Special Report || हर घर तिरंगा अभियान पर आप गर्व कर सकते हैं. करना भी चाहिए. स्कूल से लेकर कॉलेज तक 15 अगस्त को लेकर जो जोश होता है वो देश भक्ति का पवित्र रूप होता है. स्वतंत्रता दिवस पर देश भक्ति गानों को सुनना उनकी तैयारी करना, स्कूल में उन गानों पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करना. घर से अपने ड्रेस पर तिरंगा लगाकर जाना. चौराहे या चट्टी वाली दूकान से दूकान से 2 रूपये का तिरंगा खरीदना, उसे अपने साइकिल या मोटरसाइकिल पर लगाना, तिरंगे वाली टोपी पहनना. पूरा वातावरण देश भक्ति के रंग में डूब जाता है. और आपको लड्डू और बुंदिया तो याद ही होगा, अरे स्कूल में जो मिलता था, आज भी मिलता है, आज भी वही जोश है, आज भी वही रंग, जनरेशन बदली लेकिन देश भक्ति वही है. फिर उनको ऐसा क्यों लगता है की आपके अन्दर से देश भक्ति ख़त्म हो रही है, उसे जगाने की जरुरत है. हाँ भाई तभी तो हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है ताकि आप जागरूक बन सके. आप अपने दिल पर हाथ रख के बताना देश भक्ति है न आपके अन्दर?

आपको पता है पीएम नरेंद्र मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव पर्व के उपलक्ष्य में 13 से 15 अगस्त तक हर-घर तिरंगा फहराने का आह्वान किया है और अमर उजाला की खबर कहती है कि इससे 750 करोड़ से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है। खबर में लिखा है कि यूपी सरकार ने 4.5 करोड़ राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें दो करोड़ ध्वज सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग से खरीदने की योजना है। इसे छोटे व मझोले उद्योग तैयार करेंगे। बाकी ढाई करोड़ ध्वज राज्य के 9300 से अधिक स्वयं सहायता समूहों, स्वयं सेवी संगठनों व निजी सिलाई केंद्रों से खरीदने की योजना है। सरकार ने प्रति झंडा 20 रुपये कीमत तय की है। इस तरह साढ़े चार करोड़ झंडे की खरीद-बिक्री पर करीब 90 करोड़ रुपये खर्च होने वाले हैं। यह पूरी रकम छोटे मझोले उद्योगों और स्वयं सहायता समूहों आदि के जेब में जाने वाली है। डाकघरों से भी तिरंगा उपलब्ध कराने की तैयारी है। लोग 25 रुपये अदाकर तिरंगा खरीद सकेंगे। ऑनलाइन भी अमेजन व फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन शाॅपिंग साइट्स से भी झंडे की खरीद की जा सकती है। प्रधानमंत्री ने देश के सभी 25 करोड़ घरों में तिरंगा फहराने का लक्ष्य तय किया है। जानकार बताते हैं कि तैयारी के लिहाज से तिरंगे की आवश्यकता इससे अधिक पड़ने वाली है।  अभियान के दौरान केवल झंडे की खरीद पर 750 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने वाले हैं। इसमें सरकारी, गैर सरकारी व कारपोरेट स्तर से खर्च होने वाली धनराशि शामिल हैं।

ये अच्छी बात है शायद अब आपको तिरंगा खरीदने की जरुरत न पड़े. अरे वैसे भी देश भक्ति तो हमारे दिलों में है, पैदा होते आती है और मरने के बाद भी विरासत में चलती है. अब आप एक काम कर सकते हैं इस स्वतंत्रता दिवस अपने क्षेत्र में एक संगठन का निर्माण करे, उसमे पैसा इकठ्ठा करे और एक एम्बुलेंस खरीदें, एम्बुलेंस खरीदने के बाद संगठन बंद न करें इसे चलने दें ताकि वो एम्बुलेंस हमेशा निःशुल्क चल सके. इस आइडिया को वायरल कर दें ताकि हर क्षेत्र में ऐसा होने लगे. शायद सरकार के पास इस काम के लिए पैसे नहीं हैं और अगर आपने ऐसा कर दिया तो किसी पिता को अपने बच्चे को खोना नहीं पड़ेगा, उसकी लाश को अपने कंधे पर रखकर 25 किलोमीटर पैदल नहीं चलना पड़ेगा.

एक परिवार के लिए अपने बच्चे को खोने से ज्यादा बड़ा दुख भला क्या हो सकता है, लेकिन वो दुख और भी बढ़ जाता है जब अपने ही बच्चे की लाश को कंधे पर ढोना पड़े. ये तस्वीरें शर्मनाक हैं. एक पिता अपने 14 साल के बच्चे की लाश को कंधे पर लादकर अस्पताल से घर लौट रहा है और पीछे पीछे बच्चे की मां बेसुध सी बस चलती जा रही है.

इंसानियत को शर्मसार करने वाले ये तस्वीरें संगम नगरी प्रयागराज की हैं. 14 साल के लड़के की मौत के बाद उसके शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली. ऐसे में मजबूर पिता को अपने कंधे पर ही बेटे के शव को 25 किलोमीटर तक ले जाना पड़ा. एसआरएन अस्पताल में पिता ने अपने बच्चे को इलाज के लिए भर्ती करवाया था, लेकिन उसकी मौत हो गयी. परिजन उसके शव को वापस घर ले जाने की तैयारी करने लगे, लेकिन अस्पताल से एंबुलेंस ही नहीं मिली. एक तो गरीबी की मार ऊपर से बेटे के जाने का दुख. मानो दुखों और विपत्ति का का पहाड़ एक साथ टूट पड़ा हो.

