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Special Report || शिक्षा प्राप्त करना और शिक्षा देना ये सबका अधिकार है. वर्तमान परिस्थिति में शिक्षा को लेकर कई चुनौतिया हैं और सरकार प्रयासरत भी है. लेकिन सरकारी तनख्वा पाने वाले कर्मचारियों और अधिकारीयों की लापरवाही ऐसी है कि सरकारी महकमे में फाइलें चींटी की चाल चलती है जिसे अपने गंतव्य तक पहुंचने में कई साल लग जाते हैं ऐसे में बीते हुए सालों में उन फाइलों पर कोई निर्णय नहीं लेने की वजह से कई लोगों की जान जोखिम में डालना पड़ता है पिछले दिनों कुछ ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के शहर स्थित नूरुद्दीनपुर प्राथमिक विद्यालय में नज़र आया जहां पर 2 साल पहले विद्यालय के धवस्तीकरण की कार्रवाई पूर्ण हो चुकी है लेकिन अभी तक विद्यालय का धवस्तीकरण नहीं हुआ जिसके चलते छात्र और अध्यापक डर के साए में रहने को मजबूर रहते हैं इतना ही नहीं इस विद्यालय को प्रतिवर्ष बारिश के मौसम में पलायन का दंश भी झेलना पड़ता है।

वहीं इस मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राज से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जर्जर विद्यालयों के धवस्तीकरण की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है बहुत जल्द उन विद्यालयों का धवस्तीकरण करा दिया जाएगा ऐसे में वहां के जो भी छात्र और टीचर है उन्हें दूसरे विद्यालयों पर शिफ्ट कर उनके शिक्षा की पूरी व्यवस्था की जा रही है।

ये तो हाल शिक्षा व्यवस्था का है लेकिन समस्या यहीं नहीं ख़त्म होती. आरोप तो ये भी है कि जब कोई शिक्षक या विद्यालय सामान्य रूप से शिक्षा देने कार्य कर रहा है तो उसके साथ ब्लैकमेलिंग करके धनउगाही की जा रही है. मतलब चैन कहीं नहीं है. ये आरोप एक ऐसे व्यक्ति पर लगा है जो RTI के माध्यम से सुचना मांगता है और सुचना मिलने के बाद जब उसमे कुछ गलत नहीं निकालता तो शिक्षकों को डरता है, ब्लैकमेल करता है और धनउगाही करता है. जी हाँ ये आरोप गाजीपुर के ही मोहम्दाबाद विधानसभा के महेशपुर में स्थित मदरसा इस्लामिया के प्रबंधक मुहम्मद मक़सूद खान ने लगाया है. महेशपुर के इस मदरसे में इन्टर तक की पढाई होती है.

एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दुसरे कार्यकाल के पहले बजट में अरबी-फारसी मदरसों के लिए 479 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है और अल्पसंख्यक समुदाय छात्रवृत्ति योजना में 795 करोड़ रुपये का बजट में व्यवस्था किया है. तो वहीँ इस मदरसे पर कोई बुरी नज़र लगा कर बैठा है. सरकार मदरसों में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनान चाहती है लेकिन कोई है जो अपने लालच के लिए कानून से खेल रहा है.

बीते 6 अगस्त को इस्लामिया मदरसा के प्रबंधक मो. मक़सूद खान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक पत्र लिखा और बसपा नेता जियाउद्दीन अहमद के ऊपर आरोप लगाया की जियाउद्दीन अहमद 2002 से बार बार मदरसे के अध्यापकों के विरुद्ध जन सुचना के तहत फर्जी नियुक्ति की सुचना मांग कर प्रताड़ित करता है और मानसिक व आर्थिक क्षति पहुंचता है.

उन्होंने कहा कि मैं पहले आर्मी में था, रिटायर होने के बाद 2004 में मदरसे का प्रबंधक बना और जियाउद्दीन 2002 से ही मदरसे के अध्यापकों को परेशान करता आ रहा है, इसने कई बार समझौता भी किया है और समझौते के बाद फिर प्रताड़ित करना शुरू कर देता है, जबकि कई जाँच रिपोर्ट में हमें, शिक्षकों को और मदरसे को निर्दोष साबित किया गया है, हमने कोई गलत कार्य नहीं किया ये जाँच रिपोर्ट में आ चूका है. मैंने जियाउद्दीन के बारे में स्थानीय थाने से लेकर उच्च अधिकारीयों तक कई बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. मेरे पास जाँच रिपोर्ट, समझौतानामा, शिकायत पत्र की कॉपी भी है.

