। चेतावनी बिंदु 80.200 मीटर पार कर जलस्तर 80.225 मीटर तक पहुंच गया है। यह खतरे के निशान 81.200 से एक मीटर नीचे है। 

वाराणसी के बाढ़ ग्रस्त इलाकों में फंसे 19 लोगों को एनडीआरएफ की टीम ने शनिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। कमांडेंट मनोज कुमार शर्मा के निर्देशन में निरीक्षक मिथिलेश की टीम ने रविदास घाट के सामने स्वामी नारायण नंद तीर्थ वेद विद्यालय में 10 बच्चों और दो शिक्षकों को रेस्क्यू करके बोट से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। 

खबर के अनुसार गाजीपुर जनपद के रेवतीपुर कामाख्या धाम मार्ग, रेवतीपुर रामपुर मार्ग, हसनपुरा रेवतीपुर मार्ग, टौगा रेवतीपुर मार्ग सहित कई संपर्क मार्ग डूब चुके हैं। गंगा किनारे से बहुत से पशुपालक अपने पशुओं को लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच रहे हैं। वहीं केले के साथ उर्दी, भतुआ, कोहड़ा व मिर्च, टमाटर के बेहन का भी व्यापक नुकसान हो रहा है। वहीं, छह सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों नसीरपुर, अठहठा, विरउपुर, हसनपुरा, कल्याणपुर उर्फ साधोपुर, रामपुर में से चार गांव अठ्हठा, नसीरपुर, विरउपुर, हसनपुरा में नाव की व्यवस्था की गई है।

गाजीपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिलाधिकारी एमपी सिंह ने रविवार को विकास खंड रेवतीपुर का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने रेवतीपुर-रामपुर मार्ग में पानी भरने के कारण आवागमन पर रोक लगाते हुए रोड बंद कराने का निर्देश दिया। साथ ही रेवतीपुर के कुछ घरों में बाढ़ का पानी आ जाने के कारण प्रभावितों को राहत-समाग्री उपलब्ध कराते हुए रात्रि में प्रकाश की व्यवस्था और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखते हुए उन्हें चारा, पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।

वहीँ ख़बरों के अनुसार गाजीपुर के सेवराई तहसील क्षेत्र के कुल 52 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। जिनमें 21 गांव गैर आबादी वाले हैं, जहां बाढ़ से आबादी प्रभावित नहीं है। वहीं 31 आबादी वाले गांव है। इसमें 18 गांव की आबादी अत्याधिक प्रभावित है। प्रशासन की तरफ से बाढ़ आपदा राहत के लिए मझौली 22 और बड़ी 16 नाव की व्यवस्था की बात कही जा रही है। जबकि इस समय तहसील क्षेत्र में एक भी गोताखोर नहीं है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि पानी से दूर रहे। विषम परिस्थितियों में प्रशासन के अधिकारियों कर्मचारियों को सूचना दें।

वहीँ बताया जा रहा कि खानपुर क्षेत्र के गौरी गौरहट, तेतारपुर, पटना और खरौना बाढ़ प्रभावित हैं। एसडीएम ने शनिवार को इन गांवों का जायजा लिया। उप जिलाधिकारी सैदपुर ओम प्रकाश गुप्त ने कहा कि प्रभावित गांव के लेखपाल राजस्व निरीक्षक ग्राम प्रधान और ग्राम स्तरीय अधिकारी सभी को टीम बनाकर लगाया गया है । बाढ़ राहत से संबंधित सभी व्यवस्थाओं की निगरानी तहसील के उच्च अधिकारी स्वयं कर रहे हैं।

मुहम्मदाबाद क्षेत्र के गौसपुर से बीरपुर तक लगभग 20 किमी क्षेत्र में गंगा किनारे के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। बच्छलकापुरा, सेमरा, शेरपुर, गौसपुर, फिरोजपुर के सिवान मे बाढ़ का पानी फैलने लगा है। जिससे गंगा तट के गांवों मे परवल, बाजरा और अरहर की खेती को नुकसान पहुंचा है। शनिवार को उपजिलाधिकारी डा. हर्षिता तिवारी व खंड विकास अधिकारी अनुराग राय ने अलग-अलग क्षेत्रों में बाढ़ का निरीक्षण किया। विधायक मन्नू अंसारी ने भी बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का जायजा लिया.

गंगा के उफान पर होने से गाजीपुर के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ अब शहरी इलाकों में भी परेशानी बढ़ने लगी है। सबसे अधिक परेशानी सेवराई, जमानिया, मुहम्मदाबाद और सैदपुर तहसील क्षेत्र में है। अब शहर में बंधवा इलाके में पानी घुस गया है। इसके अलावा कलेक्टर घाट, ददरीघाट, नवांपुरा घाट की सीढ़ियां भी डूब गई हैं। ऐसे में आस-पास मुहल्ले के लोगों में धुकधुकी बढ़ी हुई है।

सदर विधानसभा के करंडा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का शनिवार को सिंचाई मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने दौरा किया। इस दौरान नाव से लखंचनपुर सोल्हनपुर से गद्दोगाड़ा, महबलपुर से तुलसीपुर शिवपूजन बाबा धाम तक निरीक्षण किया। साथ ही कटान और बाढ़ प्रभावित लोगों की क्षतिग्रस्त फसलों और गांवों का अवलोकन किया।

देखने वाली बात ये है कि सरकार अब इस समस्या का समाधान कैसे निकलती है?

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