मजबूर पिता ने बताया- एंबुलेंस की सुविधा के लिए पैसों की डिमांड की जा रही थी, लेकिन ये गरीबी है साहब. परेशानी में और मजबूर बना देती है. एंबुलेंस के लिए पैसे तो थे नहीं फिर एक मजबूर और मजदूर पिता बेटे के शव को कंधे पर लादकर पैदल ही 25 किलोमीटर तक चला गया, लेकिन इसके बाद भी ना कोई प्रधान ना विधायक ना सांसद किसी ने कोई मदद नहीं की.

आप तो भावनाओं में बह गये, आपके कमेंट करके के बताइए की बेशर्म कौन है?

अभी मैंने आपको बताया की संगठन बनाइये, जी हाँ ऐसा ही संगठन छात्र भी बनाये और इसे वारल भी करें ताकि आपके क्षेत्र में एक विश्वविद्यालय बन सके. क्षमा करना लेकिन स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि सांसदों और विधायकों का पेशन और जागरूकता अभियान में इतने पैसे खर्च हो जाते हैं की आपके जनपद में विश्विद्यालय बनाना शायद मुश्किल हो. इसलिए आपके संगठन का पैसा विश्विद्यालय के निर्माण में काम आ सकता है. अगर आप जागरूक बन गये तो फिर इन छात्रों को आमरण अनशन करने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में कॉलेज की संख्या 300 से ज्यादा है, मानक के अनुरूप भी तब भी विश्विद्यालय नहीं है, नतीजा की पूर्वांचल यूनिवर्सिटी की मनमानी छात्रों को आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से परेशान कर रही है. कभी प्रवेश में गड़बड़ी, कभी परीक्षा में तो कभी परीक्षा परिणाम में. पूर्वांचल यूनिवर्सिटी चर्चाओं में बना रहता है. शायद लोड ज्यादा है या लापरवाही? बात यहीं ख़त्म नहीं होती, जब छात्र इन गड़बड़ियों का विरोध करते हैं तो इन्हें धमकी भी दी जाती है?

गाजीपुर के पीजी कॉलेज में छात्रों आमरण अनशन कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि अभी पिछले अपरीक्ष के परिणाम का पता नहीं तब तक नये सेमेस्टर की परीक्षा फॉर्म को सबमिट करने की तिथि घोषित कर दी गई, वो भी तब जब ग्रीष्मकालीन अवकाश था, बहुत से छात्रों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी. विरोध हुआ तो तारीख बढ़ी, लेकिन फिर लेट फीस माँगा गया, कई बार इसका भी विरोध किया गया तो अब मनमानी हो रही है धमकी मिल रही है. बताया जा रहा कि पिछले नौ दिन से छात्र आमरण अनशन कर रहे हैं लेकिन सुनवाई के बजे अब उन्हें धमकी मिल रही है. छात्र नेता दीपक उपाध्याय ने बताया कि जौनपुर यूनिवर्सिटी के सब रजिस्ट्रार अजीत सिंह ने उन्हें फ़ोन किया और छात्रों को परीक्षा से वंचित रखने की धमकी दी और साथ कहा कि पूर्वांचल यूनिवर्सिटी की तरफ से FIR दर्ज करायेंगें.

आमरण अनशन पर प्रवीण पाण्डेय, कमलेश गुप्ता,दीपक उपाध्याय, प्रवीण विश्वकर्मा, दीपक कुमार, प्रवीण विश्वकर्मा, पीयूष बिन्द, रविकांत यादव बैठे हुए हैं तथा अनशन में राजीव यादव, संदीप सिंह,अनिल कुमार, हिमांशु तिवारी,ओम दूबे,लक्ष्मण विश्वकर्मा,दुर्गेश यादव, राहुल कुमार,अभिषेक सिंघानिया, विशाल दुबे,अवनीश यादव, चंद्रशेखर सिंह, रितिक शर्मा, जावेद आलम, अखिलेश कुमार, अनुराग पांडे,सोनू यादव, राममिलन चौहान, माधव कृष्ण, देवांशु पांडे,मनीष कुमार,राजेश यादव,महबूब निशा,सतीश उपाध्याय, संजय कुमार गुप्ता, ओमप्रकाश राजभर इत्यादि इत्यादि छात्र भी शामिल हैं.

सोचिए कि जब हम देश को इतना प्यार करते हैं तो क्यों किसी को बार-बार देशभक्ति जगाने के लिए आगे आना पड़ता है।हमने सुना है और पाया भी है कि प्यार में तो रातों की नींद उड़ जाती है, लेकिन आपका इस देश से यह कैसा प्यार है कि देशभक्ति सो जाती है।मेरी आप जनता से बहुत शिकायत है। आपके भीतर अगर देशभक्ति जागती रहती तो आज जगह जगह तिरंगा लगाने में सरकारों को करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते और विश्विद्यालय और यूनिवर्सिटी के मुझे आपको संगठन बनाने की राय नहीं देनी पड़ती.

खैर मेरी बातों गंभीरता से मत लीजियेगा. खुद विचार कीजियेगा.

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