उन्होंने कहा कि मैं अपने व्यक्तिगत कार्य के लिए मोहम्दाबाद आते जाते रहता हूँ, मोहम्दाबाद उपजिलाधिकारी कार्यालय के सामने जियाउद्दीन से हमारी मुलाकात हुई. जियाउद्दीन ने मुझसे कहा कि आपके मदरसे में जो अध्यापक पढ़ाते हैं उसमे काफी फर्जी हैं. मैंने उनके शब्दों का विरोध किया और कहा कि आपको क्या मालूम, न आप मेरे गाँव के हैं, न ब्लाक के हैं और न ही विभाग के हैं. इसपर जियाउद्दीन ने मुझे धमकी दिया और कहा कि मैं तुम्हे बताऊंगा की कौन फर्जी है और कौन सही है.

उन्होंने कहा कि जियाउद्दीन ने मदरसे के कई अध्यापकों से 500 से लेकर 1500 तक की वसूली कर धन उगाही की, जिसका मैंने विरोध किया तो उसने मुझे भद्दी भद्दी माँ बहन की गाली देते हुए कहा कि तुम्हे साले जान से मरवा दूंगा. मोहम्दाबाद में आओ तुमको उठवाकर जान से मरवाकर कर लाश को लापता करवा दूंगा, जानते नहीं हो मैं बीएसपी का नेता हूँ और मोहम्दाबाद नगरपालिका का चुनाव भी लड़ा हूँ, तुम्हारे जैसे कितनों को ठीक कर ठिकाने लगा दिया.

अब सवाल ये है कि जब मक़सूद खान ने कई बार शिकायत किया तो इसपर कार्रवाई या जाँच क्यों नहीं हुई? जियाउद्दीन ने बार बार समझौता क्यों किया? क्या जियाउद्दीन का बार बार समझौता करना और फिर जन सुचना को आधार बनाना, क्या जियाउद्दीन को शक के घेरे में नहीं लाता?

बहरहाल जियाउद्दीन ने बीते 22 अगस्त को गाजीपुर जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन एडीएम गाजीपुर को सौंपा और आरोप लगाया कि मदरसे के अध्यापक मो. अकरम खान ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी प्राप्त की, साथ ही अकरम खान, मदरसा प्रबंधन कमेटी के सदस्य भी हैं और नियम के अनुसार प्रबंधन कमेटी का सदस्य अध्यापक के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है. इसके पहले जियाउद्दीन ने मदरसे के लिपिक पर आरोप लगाया था और कहा था की मदरसे में कोई लिपिक का पद नहीं है और गैरकानूनी तरीके से लिपिक और प्रबंधक ने 50 लाख से ज्यादा का गबन किया है.

इस बाबत जब इस्लामिया मदरसा के प्रबंधक मक़सूद खान से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 24 अगस्त को मैंने जियाउद्दीन की शिकायत जिलाधिकारी गाजीपुर से किया है. जिस मो. अकरम खान पर आरोप लगाया जा रहा है, वो मेरा पुत्र नहीं है, वो मदरसा कमेटी का सदस्य भी नहीं है, उसको योग्यता के आधार पर अध्यापक की नियुक्ति दी गई है. जहाँ तक रही उसके दस्तावेज की बात तो उसके सारे दस्तावेज सही है. जियाउद्दीन आर्थिक लाभ के लिए परेशान कर रहा है, उसने धमकी भी दी थी, किसी और मो. अकरम का किसी और विद्यालय के दस्तावेज को इस मो. अकरम खान का बता रहा है, जबकि मो. अकरम खान ने हमें जो दस्तावेज जमा किये हैं उसमे उसका नाम, जन्मतिथि इत्यादि सब ठीक है.

उन्होंने कहा कि जियाउद्दीन ने एक और आरोप लगाया है कि गैरकानूनी तरीके से लिपिक को रख के घपला किया गया. तो आप सुन लीजिये मदरसा में लिपिक रखने का नियम है और कोई भी संस्थान बिना लिपिक के नहीं चलती. जो पहले लिपिक थे उनके कार्य में लापरवाही थी, उन्हें तीन बार नोटिस दिया गया तो कोर्ट चले गये, मामला कोर्ट में था बाद में समझौता हुआ और हिसाब कर दिया गया और उन्होंने वीआरएस ले लिया.

उन्होंने कहा कि जियाउद्दीन 2002 से मदरसा के सदस्यों और शिक्षकों को परेशान कर रहा है, मैंने इसकी शिकायत की है और जिलाधिकारी व मुख्यमंत्री से निवेदन करता हूँ की इसके ऊपर कार्रवाई की जाये ताकि ये सभ्य लोगों को ठग न सके.

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